Home » Pratapgarh corona mata mandir : हटाया गया कोरोना माता का मंदिर, प्रशासन द्वारा जांच के आदेश

Pratapgarh corona mata mandir : हटाया गया कोरोना माता का मंदिर, प्रशासन द्वारा जांच के आदेश

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

कोरोना से लड़ने के लिए हर कोई अपने स्तर पर कोशिश कर रहा है। कुछ उससे लड़ने के लिए घर पर रुक रहे हैं तो कुछ उससे लड़ने के लिए दवाइयों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कोरोना से लड़ने के लिए कोरोना माता के मंदिर का निर्माण कर दिया गया है। लोगों का मानना है कि इसकी पूजा करने से कोरोना से निजात मिलेगी। साथ ही हमारे जीवन में दोबारा खुशहाली वापस लौटेगी।

प्रतापगढ़ जिले के संगीपुर थाना क्षेत्र के जूही शुकुलापुर गांव में बने एक कोरोना माता मंदिर को तोड़ दिया है। ‘कोरोना माता’ मंदिर निर्माण को लेकर भी जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह के मुताबिक, अंधविश्वासी गतिविधियों से बचाने के लिए पुलिस प्रशासन ने गांव से ‘कोरोना माता’ मंदिर को हटा दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस दल भी कोविड-19 के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, उनका दावा है कि यह एक घातक वायरस है और उन्हें इस तरह की अंधविश्वासी चीजों में खुद को शामिल नहीं करना चाहिए।

Bhopal Unlock New Guidelines: क्या है सरकार की नई गाइडलाइंस, क्या रहेगा खुला

चंदा इकट्ठा कर बनाया मंदिर

मंदिर वास्तव में चंदा इकट्ठा करने के बाद ग्रामीणों के एक समूह द्वारा बनाया गया था। ग्रामीणों ने कोरोना माता से प्रार्थना करना शुरू कर दिया कि ‘कोविड -19 की छाया कभी शुकुलापुर और आसपास के गांवों पर न पड़े।’इतना ही नहीं, उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना करते समय मास्क के इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोविड-19 प्रोटोकॉल के महत्व पर भी प्रकाश डाला। मूर्ति ने भी नकाब पहना था।

READ:  लव जिहाद: हिंदू अभिनेताओं से शादी करने वाली 8 मुस्लिम अभिनेत्रियां

मूर्ति को हाथ लगाने की नहीं है अनुमति

मंदिर के पुजारी राधे श्याम ने कहा, ‘हमने पहले ‘चेचक माता’ (चेचक माता) का नाम सुना है जिन्होंने बीमारी को ठीक किया था। इसी तरह, हमने इस विश्वास के साथ कोरोना माता मंदिर की स्थापना की थी कि माता सभी कठिनाइयों का समाधान करेगी। हमने ग्रामीणों से धन इक्ठ्ठा किया।’ उन्होंने कहा, हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब देश में इस तरह का मंदिर बना है। ‘जब प्लेग और चेचक जैसी अन्य घातक बीमारियां गांवों और कस्बों में फैल गईं और कई लोगों को मार डाला, तो लोग भी इसी तरह पूजा करते थे।’ ग्रामीणों ने दावा किया कि भक्तों को मूर्ति को छूने की अनुमति नहीं थी और उन्होंने देवी को केवल पीले फूल चढ़ाए।

पूजा अर्चना कर मांग रहे आशीर्वाद

ग्रामीणों ने दावा किया, ‘कोरोना वायरस महामारी और इसके घातक प्रभाव को देखने के बाद, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी छीन ली, हमने पूरे विश्वास के साथ एक ‘नीम’ के पेड़ के नीचे कोरोना माता मंदिर स्थापित करने का फैसला किया। देवता निश्चित रूप से लोगों को घातक बीमारी से राहत देंगे।’ छोटे सफेद पत्थर की मूर्ति को खुले मंदिर में दीवार पर स्थापित किया गया है। मूर्ति की स्थापना के साथ ही रोजाना पूजा का आयोजन किया जा रहा था और ग्रामीण लोगों को घातक बीमारी से बचाने के लिए आशीर्वाद मांग रहे थे।

READ:  Covid group to govt: Don't let daily count cross 50,000

इससे पहले भी बन चुका कोरोना मंदिर

आपको बता दे कि इससे पहले भी कर्नाटक में कोरिया माता के मंदिर की स्थापना की जा चुकी है। इस मंदिर की स्थापना प्लेग मरियम्मन मंदिर के बगल में हुई थी। लोगों का मानना था जिस तरीके से बरसों पहले प्लेग से लड़ने को मंदिर ने शक्ति दी थी ठीक उसी तरीके आज भी कोरोना माता का मंदिर समाज में फैली इस  गंदगी से लड़ने की भी शक्ति देगा।

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।