गौमाता कैबिनेट और गौ टैक्स मध्यप्रदेश

गौमाता को पहली रोटी खिलाना हमारी संस्कृति, इसी तर्क पर लगेगा एमपी में गौ टैक्स

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मध्यप्रदेश की गौ कैबिनेट इन दिनों चर्चा में है। इस नवनिर्मित कैबिनेट का काम होगा गाय का संरक्षण। गाय भारत में केवल दूध ही नहीं देती बल्कि वोट भी देती है। कमलनाथ की जिस सरकार को गिराकर शिवराज सत्ता में आए हैं उनका भी यही मानना था। गाय को लेकर देश के तमाम राज्यों में सेस, टैक्स और मंत्रालय तक बनाए गए हैं। गौशालाएं तैयार कराई गई हैं, जिनके पास गायों को चारा खिलाने तक का बजट नहीं है।

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कई ऐसी रिपोर्ट आए दिन प्रकाशित होती है जहां गौशालाओं की दयनीय हालत का ज़िक्र होता है। लेकिन सरकार पैसा खर्च ज़रुर करती है वो गौमाता के पेट में ना जाकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। अब शिवराज सरकार ने एमपी में गौमाता सेस या टैक्स लगाने का सोचा है। इसके पीछे उनका तर्क है कि गौ वंश के कल्याण के लिए कर लगाने के संभावित कदम के पीछे भारतीय संस्कृति में गौमाता को पहली रोटी (गौग्रास) खिलाना है। अब यह पहली रोटी गौमाता के पेट में जाएगी या भ्रष्टाचारियों के यह तो वक्त बताएगा लेकिन फिल्हाल जानते हैं योजना को विस्तार से-

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में अपने निवास पर ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश की नवगठित गौ कैबिनेट की बैठक की। आगर-मालवा जिले में सुसनेर के समीप सालरिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रविवार को चौहान ने गौ वंश के कल्याण के लिए कर लगाने के संभावित कदम के पीछे भारतीय संस्कृति में गौमाता को पहली रोटी (गौग्रास) खिलाने का तर्क भी दिया। भाजपा नेता चौहान ने उपस्थित लोगों से सवाल किया, ‘गौमाता के कल्याण के लिए और गौशालाओं के ढंग से संचालन के लिए कुछ मामूली कर लगाने के बारे में सोच रहा हूं। क्या यह ठीक है? लोगों ने इसका सकारात्मक उत्तर दिया।’ 

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उन्होंने कहा, ‘हमारे घरों में पहली रोटी गाय के लिए बनती थी। तथा आखरी रोटी कुत्ते को खिलाते थे। यह हमारी भारतीय संस्कृति थी। अब अधिकांश घरों में गौग्रास नहीं निकलता और हम अलग-अलग गौग्रास नहीं ले सकते। इसलिए हम गायों के कल्याण के लिए कुछ छोटा-मोटा कर लगाने की सोच रहे हैं।’ 

क्या होगा इस पैसे से?

  • प्रदेश में गौशाला संचालन के लिए एक कानून बनाया जाएगा और जिला कलेक्टरों को प्रत्येक गौशाला के संचालन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
  • प्रदेश में 2000 गौशालाएं बनाई जाएंगी तथा इन्हें सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से संचालित किया जाएगा।
  • गौ कैबिनेट की बैठक में गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए और आगर मालवा में स्थित गौ अभयारण्य में गौ उत्पादों के निर्माण के लिए एक अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का फैसला लिया गया।
  • मुख्यमंत्री ने अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए अंडे के बजाय दूध देने की वकालत की तथा समाज की भलाई के लिए गोबर और गौमूत्र के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्णय लेने की बात कही।
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