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ध्वनि प्रदूषण से बढ़ रहे डायबिटीज़ के मरीज़; इन लोगों को अधिक ख़तरा

Diabetes

Diabetes : भारत एक विशाल देश है। आबादी के लिहाज़ से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मुल्क है। 1.25 करोड़ आबादी वाला यह देश यूं तो कई बड़ी चुनौतियों से लड़ रहा है। लेकिन वर्तमान समय में ग़रीबी-बेरोज़गारी (Poverty and Unemployment) के साथ-साथ तेज़ी से बढ़ता प्रदूषण (Pollution) हमारे स्वास्थ्य के लिय एक बड़ी गंभीर समस्या बनता जा रहा है। देशभर में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण की चर्चा तो हर ओर होती दिख जाएगी। लेकिन ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) का ज़िक्र होता नज़र नहीं आता। अब ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) ने हमारे स्वास्थ्य पर हमला करना शुरू कर दिया है।

ध्वनि प्रदूषण से बढ़ रहा Diabetes का ख़तरा

देशभर में प्रदूषण (Pollution) को लेकर जब भी चर्चा की गई है। उन चर्चाओं में ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) का ज़िक्र न के बराबर होता दिखा है। सरकार के तमाम जागरुक कार्यक्रम हों या अन्य किसी संस्था या नागरिकों द्वारा आयोजिक प्रोग्राम। उनमें भी ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) पर बात होती नहीं दिखती। लेकिन अब समय आ गया है कि इसपर बात की जाए।

ध्वनि प्रदूषण के कारण मधुमेह (Diabetes) का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है। 80 से 100 डेसीबल से उपर की ध्वनि में लगातार रहने से टाइप-2 की डायबिटीज़ की संभवाना बढ़ने लगती है। विभिन्न प्रकार के रिसर्च भी इस बात को प्रमाणित करते हैं। फिर भी हम लोग ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

रविवार को कानपुर डायबिटीज़ एसोसिएशन के सातवें वार्षिक कार्यक्रम में वरिष्ठ डॉ. एनके सिंह ने ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) पर बोलते हुए कहा- डायबिटीज़ और ध्वनि प्रदूषण का सीधा संबंध है। लगातार ध्वनि प्रदूषण ने प्रभावित क्षेत्र में रहने के कारण खीज,तनाव और चिड़चिड़ापन जैसी समस्या आपको घेरना शुरू कर देती है।

इस वजह से दिमाग़ से एड्रलिन नामक हार्मोंस का रसाव होना शुरू जाता है। जो तनाव बढ़ाने का सबसे प्रमुख कारण है। इसके साथ ही ये हानिकारण हार्मोंस दिमाग़ से होकर  शरीर की मांसपेशियों और ख़ून के ज़रिए पैंक्रियाज़ के बीटा सेल तक पहुंच जाता है। यह हार्मोंस बीटा सेल से इंसुलिन के रसाव को प्रभावित करता है। इससे डायबिटीज़ की समस्या शुरू हो जाती है।

लगातार पेट का फूलना Diabetes का संकेत

कार्यक्रम में जबलपुर से आए आए डॉ आशीष डेंगरा ने मधुमेह पर कुछ ज़रूरी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज़ की फंगल इंफ्क्शन, मोटापा, पेट और मुंह से लेकर गुदा मार्ग तक की समस्या होती है। भोजन करते समय खाना चबाने में दिक्कत होने लगे तो यह मुंह  में फंगल इंफेक्शन की समस्या है, इस पर डायबिटीज़ की जांच कराना ज़रूरी हो जाता है।

  • भोजन करने के बाद डकार आए खाना गले में फंसा लगे। पेट फूला-फूला महसूस हो तो मतलब आपको डायबिटीज़ की समस्या है।
  • पेट में मांसपेशियों का ठीक से काम नहीं करना डायबिटीज़ का संकेत है। इससे डायबिटीज़ गैस्टो पैरोसिस की समस्या होती है।
  • डायबिटीज़ के कारण पेट की नसें ख़राब हो जाती, पेट में दर्द रहता ह । क़ब्ज़ और दस्त की लगातार समस्या के 30 प्रतिशत लोगों में डायबिटीज़ का समस्या पाई जाती है।

Diabetes का इलाज है पर रोकथाम के प्रयास नाकाफी

ग्रोटर नोएडा से कार्यक्रम में कानपुर पहुंचे डॉ. एसके सोना ने बताया- लोगों को डायबिटीज़ (Diabetes) से बटाया जा सके। इसके लिय रोकथान और प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हमको खुद ही ख्याल रखना होगा। हमको डायबिटीज़ न हो इसके लिय सबसे पहले जीवनशैली और खानपान में बदलाव लाना ज़रूरी है।

