DelhiElection : BJP के राष्ट्रवादी क़िले को धाराशाई कर गए लाल क़िले वाले शहर के शहरी

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

जैसे जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव नज़दीक आते गये वैसे वैसे राजनीतिक मर्यादा भी गिरती चली गई। यूं तो आज तक देश का कोई भी चुनाव अपनी मर्यादा और सभ्याता को तार तार किये बिना नहीं लड़ा गया लेकिन इस बार भाषा का स्तर और कीचड़ की राजनीति कुछ अधिक ही गिरता चला गया और इन सब का मुख्य कारण बना शाहीनबाग का वह धरना जो करीब दो महीने से निरंतर जारी है। कभी शाहीन बाग की तुलना पाकिस्तान से कर हिंदुओं को जागरुक करने की अपील की गई तो कभी अरविंद केजरीवाल को आंतकवादी बताया गया। मॉडल टाउन विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने यहां तक कह डाला कि 8 फरवरी को भारत पाकिस्तान का मुकाबला होगा।

अर्थात इस बार शाहीनबाग को निशाने पर लेकर हिंदू मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की खूब कोशिश की गई जिसमें भगवान राम से लेकर हनुमान तक आरोप प्रत्यारोप की राजनीति में इस्तेमाल किये गये। लेकिन आज के अब तक के चुनाव परिणाम ने यह साबित कर दिया कि दिल्ली चुनाव के प्रचार में बीजेपी ने शाहीन बाग को मुख्य मुद्दा बनाकर जो प्रचार किया था लेकिन उसका कोई विशेष प्रभाव दिल्ली के मतदाताओं पर नहीं पड़ा। उन्होंने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति को नकार कर अरविंद केजरीवाल की विकास और काम पर आधारित राजनीति के दावे का समर्थन किया।

वहीं दिल्ली की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाने वाला मुस्लिम मतदाता इस बार केवल बीजेपी को हराने पर ही टिका था। जिसके लिए उसने अपने वोटों को बंटने नहीं दिया और एकतरफा वोट किया। दिल्ली की सियासत में मुस्लिम मतदाता 12 फीसदी के करीब हैं। दिल्ली की कुल 70 में से 8 विधानसभा सीटों को मुस्लिम बहुल माना जाता है, जिनमें बल्लीमारान, सीलमपुर, ओखला, मुस्तफाबाद, चांदनी चौक, मटिया महल, बाबरपुर और किराड़ी सीटें शामिल हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों में 35 से 60 फीसदी तक मुस्लिम मतदाता हैं। साथ ही त्रिलोकपुरी और सीमापुरी सीट पर भी मुस्लिम मतदाता काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ओखला विधानसभा सीट इस चुनाव की महत्वपूर्ण थी क्योंकि यहीं वह शाहीनबाग है जो पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे जनआंदोलन की ताकत बन गया। ओखला में रहने वाले लोग अपने वर्तमान विधायक अमानतुल्ला खान से ज़्यादा खुश नहीं थे लेकिन बीजेपी विरोध के कारण इस समय स्थिति यह है कि ओखला विधानसभा सीट से अमानतुल्ला खान ने रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज की। इससे पहले अमानतुल्ला खान ने साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी बड़े अंतर से ओखला सीट पर जीत दर्ज की थी। इस दौरान बीजेपी के ब्रह्म सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे। आप उम्मीदवार ने बीजेपी के उम्मीदवार को 64,532 वोट के बड़े अंतर से हराया था।

दिल्ली के यह परिणाम इस बात का संकेत हैं कि देश की जनता अब राष्ट्रवाद और सांप्रदायिक एजेंडे पर आधारित राजनीति से ऊबने लगी है। अब वह भारतीय राजनीति में एक स्वस्थय परिवर्तन चाहती है जहां शिक्षा, रोज़गार और जनता की बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हो। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विकास और अपने पांच साल के कामों को दिखाकर जनता को लुभाने वाली आम आदमी पार्टी अगले पांच साल जनता की उम्मीदों पर कितन खरा उतर सकेगी और दिल्ली का यह परिवर्तन का संकेत बाकी प्रदेशों में कितना प्रभाव डालता है।

आप ग्राउंड रिपोर्ट के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप  के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।