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राकेश सेन जुट गए हैं अपने गांव को कोरोना से बचाने में

CORONA IN VILLAGES
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देश के शहरी क्षेत्रों में कोरोना के प्रसार के बाद अब महामारी ने गांवों में पैर पसारना शुरु कर दिया है। इससे लड़ने के लिए कई जागरुक युवा और सामाजिक कार्यकर्ता जुट गए हैं। ऐसे ही राजस्थान के अजमेर जिले के छोटे से गांव पड़ॉगा के रहने वाले राकेश सेन भी अपने गांव में कोरोना महामारी को लेकर लोगों को जागरुक करने में जुट गए हैं।

राकेश सेन ने ग्राउंड रिपोर्ट को बताया कि पिछली लहर में उन्होंने जवाहर फांउंडेशन के साथ मिलकर 4 हज़ार मास्क वितरित किये थे। यह मास्क उन्होंने पुलिसकर्मी, हॉस्पिटल, स्कूल स्टाफ, पशु चिकित्सा स्टाफ, विद्युत विभाग, आदि विभागों में वितरित किये थे। इस बार दूसरी लहर में उनका लक्ष्य 5 से 6 हज़ार मास्क वितरण करने का है और वे इस काम में जुट गए हैं।

मास्क वितरित करते हुए जवाहर फाउंडेशनक के कार्यकर्ता

देश के कई ऐसे गांव हैं जहां कोरोना महामारी का प्रसार होना शुरु हो गया है। कई गांवों में बीमारी को लेकर जानकारी का अभाव है तो कहीं सिस्टम को लेकर गुस्सा। जागरुकता कम होने की वजह से गांव के नागरिक वैक्सीन लगवाने से भी डर रहे हैं। टेस्ट को लेकर उनकी सोच है कि अगर वे जांच करवाएंगे तो उन्हें जबरन भर्ती कर दिया जाएगा। हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में इस समस्या की तह तक जाने की कोशिश की है।

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राकेश सेन जैसे लोग ही गांवों में फैलते कोरोना को रोक सकते हैं

हमने दिल्ली के आसपास के गांवों में फैलते कोरोना को लेकर कई रिपोर्ट पढ़ी हैं जिसमें बताया गया है कि कैसे कई युवाओं ने संगठन बनाकर अपने गांव को कोरोना से बचाने का जिम्मा उठाया हुआ है। दिल्ली के नांगल ठाकरान गांव में युवाओं ने गंभीर मरीज़ों के इलाज के लिए ऑक्सीज़न की व्यवस्था से लेकर मरीज़ों को ज़रुरी चिकित्सीय मदद पहुंचाने का जिम्मा उठाया जिससे कई लोगों की जान बचाने में मदद मिली। इसी तरह अगर सभी गांव के युवा अपने-अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी उठाएं तो सामूहिक प्रयास से इस महामारी को हराया जा सकता है।

राकेश सेन भी अपने गांव में सामाजिक कार्य कर रहे हैं। वो न सिर्फ मास्क वितरित कर रहे हैं बल्कि लोगों को महामारी से कैसे बचें इसके लिए जागरुक भी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कई जगह नो मास्क- नो एंट्री के बोर्ड लगावाएं हैं साथ ही गांव की हवा को स्वच्छ रखने के लिए पौधारोपण का कार्य भी शुरु किया है। इस काम में वो जवाहर फाउंडेशन के साथ तन्मयता के साथ जुड़े हैं जो इन सभी कार्य के लिए प्रतिबद्ध है।

कौन हैं राकेश सेन?

राकेश सेन राजस्थान के छोटे से गांव पड़ॉगा गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार में 5 सदस्य हैं। छोटी उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया छिन गया। मां ने काम कर उन्हें पढ़ाया लिखाया। 12 तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें घर की ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ी, जिसके चलते कॉलेज की पढ़ाई का सपना बीच में ही छूट गया। लेकिन काम के साथ ही उन्होंने प्राईवेट फॉर्म भर कर पढ़ाई जारी रखी। इसी बीच उनका मन समाज सेवा में लग गया और जल्द ही उन्होंने जवाहर फाउंडेशन ज्वाईन कर लिया। जवाहर फाउंडेशन की मदद से ही राकेश सेन अपने गांव में सामज सेवा के कार्य जी जान से कर रहे हैं।

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