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पुलिस-दमकल की गाड़ियाँ खड़ी थी लेकिन आग बुझाने की कोशिश नहीं की, हिंसा का आँखों देखा मंज़र-3

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Ground Report News Desk | New Delhi

Delhi Violence : Khajuri Khas, Chandbag Jaffrabad Report – पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हुई पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी की घटना में अब तक 35 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 250 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। वहीं इससे पहले शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित शर्मा सहित 12 पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर सामने आई थी। इन सब से इतर पढ़ें दिल्ली हिंसा का आंखों देखा मंजर। इस पूरे घटनाक्रम को पत्रकार रवि कौशल ने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए हैरान करने वाले अनुभव साझा किए हैं।

ये दंगे का दूसरा दिन था। पिछली रात जब मैं चाँद बाग़ से लौटा था तब वहाँ के कुछ लोगों को नंबर दे आया था ताकि वो किसी आपात परिस्थिति में फोन कर सके। अगले दिन ऑफिस पहुँचा तो लगा दंगा रुक गया होगा। दोपहर ठीक ठाक बीत ही रही थी कि एक नंबर से कॉल आया कि रवि जी, कल आप मुस्तफ़ाबाद आए थे न, फिर आइए ये दंगाई अब गलियों और घरों में घुसने की कोशिश कर रहे है। मैं तुरंत ऑफिस से निकल पड़ा। क्योंकि गोकुल पुरी सबसे नज़दीक स्टेशन था सोचा वहीं से जाऊँ। फिर ध्यान आया कि स्टेशन बंद है। कश्मीरी गेट उतरा फिर ख़जूरी के लिए ऑटो लिया। ऑटो वाले ने बताया कि भैया घामरी तक जाऊँगा। उससे आगे एक मुस्लिम [मैंने गाली सुधार दी है] व्यक्ति की गाड़ी फूंक दी गई है।

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अब इन लोगों में मेहनत मज़दूरी के बजाय हिंसा और नफ़रत के बीज बो दिए गए हैं
शास्त्री पार्क पार करते ही धुँए का ग़ुबार दूर से ही उठ रहा था। घामरी का रास्ता पार करते ही एक पागल भीड़ हाथों में हॉकी स्टिक, डंडे और धारदार हथियारों के साथ सड़क पर थी। रोड पर एक छोटी सी दीवार है। उस पर कुछ लोग बैठे हुए थे। नज़दीक से जाकर देखा तो पता चला कि ये वो मज़दूर हैं जो सामान्यतः लेबर चौकों पर काम माँगते है। इस समूह में एक आदमी अपनी टूटी हिंदी में दूसरे को उकसाता हुआ नारा लगाता है। नारा जानबूझकर नहीं लिख रहा हूँ। नारा क्या है आप जानते है। दुख इस बात का था कि ये बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दूर दराज के गाँवों से काम की तलाश में दिल्ली आए थे।

अब ये नई भीड़ का हिस्सा है जहाँ बात हम और वो में होती है। मुझे याद है जब शुरू शुरू में हम और बाक़ी परिवार नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में दिल्ली आए थे तो लोग अक्सर कहते पाए जाते थे कि हज़ार किलोमीटर से यहाँ रोटी कमाने आए है, झगड़ा करने नहीं। यहीं से कमा कर लोगों ने पैसे वापस भेजे। इसी पैसे से थोड़ी बहुत तरक़्क़ी हुई। अब इन लोगों में मेहनत मज़दूरी के बजाय हिंसा और नफ़रत के बीज बो दिए गए हैं।

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बग़ल में पुलिस के साथ दमकल की कुछ गाड़ियाँ खड़ी थी। किसी ने आग बुझाने की मशक़्क़त नहीं की
जब थोड़ा आगे बढ़ा तो पता चला कि कुछ ठेलों में आग लगा दी गई है। बग़ल में पुलिस के साथ दमकल की कुछ गाड़ियाँ खड़ी थी। किसी ने आग बुझाने की मशक़्क़त नहीं की। आगे एक रास्ता चाँद बाग़ को कटता है और एक सोनिया विहार को। सोनिया विहार के लिए एक ई रिक्शा लिया। थोड़ा दूर आगे रुक कर फ्लाईओवर पर चढ़ा देखा धुआँ तीन जगहों से उठ रहा था। एक घामरी, दूसरा कच्ची खजूरी तीसरा पक्की खजूरी। थोड़ा हिम्मत करके आगे बढ़ा तो पता चला कि नीचे मार काट जारी है। इसी बीच एक तेज धमाका होता है और धूँए का एक गोल छल्ला आसमान में। एक बाइक जला दी गई थी और इस पर सवार लड़के अपनी जान बचा कर गलियों में भागे।

