Home » HOME » तो क्या जल्द बेअसर हो जाएंगे एंटीबायोटिक्स ?

तो क्या जल्द बेअसर हो जाएंगे एंटीबायोटिक्स ?

Sharing is Important

एम. एस. नौला | ग्राउंड रिपोर्ट

यदि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल ढंग से नहीं किया गया तो यह खतरनाक हो सकता है ‘ !

एंटीबायोटिक्स के जनक अलेक्जण्डर फ्लेमिंग ने यह उस वक़्त चेताया था जब 1945 में उन्हें पेन्सिलिन की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा जा रहा था।

alexander flemming, antibiotics
Alexander Flemming

आज लगभग 70 साल बाद डॉ फ्लेमिंग की चेतावनी प्रत्यक्ष तौर पर खतरनाक ढंग से विश्व को विचलित किये जा रही है। बैक्टीरिया ने अपने आप को इतने वर्षों में इतना मज़बूत कर लिया है की एंटीबायोटिक्स उसके सामने खुद को मज़बूर पा रहे हैं।

कैसे काम करता है एंटीबायोटिक?

एंटीबायोटिक ,बक्टेरिया को खत्म करने के लिए उनकी कोशिकाओं में घुस जाते हैं; चतुर बक्टेरिया स्वयं को बचाने के लिए अपना जेनेटिक मेकअप बदल लेते हैं। बक्टेरिया तेज़ी से अपनी संख्या में इज़ाफ़ा तो कर ही लेते हैं साथ साथ डेवेलप प्रतिरोधी जीन्स भी अगली पीढ़ी को सौंप देते हैं। जिसके चलते अगली पीढ़ी का बक्टेरिया आश्चर्यजनक रूप से शक्तिशाली बन जाता है।

एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करना ज़रूरी

डॉ फ्लेमिंग ने उदहारण देते हुए कहा था कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल मुक्कमल तौर पर करें। यदि आप एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा नहीं करते तो सारे बैक्टीरिया खत्म नहीं होते ….बचे हुए बैक्टीरिया और भी ताकतवर बन सकते हैं। यानी आपके शरीर में प्रतिरोधी बैक्टीरिया तैयार हो सकते हैं और उसके खात्मे के लिए आपको उससे भी शक्तिशाली एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

antibiotics death

हर साल 7 लाख लोगों की मृत्यु

एक अनुमान के मुताबिक अंधाधुन्द एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से रेसिस्टेंट (प्रतिरोधी) बैटरियों का कहर इस कदर बढ़ सकता है कि 2050 तक 10 लाख लोगों की जान ले सकता है यह आंकड़ा फिलहाल सात लाख हर साल है।

क्या खत्म हो जाएगी एंटीबायोटिक?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन 2010 में ही वैश्विक तौर पर गंभीर और तेज़ी से बढ़ते इस खतरे के प्रति चेता चुकी है। 2013 में हुए वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में डब्लू एच ओ के महानिदेशक मार्गरेट चान कह चुके हैं कि सामान्य एंटीबायोटिक्स के प्रति बैक्टीरिया जिस तरह से रेज़ीस्तेंट हो रहा है उसके चलते इस आधुनिक दवा का अंत हो सकता है। बेअसर हो रही एंटीबायोटिक दवाएं एक यक्ष प्रश्न सा बनता जा रहा है दुनिया भर में।

READ:  Bank Sakhis to the Rescue

लेसेट जर्नल के अनुसार हिंदुस्तान में साधारण ज़ुकाम में अधिकतर इस्तेमाल होने वाले अमोक्सीलीन का असर खत्म हो चुका हैं।अमरीका जैसे देश में भी श्वांस से जुड़ी तकलीफो में हर साल तकरीबन 4 लाख लोगों को एंटीबायोटिक प्रेसक्राइब्ड की जाती है।

