Diwali 2020: भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है दिवाली?

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भारत के अलग-अलग राज्यों में दीपावली का उत्सव मनाने की परंपरा भी अलग-अलग है। भारत को यदि हम 6 दिशाओं में विभाजित करके देखें तो एक होगा पश्चिम भारत, दूसरा पूर्वी भारत, तीसरा उत्तर भारत, चौथा दक्षिण भारत, पांचवां मध्यभारत और पूर्वोत्तर राज्य अर्थात पूर्व और उत्तर के बीच स्थित राज्य।

गौर करने की बात यह है कि यह त्योहार लगभग सभी राज्यों में 5 दिनों तक चलता है। इस दौरान घर की सफाई-पुताई करना, नए वस्त्र और बर्तन खरीदना, पारंपरिक व्यंजन बनाना, रंगोली बनाना, मिठाइयां बांटना, पटाखे छोड़ना और लक्ष्मी पूजा करना सभी राज्यों में प्रचलित है। बस फर्क है तो पारंपरिक व्यंजनों के स्वाद का, वस्त्रों का और पूजा का।

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पूर्वी भारत में कैसे मनाई जाती है दीवाली

पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार एवं झारखंड राज्य शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत में भी दीपावली का खास महत्व है। यहां भी उत्तर भारत जैसी ही दिवाली मनाई जाती है बस फर्क है व्यंजनों और पारंपरिक वस्त्रों का। इस दिन दीये तो जलाए ही जाते हैं, साथ ही पारंपरिक नृत्य को भी महत्व दिया जाता है। यहां प्रकाश करते लोग अपने घरों के दरवाजे खुले रखते हैं जिससे कि देवी लक्ष्मी प्रवेश कर सकें, क्योंकि देवी लक्ष्मी अंधेरे घर में प्रवेश नहीं करती हैं।

पश्चिम भारत में दीपावली :

पश्चिम भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के हिस्से आते हैं। अखंड भारत के दौरान सिन्ध और बलूचिस्तान के हिस्से भी आते थे।

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गुजरात में क्या कुछ अलग

गुजरात में सभी लोग दिवाली से पहले की रात को अपने घरों के सामने रंगोली बनाते हैं। पश्चिम भारत व्यापारी वर्ग का गढ़ रहा है तो यहां दिवाली में देवी लक्ष्मी के स्वागत का खासा महत्व है। सभी घरों में देवी के लिए चरणों के निशान भी बनाए जाते हैं और घरों को चमकीले प्रकाशों से प्रज्वलित किया जाता है।

गुजरात में दिवाली नए साल के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन कोई नया उद्योग, संपत्ति की खरीद, कार्यालय खोलना, दुकान खोलना और विशेष अवसर जैसे विवाह संपन्न होना शुभ माना जाता है। गुजरात में घरों में देशी घी के दीये पूरी रात जलाए जाते हैं। फिर अगली सुबह इस दीये की लौ से धुआं एकत्र करके काजल बनाया जाता है, जो महिलाएं अपनी आंखों में लगाती हैं। यह बहुत शुभ प्रथा मानी जाती है जिससे पूरे वर्षभर समृद्धि आती है। उत्तर भारत की तरह पश्चिमी भारत में दिवाली को 5 दिन तक मनाया जाता है।