How poor students in India learning during lockdown

अमीरों के बच्चों के लिए डिजिटल और वर्चुअल क्लास है, गरीब कैसे करेगा पढ़ाई?

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Ground Report | News Desk

देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है। इस चरण में देश को ग्रीन, ऑरेंज और रेड ज़ोन में बांटकर अलग अलग रियायतें दी गई हैं। लेकिन तीनों ज़ोन में छात्रों के लिए कोई रियायत नहीं है। सरकार ने स्कूल, कॉलेजों को बंद रखा है और परीक्षाओं को टाल दिया है। ऐसे में सबसे ज़्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शहरी स्कूल बच्चों को डिजीटल माध्यम से पढ़ा रहे हैं और असाईंमेंट दे रहे हैं ताकि लॉकडाउन के दौरान बच्चा शिक्षा से वंचित न रहें। लेकिन कोरोना काल में ऐसे भी कई बच्चें है जिनके पास डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई करने के संसाधन नहीं है। उन बच्चों की शिक्षा का क्या होगा?

टाईम्स ऑफ इंडिया में शोभिता धर अपनी रिपोर्ट में बताती हैं कि कैसे बच्चें किसी तरह पढ़ाई करने के लिए जुगाड़ कर रहे हैं। जिन घरों में एक ही स्मार्ट फोन है वहां बच्चे साथ मिलकर उसका उपयोग कर रहे हैं। स्कूल बच्चों को सिखाने के लिए यूट्यूब पर क्लासेस लगा रहे हैं तो कहीं ऐप के माध्यम से उन्हें सिखा रहे हैं। सरकार ने बच्चों को बिना परीक्षा अगली कक्षा में भेजने का प्रबंध तो कर दिया है लेकिन इससे उन्हें अगली कक्षा में कोर्स का भार झेलना पड़ेगा। आने वाले समय में कंपीटीशन भी बढ़ने वाला है ऐसे में बच्चों का सीखना बहुत ज़रुरी है।

डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करने में कई दिक्कतों का सामना छात्र करते हैं जैसे घर में अच्छी डिजिटल डिवाईस का न होना, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट की स्पीड अच्छी न होना। कई घरों में तो 24 घंटे लाईट की भी व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में डिजिटल पढ़ाई आसान नहीं है। ज़ूम ऐप, स्मार्ट क्लास, बाईजू, वर्चुअल क्लास और ऑनलाईन कक्षाओं की पहुंच केवल शहरों तक ही सीमित है। गांव और दुर्गम इलाकों में रहने वाले बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का कोई प्रबंध नहीं है।

कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल भारत की मुहिम शुरू की थी। सरकार ने लगातार इस बात का प्रचार किया कि डिजिटल को लेकर पूरे देश में एक क्रांति आई है। मोदी सरकार ने कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन में डिजिटल भारत की मुहिम लगभग सफल बताया और देश के बच्चों को इस लॉकडाउन में घर से ही डिजिटल पढ़ाई करने को कहा है ।

सरकार कह रही है कि शैक्षणिक संस्थान बंद है। ऐसे में स्टूडेंट्स घरों में रह कर डिजिटल पढ़ाई कर रहे है। लॉकडाउन डिजिटल भारत को तैयार कर रहा है । पढ़ाई के अलावा बड़े ऑफिस और बिजनेसमैन भी घर पर बैठकर ऑनलाइन ही काम कर रहे हैं। इससे डिजिटल भारत को बढ़ावा मिलेगा। शहर के स्कूलों से लेकर कॉलेजों में पढ़ने वाले सभी वर्ग के स्टूडेंट्स को डिजिटल भारत का कांसेप्ट पसंद आ रहा है। छोटे स्टूडेंट्स भी डिजिटल पढ़ाई में दिलचस्पी ले रहे हैं। स्टूडेंट्स विभिन्न एप और अत्याधुनिक तकनीक द्वारा अपने आपको आने वाले समय के लिए तैयार करने में लगे हुए हैं।

गरीब कैसे पढ़ेगा डिजिटल पढ़ाई ?

सरकार जिस डिजिटल क्रांति की बात कर रही है क्या वो ज़मीन पर नज़र आती है, ऐसा दिखाई तो नहीं पड़ता । लॉकडाउन के कारण लगभग 40 करोड़ लोगों के बेरोज़गार होने का एक बड़ा संकट नज़र आ रहा है । शहरों में बसने वाले लगभत 45 करोड़ प्रवासी मज़दूरों की ज़िंदगी में संकट के बादल आते दिखाई दे रहे हैं । मज़दूरों-ग़रीबों के बच्चों के सामने खाने का संकट बना हुआ, वो क्या डिजिटल पढ़ाई कर रहे होंगे । देश में डिजिटल क्रांति फिलहाल देश के अमीरों तक ही नज़र आती है । अमीरों के बच्चे डिजिटल पढ़ाई कर रहे हैं ।

डिजिटल पढ़ाई अभी इस समय की मांग है, लेकिन लॉकडाउन हटने के बाद कई प्राइवेट स्कूलों के अलावा सरकारी स्कूलों ने यह साफ किया है कि वह ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखेंगे। सप्ताह में एक या फिर महीने में चारी दिनों का सिलेक्शन किया जाएगा। जब स्टूडेंट्स टीचर्स से डिजिटल माध्यम से संवाद करेंगे। मगर क्या सरकार ने उन ग़रीब बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचा है डिजिटल और वर्चुअल पढ़ाई करने में असमर्थ हैं ।

क्या मज़दूरों के बच्चे भी डिजिटल क्रांति का हिस्सा हैं ?

उधर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी मुफ्त शैक्षिक टीवी चैनल स्वयंप्रभा का शुभारम्भ भी किया है। इस चैनल के किशोर मंच पर अब तीसरी कक्षा के छात्र भी अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उन ग़रीब बच्चों के लिए क्या प्रबंध किया जो शहरों से अपने घरों को लौट रहे हैं । क्या देश में करोड़ों मज़दूर जो लॉकडाउन के कारण दर बदर हुए हैं उनके बच्चे भी सरकार की डिजिटल क्रांति का लाभ ले पाएंगे या केवल अमीरों तक ही सीमित है ये डिजिटल क्रांति है ।

लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को घर वापस लाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। राज्यों की मांग पर केंद्र सरकार ने ट्रेन से मज़दूरों और दूसरे लोगों को वापस लाने की अनुमति दी है। हज़ारों मज़दूर पैदल ही अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं । कोई 1500 किलोमीटर पैदल जा रहा है तो कोई 1000 किलोमीटर । मज़दूरों की घर वापसी शहरों की आर्थिक स्थिति को बेपटरी कर देगी ।

आर्थिक मामले के विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में की गई बंदी (लॉकडाउन) से अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर यानी तकरीबन नौ लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के चार फीसदी के बराबर है। बता दें कि भारत में 2011 जनगणना के मुताबिक 45 करोड़ यानी कुल जनसंख्या का करीब 37 फीसदी इंटरनल माइग्रेंट है..यानी वो लोग जो एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करते है रोजी रोटी के लिए जाते हैं ।

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