बिना ज़रूरत भी दी जा रही एंटीबायोटिक

2013 में जर्नल ऑफ़ एंटी माइक्रोबियल कीमो थरेपी में छपी रिपोर्ट के अनुसार दो तिहाई ऐसे लोगो को एंटीबायोटिक दी गई थी जिन्हें उसकी जरूरत नहीं थी। हमारे देश की तस्वीर और भी भयावह है WHO की एक रिपोर्ट (2010) बताती है की तकरीबन 50 फीसदी लोग बिन डॉ की सलाह से एंटीबायोटिक लेते हैं। 4 में से 1 मरीज़ तबियत ठीक होते ही एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा नहीं करते। 18 फीसदी डॉ सर्दी ज़ुकाम में तक एंटीबायोटिक लिख देते हैं। यह पिक्चर देश की राजधानी की है, तो छोटे मोटे कस्बो, ददोरदराज़ की स्थिति का अंदाज़ लगाया जा सकता है।

एंटीबायोटिक टाइम बॉम से कम नहीं

विभिन स्रोर्तो के हवाले से कहा जा सकता है की हमारे देश में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल में पिछले 5 सालो में इज़ाफ़ा हुआ है। तकरीबन 50 फीसदी मरीज़ एंटीबायोटिक की मांग करते हैं, या फिर खुद ही ख़रीद कर खा लेते हैं, खुद का इलाज़ करते हैं। और इतने ही केमिस्ट बिना पर्चे की एंटीबायोटिक बेचते है। (हालाँकि एंटीबायोटिक बेचने पर लगी स्ट्रिक्ट प्रतिबंध के चलते इसमें कमी आयी है ) 70% डॉ सर्दी ज़ुकाम में एंटीबायोटिक प्रेसक्राइब्ड करते है
एंटीबायोटिक सिर्फ मेडिसिन्स का ज़रिये ही हमारे शरीर में नहीं पहुँचते बल्कि खाद्य पदार्थो के ज़रिये भी प्रवेश कर रहे हैं। जानवरों और फसलों पर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल होता है। ये एंटीबायोटिक हमारे शरीर में टाइम बॉम से कम नहीं होते।

READ:  Every 11 minutes a woman or girl is murdered by a relative

क्या होता है कोलिस्टिन?

चीन में एक मरीज़ में ‘कोलिस्टिन’ नामक एंटीबायोटिक का प्रतिरोधी जीन्स पाया गया। कोलिस्टिन के इस्तेमाल से किडनी खराब हो सकती है ,इसलिए इसका उपयोग कुछ खतरनाक बैक्टेरिया के खिलाफ अंतिम अस्त्र के तौर पर रखा जाता है। लेकिन फसलो में इसके इस्तेमाल के चलते वह उस मरीज़ तक पहुंच गया था। कोलिस्टिन के खिलाफ प्रेतिरोधी बैक्टरिया तैयार होना वाकई खतरनाक मामला है।

हार मानना विज्ञान की फितरत नहीं

हालांकि इस बात से इनकार नही किया जा सकता की एंटीबायोटिक की अंतिम लाइन , जो बैक्टरिया के खिलाफ अंतिम अस्त्र माना जा सकता है , के बाद खतरनाक बैक्टरिया से लड़ना नामुमकिन हो जायेगा । लेकिन हार मान लेना साइंस की फितरत नहीं है।

पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले सूक्ष्म मॉलिक्यूल ड्रग्स की जगह विशेष रूप से तैयार किये गए एंटीबॉडीज़ (फ़ॉर्म्युलेटेड एंटीबॉडीज़) का इस्तेमाल अस्त्र के तौर पर किया जा सकता है। क्यों की कई तरह के बैक्टीरिया एंटीबॉडीज़ तैयार नहीं कर पाते , हालाँकि यह इलाज़ काफी महंगा होगा। वायरस को बैक्टरिया के खिलाफ इस्तेमाल पर भी काम चल रहा है।