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अजीत वाडेकर: क्रिकेट की दुनिया का वो ‘सितारा’ जिसने टीम इंडिया को लड़ना नहीं, जीतना सिखाया था

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फोटो साभार: ट्विटर

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और शानदार बाल्लेबाज अजीत वाडेकर का बीते बुधवार लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वाडेकर 77 वर्ष थे। 1 अप्रैल 1941 को मुंबई में जन्मे वाडेकर ने जसलोक अस्पताल में अंतिम सांस ली। 13 दिसंबर 1966 को वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले वाडेकर आठ साल तक टीम इंडिया के लिए खेलते रहे।

साल 1971 में उन्हें भारतीय टीम का कप्तान घोषित किया गया, इस टीम में सुनील गावस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ, फारुख इंजीनियर, बिशन सिंह बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, भगवत चंद्रशेखर और श्रीनिवास वेंकटराघवन जैसे दिग्गज खिलाड़ी शामिल थे।

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इतनी मजबूत टीम की कमान संभालते ही वाडेकर ने भारतीय क्रिकेट को सबसे बड़ा तोहफा दिया जो आज भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है और इसे दोहरा पाना आज की टीम के लिए ख़ासा मुश्किल भी।

वाडेकर वेस्टइंडीज और इंग्लैंड की सरजमीं पर टीम इंडिया को पहली सीरीज जिताने वाले पहले कप्तान थे। भारतीय टीम को यह सफलता साल 1971 में हासिल हुई थी।

वाडेकर ने टीम इंडिया के लिए 16 टेस्ट मैचों में कप्तानी की। इस दौरान 4 में उन्हें जीत और 4 में हार का सामना करना पड़ा और इन 4 में से 2 जीत उन्हें उपमहादीप से बाहर उस समय की सबसे खतरनाक टीम वेस्टइंडीज और इंगलैंड के घर में मिली थी।

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वहीं उनकी कप्तानी में 8 मैच बराबरी पर समाप्त हुए। उनकी कप्तानी में ही भारतीय टीम ने साल 1971 में इंग्लैंड दौरे पर 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से जीत दर्ज की थी। वहीं इसके बाद इंग्लैंड दौरे में उनकी टीम ने 3 मैचों की सीरीज में 1-0 से विजय हासिल की थी। यह इन दोनों देशों में भारतीय टीम का पहली सीरीज जीत थी।

बांए हाथ के बल्लेबाज रहे वाडेकर ने 37 टेस्ट और 2 वनडे में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी कप्तानी में ही भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला एकदिवसीय मैच खेला था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वाडेकर ने नब्बे के दशक में टीम इंडिया के कोच का पद भी संभाला।

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वाडेकर ने भारत के लिए 37 टेस्ट खेले। 37 टेस्ट की 71 पारियों में उन्होंने 31.07 की औसत से 2113 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 14 अर्धशतक जड़े। टेस्ट में उनका सर्वाधिक स्कोर 143 रन था। वहीं 2 वनडे मैचों में उन्होंने 36.50 की औसत से 73 रन बनाए। इसमें एक अर्धशतक भी शामिल है।

वनडे में उनका सर्वाधिक स्कोर 66 रन था। वाडेकर की कप्तानी में ही भारतीय टीम में अपना एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय खेलो का डेब्यू भी इंग्लैंड के विरुद्ध किया था।

भारतीय क्रिकेट वाडेकर को सदैव एक ऐसे कप्तान के रूप में याद रखेगा जिसने सबसे पहले भारतीय क्रिकेट टीम को लड़ना नहीं जीतना सिखया था।

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