क्या एक बार फिर लॉकडाउन होगा उत्तर प्रदेश?

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कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई तरह कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है क्या ऐसे हालातों में एक बार फिर उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन लगा दिया जाएगा। या फिर कुछ ओर। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सरकार को लॉकडाउन का सुझाव देने की बात सुर्खियों में आते ही ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद दोबारा पूरे यूपी की सड़कों पर सन्नाटा पसर सकता है और लोग-बाग फिर से अपने घरों में कैद हो सकते हैं।

Harsh Shrivastava | Lucknow

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने बुधवार को जारी अपने एक बयान में कहा कि संभावित लॉकडाउन के बारे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरें पूरी तरह गलत और असत्य है। इसमें बिल्कुल भी सटीकता नहीं। सरकार की ओर से इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार लोगों के संवेदनशील है। लॉकडाउन कोरोना का हल नहीं है।

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कोरोना के मामले में प्रदेश की स्थित
बता दें कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ विभाग के द्वारा जारी किए गए कोविड-19 बुलेटिन में 26 अगस्त को 5,898 नए मामले सामने आए तो वहीं 27 अगस्त से आंकड़ों के अनुसार 5,463 लोगों की रिपोर्ट आई कोरोना पॉजिटिव है। लखनऊ 24,468 मामलों के साथ शीर्ष पर कायम है तो वहीं जनपद मथुरा भी अब तक 2,078 मामलों के साथ 33वें स्थान पर है। वहीं भारत की कोविड-19 की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यूपी इस वक्त देश में पांचवें स्थान पर है जहां 26 अगस्त को 2,03,028 (दो लाख तीन हजार 28) कुल मामले हो गए तो वहीं 27 अगस्त को 2,08,419 (02 लाख 08 हजार 419) हो चुके हैं।

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क्या कहा था इलाहाबाद हाई कोर्ट ने?
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक बयान में कहा था कि ब्रेड बटर से ज्यादा जान जरूरी है। हाई कोर्ट का मानना था कि अनलॉक में ना तो सरकारी अमला लोगों को बेवजह बाहर निकलने से रोक पाया और ना ही लोगों ने गाइडलाइन का पालन करने में अपनी दिलचस्पी दिखाई। सूबे में कोरोना के बढ़ते मामलों और इससे होने वाली मौतों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी चिंता और अपनी नाराजगी जताई थी और योगी सरकार को कंप्लीट लॉकडाउन लागू करने का सुझाव दिया था।

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हाई कोर्ट ने क्यों कहा था कि जान जरूरी है या ब्रेड बटर?
हाई कोर्ट ने अपनी तल्ख़ टिप्पणी में कहा था कि ब्रेड बटर के लिए घर से बाहर निकलने से ज़्यादा ज़रूरी जीवन बचाना है। लोगों को समझना होगा कि उन्हें इनमें से क्या चुनना है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए यूपी के चीफ सेक्रेट्री से पूछा था कि जिन ज़िम्मेदार लोगों ने इसका सख्ती से पालन नहीं कराया, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट के इस सख्त रुख से कई बड़े अफसरों पर गाज गिरना तय माना जाने लगा था।

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उत्तर प्रदेश के कई शहरों की स्थिति चिंताजनक
इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने सबसे ज़्यादा नाराज़गी यूपी के सात बड़े शहरों लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली व झांसी में संक्रमण के बढे हुए मामलों पर जताई थी। वहीं सरकार को अपने निर्देश देने के बाद पीठ ने इस मामले को 28 अगस्त तक अगली सुनवाई के लिए टाल दिया था।

पिछले दिनों मामले की सुनवाई के दौरान कई मौकों पर अदालत ने सरकार को राज्य में कोरोनावायरस के प्रसार की जांच करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। अब देखना दिलचस्प होगा कि यूपी की सड़कों पर एक बार फिर से सन्नाटा छाने वाला है या फिर गलि-गलियारों में लोगों की चहलकदमी देखने को मिलेगी?

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