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Delhi Elections 2020 : AAP विधायकों से नाराज़गी लेकिन केजरीवाल को फिर मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती है दिल्ली की जनता

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Aditya Yadav | Ground Report News Desk

बीते सात दिनों से ग्राउंड रिपोर्ट की टीम दिल्ली की ख़ाक छान रही है अलग-अलग विधानसभा से चुनावी सर्वे करने पर जो हमें पता चला वो काफी चौकाने वाला है। रिपोर्टिंग के दौरान जब हम किसी विधानसभा क्षेत्र में गए तो इस दौरान लोगों से बातचीत में पाया कि लोगों में अपने क्षेत्रीय विधायक के प्रति खासी नाराजगी है , लेकिन वे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य क्षेत्रीय सांसद और विधायक।

खैर, नतीजा लगभग तय है। बीते पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड देखें तो एक बार फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की संभावनाएं सबसे अधिक है या यूं कहें कि सीएम अरविंद केजरीवाल बहुमत का आंकड़ा बहुत आसानी से पार करने में सफल होंगे।

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दिल्ली इलेक्शन के मद्देनजर ग्राउंड रिपोर्ट टीम दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया और घंटो ‘ग्राउंड’ और ‘ऑनलाइन’ सर्वे कर आकलन किया है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए आम आदमी पार्टी के खाते में करीब 50-60 सीट तो बीजेपी को 5-6 वहीं कांग्रेस को 2-3 सीटें मिल सकती हैं।

आम तौर पर चुनावों में अहम मुद्दे धार्मिक होते हैं लेकिन दिल्ली की स्थिति इस बार अलग ही नज़र आती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक ओर जहां प्रशांत किशोर के कैंपेन “अच्छे बीते पांच साल, लगे रहो केजरीवाल” के भरोसे अपने कार्यकाल में तमाम क्षेत्रों में हुए विकास का दावा कर रहे हैं तो वहीं बीजेपी इन दावों को खोखला बता रही है जबकी कांग्रेस दावा कर रही है कि विकास तो शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते हुए हुआ था।

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बता दें कि, दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार करीब 1 करोड़ 46 लाख मतदाता हिस्सा लेंगे। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी रणबीर सिंह के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में 1 करोड़ 46 लाख 92 जार 136 मतदाता हैं। वहीं इन सब से इतर चुनाव आयोग ने जातिगत आधार पर भी वोटर्स की जानकारी साझा की है।

इस जानकारी के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोटिंग करने वाले कुल मतदाताओं में 12 फीसदी ब्राह्मण वोटर, 5 प्रतिशत गुर्जर मतदाता, 2 फीसदी यादव तो पंजाबी खत्री वोटरों की संख्या 10 फीसदी हैं। वहीं 7-7 फीसदी जाट और राजपूत वोटर्स हैं जबकी करीब 8 फीसदी वैश्य वोटर बताएं गए हैं।

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गौरतलब है कि, साल 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कुल 1413 उम्मीदवारों ने नामांकन पर्चा भरा था लेकिन मैदान में 924 उम्मीदवार ही चुनाव लड़ रहे थे। वहीं इस चुनाव में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार करीब 1500 से अधिक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकते हैं जबकी एक हजार के करीब उम्मीदवार दावेदारी कर सकते हैं।

वहीं इस चुनाव में करीब 1 लाख कर्मचारियों की तैनाती की गई है। चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों के लिए 2689 जगहों पर वोटिंग होंगी जिसके लिए कुल 13750 पोलिंग बूथ तैयार किए है।