लॉकडाउन का अजब खेल, पानी से सस्ता हो गया तेल

crude oil price on historical low
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Ground Report | News Desk

दुनियाभर में कोरोनावायरस की वजह से लॉकडाउन है, लोग घरों में कैद है, ज़रुरी चीज़ों के अलावा सभी व्यापार बंद हैं। इसी का असर दिखा कच्चे तेल की कीमतों पर। इतिहास में पहली बार कच्चे तेल की कीमतें शून्य से नीचे चली गई। यानि एक बोतल पानी की कीमत कच्चे तेल से ज़्यादा होगी। कच्चे तेल का वायदा भाव सोमवार को -$3.70 प्रति बैरल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ऐसा कच्चे तेल की मांग में आई भारी कमी की वजह से हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट की बड़ी वजहें-

1.दुनिया इस समय कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन घोषित है। लॉकडाउन की वजह से फैक्ट्रियां बंद हैं और यातायात सुविधाएं भी बंद हैं। इसलिए दुनिया भर में तेल की खपत में कमी की वजह से कच्चे तेल की मांग में भी भारी कमी आई है।

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2.दरअसल, अमेरिका के पास एक तरह से कच्चे तेल का भंडार क्षमता से अधिक हो चुका है। वहां स्टोरेज सुविधाएं अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंच चुकी हैं। एस-एंड-पी ग्लोबल प्लैट्स के मुख्य विश्लेषक क्रिस एम. के अनुसार, तीन सप्ताह के भीतर कच्चे तेल के सभी टैंक भर जाएंगे। ऐसे में आगे तेल उत्पादन के लिए जरूरी है कि मौजूदा भंडार को खाली किया जाए।

3.एक तरफ तो अमेरिका के पास तेल रखने की जगह नहीं बच रही है। दूसरी तरफ कोरोना वायरस संकट के कारण मांग घटने से कोई व्यापारी फिलहाल कच्चा तेल खरीदकर उसे अपने पास रखने की स्थिति में नहीं है। जिस वजह से दोपहर बाद के कारोबार में वॉल स्ट्रीट में शेयर भी लुढ़क गए। एस-एंड-पी 500 में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई।

4.सबसे ज्यादा ड्रामा कच्चा तेल के बाजार में हुआ। जहां मई डिलीवरी अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत शून्य से नीचे यानी माइनस 3.70 डॉलर/बैरल पहुंच गई। ऐसा पहली मर्तबा हुआ है जब अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत निगेटिव में चली गई हो।

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5. दरअसल, मई डिलीवरी के सौदे के लिये मंगलवार अंतिम दिन है और व्यापारियों को भुगतान करके डिलीवरी लेनी थी। लेकिन मांग नहीं होने और कच्चा तेल को रखने की समस्या के कारण कोई डिलीवरी लेना नहीं चाह रहा है। यहां तक कि जिनके पास कच्चा तेल है, वे पेशकश कर रहे हैं कि ग्राहक उनसे कच्चा तेल खरीदे। साथ ही वे उसे प्रति बैरल 3.70 डॉलर की राशि भी देंगे। (इसी को कच्चे तेल की कीमत शून्य डॉलर/बैरल से नीचे जाना कहते हैं।

6. अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत बेशक इतिहास में पहली बार माइनस में पहुंची है, लेकिन यहां आपको बता दें कि यह गिरावट सिर्फ मई महीने के लिए है। दरअसल, मई महीने की डिलीवरी के लिए तेल सौदे का 21 अप्रैल यानी मंगलवार को आखिरी दिन है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक तेल की मांग नहीं होने की वजह से तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं कि कोई दुकानदार अपना स्टॉक खाली करने के लिए सामान को सस्ता कर दे।

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