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बदजुबानीः जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने भारत को क्यों कहा ‘सड़ा हुआ सेब?’

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वॉशिंगटन. एक है वर्डोमीटर (Worldometer) और एक अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी (Johns Hopkins University) का डैशबोर्ड…तकरीबन दुनियाभर की मीडिया कोविड-19 मरीजों की वैश्विक संख्या इन्हीं दोनों से चेपती है। इसी जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने भारत समेत सात देशों को ‘सड़ा हुआ सेब’ कहा है। क्यों कहा, सड़े हुए सेब का मतलब क्या है और ऐसी बदजुबानी इन्हीं सात देशों के साथ किस लिए?

Priyanshu | New Delhi

बात नौ जून की है। अमेरिका में एक शख्स हैं स्टीव हैंक, विवाद इन्हीं के एक ट्वीट से शुरू हुआ। हैंक जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। प्रोफेसर हैंक ने लिखा, “ये सात देश कोरोना वायरस डेटा के ‘सड़े हुए सेब’ हैं। ये देश या तो कोरोना वायरस के आंकड़े बता नहीं रहे हैं या बहुत ही ज्‍यादा संदिग्‍ध आंकड़े दे रहे हैं।” हैंक ने यूनिवर्सिटी के आंकड़ों का एक ग्राफ भी संलग्न किया, जिसमें भारत समेत वेनेजुएला, मिस्र, सीरिया, यमन, तुर्की और चीन हैं। इनके नामों के आगे लिखा था, “गवर्नमेंट रिपोर्टिंग हाइली सस्पेक्ट डेटा।” नामों में सबसे ऊपर नाम था भारत का और सबसे अंत में चीन का नाम।

क्या चीन से ज्यादा अपने यहां छिपाए जा रहे मरीज?
सवाल का जवाब देने की कोशिश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने की। पलानीस्वामी ने कहा, “सरकार कोविड-19 से होने वाली मौतों या मरीजों की जानकारी देने में पारदर्शी रही है और (मीडिया के रहते हुए) कोई भी जानकारी छिपा नहीं सकता है। आंकड़े एकत्रित करने में मात्र ‘कुछ संभावित विसंगतियां’ हैं।” महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित सूबा है।

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सिर्फ दो ही देशों में लोकतंत्र
प्रोफेसर हैंक की लिस्ट में जिन सात देशों के नाम हैं, उनमें से सिर्फ दो ही में लोकतंत्र है। हैंक ने यह भी चेतावनी दी कि भारत बहुत कम कोरोना टेस्ट जांच कर रहा है और जल्‍द ही वहां पर इटली के जैसे हालात हो सकते हैं। वह पहले भी मोदी सरकार की ओर से कोरोना वायरस से निपटने के तरीकों की आलोचना कर चुके हैं। बात “सड़े हुए सेब” की, यह अंग्रेजी का मुहावरा है। इसका इस्तेमाल उस व्यक्ति या समूह के लिए किया जाता है जो पारदर्शी नहीं है और अपनी हरकतों से दूसरों के लिए समस्याएं पैदा करता है।

क्या लॉकडाउन ने बढ़ाई गरीबों की पीड़ा?
प्रोफेसर हैंक आज (13 जून) भारत से जुड़े ट्वीट के साथ दोबारा नजर आए। एक में लिखा, “मोदी के भारत में कोविड-19 मरीजों के साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव हो रहा है। शवों को कचरे में फेंक जा रहा है। अस्पताल ओवरफ्लो हो रहे हैं। और हो भी क्या सकता है, जब सरकारी अस्पतालों में प्रति 1000 लोगों पर सिर्फ 0.7 बेड हों।”

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अपने ट्वीट के साथ हैंक ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की खबर साझा की है, “Covid-19 patients treated worse than animals, bodies found in garbage: Supreme Court.” दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कोरोना मरीजों की संख्या के मामले में भारत में अब दुनिया में चौथे नंबर पर पहुंच चुका है। मानना है कि अकेले दिल्ली में जुलाई के अंत तक मामले 10 लाख से अधिक हो जाएंगे। मोदी (सरकार) के लॉकडाउन से क्या हासिल हुआ? इसने केवल सबसे गरीब भारतीयों की पीड़ा को बढ़ाया है।”