Delhi Elections 2020: Sunil Yadav BJP candidate from New Delhi constituency against CM Arvind Kejriwal, know him in 10 points

Delhi Elections 2020 : इन 10 बिंदुओं में समझें कौन हैं केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बीजेपी नेता सुनील यादव

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Nidhi Pathak | New Delhi

दिल्ली में विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections 2020) के मद्देनज़र राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। बीजेपी (BJP) ने दूसरी सूचि में सुनील यादव (BJP leader Sunil Yadav) 10 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। दिल्ली की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली नई दिल्ली विधानसभा सीट (new delhi assembly constituency) से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) चुनाव लड़ रहे हैं और केजरीवाल के खिलाफ बीजेपी ने सुनील यादव (BJP Leader Sunil Yadav) पर भरोसा जयाता है। सुनील यादव का मुकाबला न सिर्फ सीएम अरविंद केजरीवाल बल्की कांग्रेस प्रत्याशी रोमेश सभरवाल (Congress Candidate Romesh Sabharwal) से भी होना है। बीजेपी की ओर से नई दिल्ली विधानसभा सीट से सुनील यादव का नाम सामने आते ही लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है कि आखिर कौन है सुनील यादव… Ground Report पर आज हम आपको बीजेपी उम्मीदवार सुनील यादव के बारे में 10 अहम बातें बता रहे हैं।

1-बीजेपी के सबसे भरोसेमंद और जुझारू कार्यकर्ताओं में से एक-
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले सुनील यादव बीजेपी के सबसे भरोसेमंद और जुझारू कार्यकर्ताओं में से एक हैं। वर्तमान में सुनील यादव भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष हैं। सुनील यादव पेशे से वकील हैं और अपने शुरूआती दिनों से ही सामाजिक कार्यों में आगे रहे हैं।

2-केजरीवाल के खिलाफ दावेदारी से बने चर्चा का केंद्र-
यूं तो सुनील यादव का राजनीतिक सफर काफी पहले ही शुरू हो गया था लेकिन नई दिल्ली विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ टिकट मिलने से सुनील यादव चर्चा का केंद्र बन गए हैं। सुनील यादव के राजनीतिक करियर की शुरूआत भाजपा की युवा इकाई के मंडल अध्यक्ष के तौर पर हुई थी।

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3-अन्य की तुलना में काफी बेहतर रहा रिपोर्ट कार्ड-
बतौर मंडल अध्यक्ष सुनील यादव का रिपोर्ट कार्ड अन्य की तुलना में काफी बेहतर रहा। सुनील यादव का रिपोर्ट कार्ड देखते हुए उन्हें युवा मोर्चा में जिलाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश महामंत्री और दिल्ली के सचिव पद की लगातार जिम्मेदारियां मिलती गईं।

4-बीते चुनाव में नहीं मिल पाया था टिकट-
बता दें कि इससे पहले साल 2013 और 2015 के विधानसभा चुनावों में भी सुनील यादव को टिकट मिलने की चर्चा थी, लेकिन आखिरी समय में खेल बदल गया था और उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। हालांकि इस बार भाजपा अपने स्थानीय नेता पर पूरा भरोसा जता रही है।

5-नगर-निगम परिषद का चुनाव लड़ चुके हैं सुनील यादव-
गौरतलब है कि सुनील यादव इससे पहले साल 2017 में एंड्रयूज गंज से नगर निगम पार्षद के उम्मीदवार रहे हैं लेकिन उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

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6-अन्य के मुकाबले सोशल मीडिया पर भी सक्रीय-
बेहद कम नेता हैं जो ग्राउंड के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी एक्टिव नज़र आते हैं लेकिन सुनील यादव का नाम उन चंद नेताओं में हैं जो ज़मनी स्तर के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव नजर आता हैं। बीजेपी लीडर सुनील यादव के ट्वीटर पर 16 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं जबकी फेसबुक पर उनके एक लाख से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

7-सुनील यादव का दावा केजरीवाल पर पड़ेंगे भारी-
नई दिल्ली विधानसभा सीट से बीजेपी की ओर से हुँकार भरने वाले सुनील यादव आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं। उन्हें विश्वास हैं कि वे स्थानीय क्षेत्र पर अपनी जमीनी पकड़ के चलते वे अरविंद केजरीवाल पर भारी पड़ेंगे क्योंकि वे स्थानिय रहवासी हैं और जनता उन्हें बेहतर जानती समझती हैं।

8-श्याम जाजू खुद सुनील यादव को जेपी नड्डा के घर लेकर पहुंचे-
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टिकट की घोषणा वाले दिन सुबह 10 बजे सुनील यादव को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के लिए बुलाया गया था। बीजेपी की ओर से दिल्ली चुनाव प्रभारी श्याम जाजू, सुनील यादव को लेकर जेपी नड्डा के घर पहुंचे थे।

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9-इस तरह जेपी नड्डा ने लगाई सुनील यादव के नाम पर मुहर-
सुनील यादव समेत तमाम नेताओं का रिपोर्ट कार्ड बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के टेबल पर था। नड्डा श्याम जाजू और सुनील यादव के पहुंचने से पहले ही अन्य नेताओं से नई दिल्ली सीट से टिकट की रेस में रहे नेताओं की चर्चा कर चुके थे। काफी सोच विचार के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सुनील यादव के नाम पर मुहर लगा दी।

10-सुनील यादव के नाम पर दोबारा लगाई गई मुहर-
सुनील यादव के नाम पर मुहर के बावजूद इस बात की चर्चा तेज़ रही की बीजेपी सुनील यादव की बजाय दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रहे सतीश उपाध्याय मैदान में उतार सकती है लेकिन सुनील यादव खुद मीडिया से मुखातिब हुए और इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि मैं ही केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ूंगा। मैं यहीं का रहने वाला हूं और जनता मुझे जानती है। सुनील यादव ने कहा कि, आज सीएम दफ्तर में जाओ तो आपको अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। मैं तो यहीं का विधायक हूं, हमेशा मौजूद रहूंगा।

बता दें कि, दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं। इन 70 सीटों में से 58 सामान्य वर्ग के लिए तो 12 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 14 जनवरी से 21 जनवरी तक नामांकन किया जाएगा। जबकी नामांकन पत्रों की जांच परख 22 जनवरी को और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी नियत की गई है।

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नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर पर्चा व शपथ पत्र भरा जा सकता है। उम्मीदवारों को जमानत राशि के रूप में दस हजार रुपये जमा कराने होंगे। आरक्षित सीट के लिए यह राशि पांच हजार तय की गई है। 8 फरवरी को वोटिंग होगी जबकी रिजल्ट 11 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।