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दिल्ली के मतदाता ने कितनी ज़ोर से दबाया बटन और किसे लगा करंट, पता चलेगा कल

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विचार | पल्लव जैन

EXIT POLL ने तुक्का लगा दिया है। अलग अलग चैंनलों ने अलग-अलग अनुमान लगा कर इतना बता दिया है कि दिल्ली में 11 तारीख को कुछ भी हो सकता है लेकिन फिलहाल हवा आम आदमी पार्टी के पक्ष में है। नेताओं ने EXIT POLL को हर बार की तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि सरकार उन्हीं की बनेगी देख लीजिएगा। दिल्ली का चुनाव दंगल में तब्दील हो ही गया था। एकतरफा नज़र आने वाले चुनाव को भाजपा ने साम दाम दंड भेद से दिलचस्प बना दिया। काम के नाम पर चुनाव में उतरी आप को भाजपा ने हिन्दू मुस्लिम के दंगल में उतारने का पूरा प्रयास किया लेकिन धीरे-धीरे राजनीति में पारंगत होते केजरीवाल अडिग रहे। भाजपा के तमाम नेताओं ने चुनाव को धारा 370, राम मंदिर, नागरिकता कानून और मोदी जी के राष्ट्र निर्माण पर मोड़ने का प्रयास किया। क्योंकि दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा गया।अब 11 तारीख को पता चलेगा उनका यह प्रयास कितना रंग लाया है। यह नतीजे भाजपा की चुनावी रणनीति को भी प्रभावित करेंगे। इसी साल बिहार में चुनाव होना है अगले साल पश्चिम बंगाल का चुनाव है। दिल्ली में किया गया प्रयोग अगर सफल रहा तो अन्य चुनावों में भी उसकी झलक दिखाई देगी।

एग्जिट पोल में भाजपा को 20 के आसपास सीटों का अनुमान लगाया गया है अगर औसत देखें तो। अगर यह आंकड़ा नतीजों में तब्दील हुआ तो भी भाजपा के लिए बढ़त ही होगी। पिछले चुनाव में उन्हें 3 सीटें मिली थी। आम आदमी पार्टी को अगर दोबारा सफलता मिलती है तो उसके हौंसले और बुलंद होंगे और यह चुनाव आप के राष्ट्रीय पार्टी बनने का मार्ग प्रशस्त कर देगा। कांग्रेस चुनाव से गायब दिखी मानों आप की जीत को ही कांग्रेस अपनी जीत मानकर बैठी हो। 15 साल दिल्ली की सत्ता में रहने वाली पार्टी की इतनी दुर्गती हैरान करने वाली रही।

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दिल्ली के चुनाव में प्रचार के दौरान हमने कई चीजें देखी। पहला दिल्ली चुनाव को शाहीन बाग़ का चुनाव बना दिया गया, देशद्रोह का मुद्दा गोली मारने की हद तक पहुंचा दिया गया। कुछ सिरफिरों ने गोलियां चलाई भी। JNU और जमिया में छात्रों की पिटाई भी चुनाव में छाई रही। केजरीवाल का कन्हैया की फाइल पर बैठे रहना मुद्दा बनाया गया। मंदिर मस्जिद की बात रैलियों में की गई। EVM का बटन दबाकर शाहीन बाग़ में करंट लगाने की अपील मंच से हुई। केजरीवाल को आतंकी बताया गया। हनुमान जी की एंट्री चुनावों में हुई। बिरयानी और जलेबी इस चुनाव में दिखाई दी। हर चुनाव की तरह पाकिस्तान की एंट्री भी हुई। काम के नाम पर कच्ची कॉलोनी के मुद्दे पर थोड़ी खींचतान दिखाई दी फिर अंत में आप के डिप्टी सीएम के OSD को रिश्वत लेते पकड़ा गया। इतना नाटकीय चुनाव पहले दिल्ली ने नहीं देखा। राजनीतिक बयानबाजियों का निम्नतर स्तर इस चुनाव नें छुआ। इस चुनाव को इतिहास में कड़वाहट के लिए याद रखा जाएगा।

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खैर अब यह सब गुज़र चुका, नतीजे दिल्ली को आगे की राह दिखाएंगे। इस कड़वाहट से समाज कितना टूटा शायद इसका एग्जिट पोल हमारे पास नहीं है। खैर चुनाव में अपनाया हर हथकंडा केवल नतीजों के दिन आंकड़ों में तब्दील करने के लिए होता है। समाज को नियति के भरोसे छोड़ दिया जाता है। लोकतंत्र है… जनता मालिक है…नेताओं की भी…देश की भी। नेता चौकीदार हैं, फिलहाल सभी EVM की चौकीदारी में लगे हैं। जब वो सरकार बना लें तो चौकीदारों से सवाल पूछते रहिएगा।

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। ग्राउंड रिपोर्ट ने इस लेख में किसी तरह का कोई संपादन नहीं किया है।

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