लोगों को मारा काटा जा रहा था और इसे यह नज़ारा लग रहा था
लोग फ्लाईओवर पर खड़ा होकर सब कुछ देख रहे हैं। एक कार से उतरे व्यक्ति की बात सुनकर मन सन्न रह गया। ये आदमी कह रहा था कि वो कल से खाना बांधकर आएगा और यहाँ खाने के साथ नज़ारे का मज़ा लेगा। मज़ा…लोगों को मारा काटा जा रहा था और इसे यह नज़ारा लग रहा था। फिर समझ में आया कि सालों की नफ़रत का प्रचार ऐसे ही नहीं हुआ है।

आख़िरी बार ऐसी घटना इजराइल के बारे में सुनी थी जब ग़ाज़ा पट्टी पर बम गिराए जा रहे थे और कई बीमार इज़राइली ऊँची जगहों से इस बमबारी का मज़ा पिकनिक की तरह ले रहे थे। खैर, जब आगे बढ़ा तो पाया कि रोड की दोनों ओर कई मर्द डंडा ताने खड़े थे और संदेह की निगाहों से देख रहे थे। डरते डराते मैं पुलिस चौकी तक पहुँचा तो पता चला कि आगे रास्ता पूरी तरह बंद है।

गोकलपुरी जाने के बारे में पूछा तो एक व्यक्ति ने कहा कि मत जाओं हालात ख़राब है
मैंने एक सज्जन व्यक्ति से लिफ़्ट माँगी तो उन्होंने ख़ुशी से मोटर सायकिल पर बिठा लिया। उन्होंने पूछा कहाँ जाना है, मैंने कहा गोकलपुरी। वे कहे जाना तो मुझे भी है। हम पुश्ता रोड से नीचे उतरे तो तो इस व्यक्ति ने गोकलपुरी जाने के बारे में पूछा तो एक व्यक्ति ने कहा कि मत जाओं हालात ख़राब है। फिर खुद ही बोल बैठा कि हमारे लड़कों ने एक व्यक्ति को काट डाला है। [मैंने गाली सुधार दी है] तुम सिग्नेचर ब्रिज से होते हुए चले जाओ। हम रुक रुक आगे बढ़े तो देखा ये भीड़ एक लड़के को गिराकर मार रही थी। मैं अब फ्लाईओवर पर दोबारा लौट आया था।

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एक बैट्री की बड़ी दुकान को लूटकर आग लगा दी गई थी
इसी बीच इस व्यक्ति जिसने पहली सूचना दी थी उसको फोन लगाता रहा पर कोई फ़ोन उठा नहीं रहा था। एक दोस्त का फोन आया कि उसकी जानकार महिला चाँद बाग़ में फँसी हुई है। फ़ोन पर उसने बताया कि उन्हें डर है कि उनकी घर की महिलाओं के साथ कुछ ना हो जाए। मैंने फ़ोन लगाया तो कोई फ़ोन उठा नहीं रहा था। थोड़ा संभलकर नीचे देखा तो एक बैट्री की बड़ी दुकान को लूटकर आग लगा दी गई थी। दुकान का नाम नेशनल ट्रेडर्स। बग़ल में ही चिकन की दुकान को लूटा जा चुका था।

मैं यह सब देख ही रहा था कि बीस बाईस साल का लड़का मेरी तरफ़ मोटर सायकिल पर चिल्लाता हुआ आया। ओए, तू मुस्लिम मुस्लिम है। [मैंने गाली सुधार दी है]। मेरी जान सूख़ चुकी थी। मैंने कहा नहीं भाई। वो लहराता हुआ मेरी बगल से निकल गया। मैं सोच रहा था दुनिया भर के देश अपने युवाओं के लिए स्कूल और विश्वविद्यालयों में निवेश कर रहे थे। हमारे यहाँ नेताओं ने अपना समय इन लड़कों को दंगाई बनाने में निवेश किया है।

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