इस देश में ग़रीबों की मौत को कब तक मुआवज़े के कफ़न से ढंका जाता रहेगा ?

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित एक फैक्ट्री में सुबह भीषण आग लग गयी। जिसने अंदर सो रहे मज़दूर समेत अन्य लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में अब तक 43 जानें जा चुकी है। सभी की मौत दम घुटने की वजह से हुई। 59 लोगों को नज़दीकी LNJP अस्पताल पहुंचाया गया है।

दिल्ली के अनाज मंडी में लगी आग की जांच करने पहुंची एनडीआरएफ ने कहा कि इमारत में कार्बन मोनोऑक्साइड भरने से अधिकांश लोगों की दम घुटकर हुई मौत हुई। गैस, तेल, कोयला और लकड़ी जैसे ईंधनों के पूरी तरह से नहीं जल पाने पर यह रंगहीन, गंधहीन खतरनाक गैस बनती है।

आग में फंसे हुए एक व्यक्ति के फोन पर की गई बात के कुछ अंश

“मोनू भैया आग लग गई है… टाइम कम है भागने का कोई रास्ता नहीं है, खत्म हुआ भैया मैं तो, घर का ध्यान रखना, अब तो सांस भी नहीं ली जा रही…. किसी को एकदम से मत बताना, पहले बड़ों को बताना….बच्चों. सब घरवालों को संभालकर रखना….”।

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बीबी इमराना, मां रहमत और बच्चों की जिंदगी की संवारने की चाहत पाले मुशर्रफ की खुद की जिंदगी का दर्दनाक खात्मा हो गया। बिहार और दूरदराज के इलाकों को छोड़ अपनों की दो जून की रोटी का जुगाड़ करने निकले दर्जनों मजदूर जलकर खाक हो गए। छह सौ गज में बनी इमारत के इकलौते निकास पर लटकते ताले ने इनकी मौत पर मानों आखिरी मोहर लगा दी।

दिल्ली पुलिस नॉर्थ डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने कहा, ‘इमारत के मालिक रेहान और उसके मैनेजर फुररान को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम मामले की जांच कर रहे हैं। हमें जो जानकारी मिली उसके अनुसार कोई अन्य शव मिलने की कोई संभावना नहीं है। ’दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने बताया कि 43 श्रमिक मारे गए और दो दमकल कर्मी घायल हुए हैं। 150 दमकल कर्मियों ने बचाव अभियान चलाया और 63 लोगों को इमारत से बाहर निकाला।

एक चश्मदीद मोहम्मद कामिल ने मीडिया को बताया-

“फैक्टरी में ज्यादातर लोग दिहाड़ी पर काम करते थे। यहां मजदूर अक्सर जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसी घटनाओं को रोकने का कोई इंतजाम नहीं है। इस तरह के हादसे यहां होते रहते हैं। सात महीने पहले भी यहां ऐसी ही आग लगी थी। हालांकि आग बड़ी नहीं थी लेकिन इसमें दो लोगों की मरने की खबर आई थी।

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अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रतीत होता है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। उन्होंने बताया कि इकाइयों के पास दमकल विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं था। दमकल अधिकारियों ने बताया कि इलाके के संकरा होने के कारण बचाव कार्य को अंजाम देने में दिक्कत आ रही है। जब आग लगी तो कई मजदूर गहरी नींद में थे। इमारत में हवा आने-जाने की उचित व्यवस्था नहीं थी इसलिए कई लोगों की जान दम घुटने से चली गई।

बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि-

ये अब एक आम बात हो गई है। ऐसी घटनाएं होती हैं, जांच की जाती है लेकिन सरकार कुछ नहीं करती है। आवासीय क्षेत्रों में चलने वाले कारखानों को दूसरी जगह दी जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

दिल्ली अग्निकांड में 43 मजदूरों की मौत पर अब सियासत शुरू हो गई है। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि इलाके में बिजली की तार लटक रहे हैं लेकिन कई शिकायतों के बाद भी सरकारी एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस ने इस घटना के लिए आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और बीजेपी के नेतृत्व वाले नगर निगमों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने बीजेपी शासित दिल्ली एमसीडी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

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