Delhi on high alert from locust entry, Kejriwal government issued advisory

टिड्डियों की एंट्री से हाई अलर्ट पर दिल्ली, केजरीवाल सरकार ने जारी की एडवाइजरी

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हरियाणा के गुरुग्राम में कहर बरपाने ​​के बाद टिड्डियों का आक्रमण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुरू हो गया है। टिड्डियों का एक छोटा झुंड हरियाणा से सटे दक्षिणी दिल्ली के असोला भट्टी वाइल्डलाइफ सेंचुरी क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शनिवार दोपहर को टिड्डियों के प्रवेश की जानकारी देते हुए कहा कि इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

शनिवार सुबह गुरुग्राम में प्रवेश करने के बाद एक छोटा झुंड दिल्ली के दक्षिण और पश्चिम जिलों में प्रवेश कर गया, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने दिल्ली में रेगिस्तानी टिड्डों के खतरे को रोकने के लिए एक एडवाइजरी जारी की। कई वीडियो सामने आए जिसमें गुरुग्राम के CyberHub इलाके के पास हजारों टिड्डियों से आकाश को ढंकते देखा गया। इसी तरह, दिल्ली के छत्तरपुर के वीडियो में उड़ते हुए टिड्डियों के झुंड दिखाई दिए।

अधिकारियों के मुताबिक एक बड़ा झुंड हरियाणा के झज्जर जिले से सुबह गुरुग्राम में उतरा था और फरीदाबाद और पलवल के रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा था। टिड्डियों के हमले की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया। गुरुग्राम में आक्रमण के बाद, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिण और पश्चिम जिलों के प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के लिए कहा। दिल्ली पर संभावित हमले को मद्देनजर रखते हुए गोपाल राय ने दोपहर में डेवलपमेंट सेक्रेटरी, डिविजनल कमिश्नर और एग्रीकल्चर व हॉर्टिकल्चर डायरेक्टर के साथ बैठक की।

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उन्होंने बैठक के बाद कहा, “एक बड़ा झुंड धीरे-धीरे हरियाणा के पलवल की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उसमे से एक छोटा झुण्ड बिछड़ गया और दिल्ली सीमा पर स्थित असोला भट्टी में घुस गया है जो कि वन विभाग क्षेत्र है। हमने तुरंत वन विभाग को ढोल, नगाड़े और डीजे बजाने और रसायनों का छिड़काव करने के निर्देश दिए है।”

दिल्ली सरकार द्वारा जारी किये गए एडवाइजरी के मुताबिक, जिला मजिस्ट्रेटों को टिड्डियों को विचलित करने के लिए ग्रामीणों और निवासियों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात करने के लिए कहा गया है। शोर मचाकर और नीम की पत्तियों को जला कर टिड्डियों को विचलित किया जा सकता है। शोर मचाने के लिए ड्रम / ढोल, बर्तनों को बजाना, पटाखे फोड़ना, डीजे और अन्य उपायों का प्रयोग किया जा सकता है।

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इसके अलावा, दरवाजों और खिड़कियों को बंद रखना, प्लास्टिक की शीटों से बाहर रखे पौधों को ढंकना, और कीटनाशक जैसे मेलाथियान (Melathion) या क्लोरोपायरीफॉस (Chloropyriphos) का छिड़काव करना भी एक सुझाव है। एडवाइजरी यह जानकारी भी देती है कि टिड्डियाँ आमतौर पर दिन के समय उड़ते हैं और रात में आराम करते हैं। इसलिए, रात के समय आराम न करने देना और कीटनाशक का छिड़काव करना काफी प्रभावशाली उपाए है। कीटनाशक का छिड़काव करते समय लोगों को पीपीई किट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।

गोपाल राय ने यह भी कहा कि, “हवा की दिशा अभी दक्षिण की ओर है और यदि हवा की दिशा बदल जाती है तो संभव है कि झुंड दिल्ली में प्रवेश कर सके। हम इस पर केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ भी संपर्क में रहेंगे, ताकि अगर हरियाणा में झुंड के चाल में कोई बदलाव आए तो हमें अपडेट किया जाए।”

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बता दें, भारत में विनाशकारी रेगिस्तानी टिड्डियों के साथ लड़ाई अप्रैल-मई के महीने में शुरू हुई। रेगिस्तानी टिड्डियों के झुंड ने पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किया, जहां उन्होंने पिछले साल ईरान से उड़ान भरी थी। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र के बाद हरियाणा और मध्य भारत के कई हिस्सों में रेगिस्तानी टिड्डों के बड़े पैमाने में फसलें नष्ट करने कि खबर आ रही है। अगर टिड्डियों का यह हमला अनियंत्रित हुआ तो टिड्डी पौधों और फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।