भोजन में प्रोटीन अधिक और कार्बोहाइड्रेड व फैट की मात्रा कम हो। रोटी कम खाएं सलाद,दाल और हरी सब्ज़ियों को अपने भोजन में ज़रूर शामिल करें, जिससे फाइबर व प्रोटीन मिल सके। इसके साथ ही दूध-मलाई व मक्खन की मात्रा सीमित होनी चाहिए। रात का भोजन 7 बजे तक हर हाल में खा लेना चाहिए। क्योंकि इसका वैज्ञानिक कारण है हमारे पास। हमारे शरीर में शाम 6-7 के बीच इंसुलिन अधिक बनती है।

अगर आप अपनी मांशपेशियों के साथ हड्डियों व हार्ट की जांच करना चाहते हैं तो 12 सेकेंड के अंदर 6 बार कुर्सी से उठ-बैठकर कर के देख लें। अगर आप को 12 सेकेंड से अधिक लग रहा है तो इसका मतलब आपकी मांसपेशियां कमज़ोर हो रही हैं। आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

स्वाद ग्रंथियों को बेअसर कर रहा डायबिटीज़

डायबिटीज़ (Diabetes) का असर हमारी किडनी, हार्ट, हाथ-पैर और आंखों पर लंबे समय से पड़ रहा है। लेकिन अब इसके कारण लोगों की स्वाद ग्रंथियां भी प्रभावित हो रही हैं। जिस कराण भोजन में किसी प्रकार का स्वाद नहीं मिल रहा।

कानपुर मेडिकल कॉलेज और हैलट अस्पताल के ओ.पी.डी में कई ऐसे मरीज़ आ रहे हैं जो लंबे समय से डायबिटीज़ (Diabetes) से पीड़ित हैं, वो मीठा, नमकीन का स्वाद भी परख नहीं पा रहे हैं। ऐसे पीड़ितों की जीभ के टेस्ट बड यानी जीभ के अंदर की माइक्रो एंजियो वेन्स नष्ठ हो रही है।

हर 5 सेकण्ड में डायबिटीज से एक मौत

  • शायद यह ख़बर आपको हैरान न करे लेकिन आपको चिंता ज़रूर करनी चाहिए। दुनिया में हर 5 सेकंड में एक व्यक्ति की डायबिटीज़ (Diabetes) से मौत हो जाती है।
  • पिछले साल दुनिया भर में डायबिटीज के कारण 67 लाख लोगों की मौत हुई है जो 2020 की तुलना में 22 लाख ज्यादा (45 लाख) है।
  • इससे बड़ी बात यह है कि 50% से 70% लोगों को यह नहीं मालूम कि उन्हें डायबिटीज है। अंधेपन, लकवे, ह्रदयाघात के सबसे अधिक मामले डायबिटीज़ की देन हैं।
  • प्रत्येक 70 सेकंड में पैरों (डायबिटीज़ फुट) में होने वाली बीमारी गैंगरीन के चलते एक टांग काटना पड़ती है।
  • दुनिया भर के डायबिटीज के पेशेंट्स को एक जगह इकट्ठा किया जाए तो यह आंकड़ा विश्व के तीसरे देश की आबादी के बराबर होगा।

भारत की स्थिति भी काफी भयावह है

  • WHO की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 1980 में 108 मिलियन मरीज़ दुनियाभर में डायबिटीज के थे, लेकिन 2014 में यह संख्या 422 मिलियन हो गई थी।
  • चीन के बाद भारत में सबसे अधिक डायबिटीज़ के मरीज हैं। भारत में 77 मिलियन लोग डायबिटीज से परेशान हैं और इसमें 12.1 मिलियन लोग 65 साल से कम के हैं।
  • 2045 तक ये आंकड़ा 27 मिलियन को पार कर जाएगा। कहा जा सकता है कि भारत में हर 11 लोगों में से एक शख्स को डायबिटीज़ है।
  • कई सर्वे में सामने आया है कि भारत में मौत का 7वां कारण अब डायबिटीज़ बनता जा रहा है और हर साल करीब 9-10 लाख इसकी वजह से अपनी जान गवां रहे हैं।
  • साल 2020 में 7 लाख ऐसे लोगों की मौत हुई है, जिनके डायबिटीज़ की वजह से किडनी, हाइपरग्लेसिमिया जैसे रोग हुए थे।

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