हम थाली पीटते रहे उधर कोरोना योद्धा अमित ने इलाज न मिलने से दम तोड़ दिया

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Ground Report | Delhi

सोचिए दिल्ली पुलिस का जवान जो दिन रात सड़क पर कोरोना से जंग लड़ रहा हो, हमारी आप की सुरक्षा के लिए अपने परिवार को छोड़ सड़क पर ड्यूटी कर रहा हो और संक्रमित हो जाने पर उसे इलाज तक न मिले। तो क्या फायदा है आसमान से फूल बरसाने का, क्या फायदा है छत पर खड़े होकर कोरोना योद्धाओं के लिए थाली पीटने का?

अमित, दिल्ली पुलिस का कॉस्टेबल था। उसे कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। सोमवार रात अचानक लक्षण दिखाई दिए। लेकिन अस्पताल उसे सामान्य लक्षण समझ एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकाते रहे। किसी भी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं किया। 24 घंटे के भीतर अमित ने दम तोड़ दिया। अमित की पत्नी और 3 साल का बेटा प्रशासन की लापरवाही से बेसहारा हो गए। सोचिए जब कोरोना योद्धाओं का यह हाल है तो आम आदमी किस मुसीबत का सामना कर रहा होगा। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में बदइंतजामी के कई वीडियो पहले भी सामने आए हैं।

अमित के संपर्क में आए 11 अन्य पुलिसकर्मियों को क्वारन्टीन कर दिया गया है। सोमवार से अमित को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। इसके पहले उसे कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए थे। गले में खराश और बुखार होने लगा था। उसने गर्म पानी और चाय पी। फिर पेरासिटामोल लेने के बाद कुछ आराम हुआ। वह अस्पताल के चक्कर काटता रहा लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार को स्थिति और बिगड़ गई उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। SHO भारत नगर ने उसे RML अस्पताल में भर्ती कराने को कहा। जब अमित को अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक उसने दम तोड़ दिया।

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सरकार तमाम दावे कर ले लेकिन अगर आपको कोरोना के लक्षण है तो भी आपकी सुनवाई नहीं होती। सिस्टम आपकी परीक्षा लेने शुरू कर देता है। कोरोना से ज़्यादा कष्टकारी हमारा सिस्टम है। यह योद्धाओं की नहीं सुनता तो आम आदमी क्या उम्मीद करे। तबतक पीटते रहिए थाली जब तक सिस्टम का सितम आपके हाथ न रोक दे।

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