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आठ में से 4 बार दिल्ली को महिला मुख्यमंत्री ने संभाला, फिर क्यों पार्टियां महिलाओं को नहीं देती टिकट?

Delhi Elections 2020
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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

देश के सबसे उन्नत राज्यों में से एक दिल्ली, चुनावों की तैयारी में जुट चुकी है। चुनाव तारीखों के एलान के बाद टिकटों के बंटवारे का काम शुरु हो चुका है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसमें जो सबसे ज़्यादा दुखी करने वाली बात है, वह यह है कि महिलाओं को कम ही टिकट दिए गए हैं। दिल्ली में यही ट्रेंड भाजपा और कांग्रेस में भी देखने को मिलता है। नेतृत्व के लिए महिलाओं पर कम भरोसा जाताया जा रहा है जबकी राज्य में अब तक बने 8 मुख्यमंत्रियों में 4 बार महिला मुख्यमंत्री रहीं।

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दिल्ली विधानसभा का अगर इतिहास उठाकर देखा जाए तो पता चलता है कि 1993 में पहली बार हुए चुनावों से लेकर अब तक महिला विधायकों की संख्या 8 के पार नहीं गई। राज्य में 70 सीटें हैं लेकिन महिलाओं को कमान सौंपने में राजनीतिक पार्टियां कतराती नज़र आती हैं।

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1993 में 2 महिला विधायक चुन कर आईं। 1998 में 8 महिला विधायक, 2003 में 6, 2008 में 3, 2013 में 3 और 2015 में महज़ 6 महिला विधायक चुन कर आईं। यह आंकड़ा शर्मिंदा करने वाला है क्योंकि सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित जैसी मुख्यमंत्री दिल्ली दे चुकी है। फिर महिलाओं पर भरोसा कम क्यों। कहा जाता है कि शीला दीक्षित के कार्यकाल में दिल्ली का जितना कायाकल्प हुआ वह सराहनीय रहा उन्होंने लागातार तीन कार्यकाल के लिए दिल्ली का तख्त संभाला और दिल्ली को दुनिया के अग्रणी शहरों की लिस्ट में लाकर खड़ा किया।

महिलाओं को टिकट देने के मामले में देश बहुत पीछे है चाहे लोकसभा चुनाव हों या अन्य राज्य के चुनाव महिलाओं की भागीदारी निराशाजनक है। यह वह दौर है जहां हर क्षेत्र में महिलाओं ने पुरुषों से बेहतर काम करके दिखाया है। महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे हमारे सामने है। दिल्ली जैसा राज्य जहां देश के कई राज्यों से महिलाएं आकर काम करती हैं उनकी सुरक्षा और उनके मुद्दों को एक महिला बेहतर ढंग से समझ सकती है लेकिन यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाती। लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए कई महिला सांसदों को संसद भेजा। इसी तरह हर पार्टी को महिलाओं को राजनीति में आगे आने के लिए प्रेरित करना होगा।

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