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क्या गोर्बाचोफ की तरह अपने देश को ‘बिखेर’ देंगे ट्रंप?

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Priyansu | Opinion

वायरसों से निपटने की सबसे ज्यादा तैयारी करने, सबसे ज्यादा पैसा लगाने और सबसे ज्यादा दूर की सोचने का दावा करने वाला दुनिया का सबसे ताकतवर देश कोरोना-काल में सबसे ज्यादा लाचार है। विशेषज्ञों, राजनयिकों, विश्लेषकों और खुद अमरीकियों के अनुसार, वैश्विक महामारी के बीच अमरीका खुद अपनी ग्लोबल लीडर वाली छवि तोड़ रहा है। यह एक तरह से विश्व मंच पर अपनी कुर्सी खाली करने जैसा है, ऐसी कुर्सी जिसे हासिल करने के लिए उसने क्या कुछ नहीं किया है। भले दूसरी तरह से, लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने देश के साथ वही कर रहे हैं जो तीन दशक पहले मिखाइल गोर्बाचोफ ने सोवियत रूस के साथ किया था। फर्क इतना है कि गोर्बाचोफ के लिए दुनिया का हित पहले था, जबकि ट्रंप के लिए अमरीका फर्स्ट। ट्रंप भी अपने देश को अलग-थलग कर बिखेर रहे हैं।

वैश्विक संकटों के दौरान अगुवा की भूमिका निभाने वाला अमरीका पहले ही कोरोना वायरस के टीकों पर समन्वय के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूरोपीय संघ की वर्चुअल बैठकों में हिस्सा लेने से मना कर चुका है। वह चीन को दंडित करने के लिए अपने सहयोगियों को एक पक्ष चुनने के लिए बाध्य कर रहा है, उग्र महामारी के बीच डब्लूएचओ की फंडिंग रोक चुका है, बाद में डब्लूएचओ से रिश्ते भी तोड़ लिए।

याद आ रहे बुश और ओबामा
पिछले माह उसने कोरोना से तबाह हो रही धरती पर सामूहिक सहायता के मकसद से लाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वैश्विक संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर वीटो कर दिया। ऐसे समय में जब कोविड-19 से 69 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं, राजनयिकों का कहना है कि दुनिया उस अमरीकी नेतृत्व के लिए तरस रही है जिसे उसने इबोला और एचआइवी/एड्स के समय बराक ओबामा और जॉर्ज बुश के कार्यकाल के दौरान देखा। हालांकि अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ने अन्य देशों की मदद के लिए जी-7 के साथ नियमित बैठकें की हैं, सिवाय वैक्सीन पर समन्वय के लिए अंतरराष्ट्रीय बैठकों को छोड़कर। इसी कारण विशेषज्ञों में असंतोष है।

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निर्णायक क्षण खोता देश
जहां अन्य अमरीकी राष्ट्रपतियों ने अतीत में दमदार भूमिका निभाई, एशिया से यूरोप तक के पर्यवेक्षकों ने राष्ट्रपति ट्रंप की कोरोना ब्रीफिंग पर अविश्वसनीयता और दुःख जाहिर करते हुए कहा है कि यह अमरीकी छवि के लिए बेहद खतरनाक है। एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा कि जब बर्लिन की दीवार गिराई गई, अमरीका ने निर्णायक प्रयास किए। यह दौर भी इतिहास के उन महत्त्वपूर्ण क्षणों में, जिसका अमरीका ने हमेशा नेतृत्व किया है।

खत्म होता सम्मान
ट्रंप प्रशासन का कोरोना वायरस के प्रति दृष्टिकोण न केवल महामारी के खिलाफ लड़ाई में बाधा है, उसने अनिश्चितता को भी बढ़ा दिया है, अमरीका के प्रति सम्मान खत्म हो गया है और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली अब प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही। ब्रिटिश थिंक टैंक चैथम हाउस में ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक रॉबर्ट येट्स कहते हैं कि इस वक्त अमरीका से एक अग्रणी भूमिका निभाने की उम्मीद थी लेकिन अफसोस दुनिया वैश्विक नेतृत्व की तलाश करनी पड़ रही है।