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कोरोना वैक्सीन ट्रायल सफल होंगे इसकी उम्मीद कम होती जा रही है

corona vaccine race
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इस समय दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन को लेकर होड़ मची हुई है। कई देश वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण तक पहुंच चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी वैक्सीन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाई है। अब माना जा रहा है कि अगर कोई वैक्सीन 50 फीसदी भी सफल रहा तो बड़ी बात होगी। ट्रायल के बाद गंभीर लक्षण वाले मरीज़ों पर वैक्सीन का प्रभाव होगा भी या नहीं इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं ।

गंभीर मरीज़ों पर कोरोना वैक्सीन कारगर नहीं

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि अगर दिग्गज कंपनियों की वैक्सीन सिर्फ कोरोना के मामूली लक्षण वाले मरीजों को ही सुरक्षा कवच दे पाएंगी और मौत के मुंह में जा रहे गंभीर मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा तो अरबों डॉलर फूंकने का क्या फायदा। वैक्सीन का मतलब ही है कि गंभीर मरीजों को इलाज मुहैया कराया जाए। दरअसल, कंपनियों ने पिछले हफ्ते जारी अपने प्रोटोकॉल में कहा है कि अगर वैक्सीन कोरोना के मामूली लक्षण वाले मरीजों में खतरे को कम करने में सफल रहती है तो इसे कामयाबी माना जाएगा। यानी कि मध्यम या गंभीर स्तर के मरीजों, अस्पताल या आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए टीका तैयार करने की कवायद ही नहीं चल रही है। 

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कंपनियां सिर्फ मुनाफे के लिए वैक्सीन का ढोल पीट रही हैं?

मॉलीक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. एरिक ट्रिपोल का कहना है कि कोविड के सबसे ज्यादा मरीज भले ही मामूली लक्षण वाले हों, लेकिन इन पर कारगर टीका यह साबित नहीं करता कि मध्यम और गंभीर मरीजों में भी वायरस का खतरा नहीं रहेगा। टीका पूरी आबादी के लिए नहीं होगा। बूढ़े और गंभीर बीमारियों वाले मरीजों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। जब बिना टीके के ही मामूली लक्षण वाले और पहले किसी बीमारी से नहीं पीड़ित लोग ठीक हो रहे हैं तो क्या कंपनियां सिर्फ मुनाफे के लिए वैक्सीन का ढोल पीट रही हैं। बच्चों,  किशोरों और गर्भवती महिलाओं पर भी आगे ट्रायल होगा यह तय नहीं।  

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किस स्टेज में है कोरोना वैक्सीन ट्रायल

कोरोना वैक्सीन ट्रायल किस स्टेज में हैं

रूस की स्पूतनिक वी
पहले दो चरणों में 150 वालंटियर पर परीक्षण के बाद टीके पर मुहर। तीसरे चरण में 30-40 हजार वालंटियर पर परीक्षण या खुराक क्षमता का आकलन किए बिना टीकाकरण शुरू। तीसरा चरण पूरा हुए बिना ही वैक्सीन के उपयोग को मंजूरी दी गई। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।

चीन की सिनोवैक
सिनोवैक ने जुलाई में 743 प्रतिभागियों पर दूसरे चरण के परीक्षण सफल घोषित कर टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी हासिल की। तीसरे चरण के परीक्षण अभी शुरुआती स्तर में ही हैं।

एस्ट्राजेनेका
कुछ वालंटियर के टीका लेने के बाद हालत बिगड़ने पर तीसरे चरण के परीक्षण छह सितंबर को रोकने पड़े। ब्रिटेन और भारत को छोड़कर अमेरिका या अन्य देशों ने अभी तक तीसरे चरण के परीक्षण शुरू करने की मंजूरी नहीं दी।

कहीं मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ तो नहीं  

लोगों में वैक्सीन मिलने का भरोसा धीरे-धीरे घटता जा रहा है। कई लोग वैक्सीन का विरोध भी कर रहे हैं। अगर वैक्सीन केवल हल्के लक्षण वाले मरीज़ों को ठीक करने का दावा करती हैं तो फिर टीका लगवाने का क्या फायद क्योंकि हल्के लक्षण के मरीज़ तो वैसे भी जल्द स्वस्थ्य हो जाते हैं। वैक्सीन निर्माता क्यों चाहते हैं कि 50 प्रभाव पर ही वैक्सीन को उपयोग की मंज़ूरी मिल जाए यह बड़ा सवाल है। अगर वैक्सीन को जल्दबाज़ी में बाज़ार में उतारा गया तो इसका बुरा असर भी देखने को मिल सकता है। लेकिन वैक्सीन का निर्माण कर रही कंपनियां काफी पैसा इसमें फंसा चुकी हैं और वे हर हाल में अपना मुनाफा देखेंगी।

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