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देश में कोरोना का कहर: सरकार दूसरे देशों को टीके भेजना रखेगी जारी

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देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है, मामलों में बढ़ोतरी को लेकर एसबीआई की तरफ से रिपोर्ट जारी कर कहा गया है कि अप्रैल माह में देश में करोना एक बार फिर से अपने चरम पर होगा। अगर स्थिति नहीं संभली तो हालात पिछले साल जैसे हो जाएंगे। वैक्सीन आ जाने के बाद से लोगों में कोरोना को लेकर डर ज़रुर खत्म हुआ है, लेकिन जैसी टीकाकरण की रफ्तार है उसे देखकर लगता है कि सभी को टीका मिलने में अभी काफी वक्त लगेगा। तब तक लोगों को सावधानी बरतनी ही होगी। देश में बढ़ते मामलों को बावजूद सरकार ने दूसरे देशों को टीके भेजने पर रोक नहीं लगाई है।

क्यों है टीकाकरण की रफ्तार धीमी?

  • सरकार चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण कर रही है, जिसमें उम्र के हिसाब से अलग-अलग फेज़ बनाए गए हैं।
  • अभी तक 65 वर्ष की उम्र से अधिक और 45 साल से अधिक उम्र के लोग जिन्हें जानलेवा बीमारियां हैं का टीकाकरण चल रहा है।
  • पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाईन वर्कर्स का टीकाकरण किया गया था
  • अब तीसरे फेज़ की शुरुवात 1 अप्रैल से होगी जिसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोग टीका लगवा सकेंगे।
  • सरकार देश में टीकों की मांग को तो पूरा कर ही रही है साथ ही दूसरे देशों को टीका देने के लिए भी वह प्रतिबद्ध है।
  • भारत ने कोविड-19 टीके के निर्यात पर रोक नहीं लगाई है, अब घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कोरोना रोधी टीकों का निर्यात चरणबद्ध तरीके से होगा। यानि दूसरे देशों को टीका मिलने में विलंभ होगा। पहले देश में बढ़ रही मांग को पूरा किया जाएगा।
  • देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए राज्यों द्वारा टीकों की आपूर्ती की मांग की जा रही है।
  • जिन राज्यों में चुनाव हैं वे भी अधिक टीकों की मांग कर रहे हैं।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि अब टीकाकरण सभी के लिए लागू कर देना चाहिए, उम्र की सीमा हटा देनी चाहिए। यह काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए ।
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दूसरे देशों को देरी से मिलेगा टीका

संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय टीका निर्माता से नौ करोड़ खुराक की आपूर्ति मिलने में विलंब की घोषणा की है। यह मध्यम आय वाले देशों को बड़ा झटका है, इससे इन देशों में टीकाकरण प्रभावित हो सकता है। टीका उपलब्ध कराने में सक्रिय संगठन गावी ने गुरुवार को कहा कि भारत में कोरोना के मामलों में तेजी आने के कारण यह विलंब हो सकता है। इससे वहां सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पर घरेलू मांग का दबाव बढ़ेगा।

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