Corona इलाज में कनपुरियों ने बहाया पैसा; 50 दिन में निकाले 20000 करोड़ रूपए

Corona के इलाज में कनपुरियों ने बहाए 20000 करोड़, हर दिन निकाले 400 करोड़ रुपये

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Ground Report | News Desk | Corona in Kanpur कोरोना की दूसरी लहर ने जहाँ विश्व भर में अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है, तो वही उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में भी नया कीर्तिमान बना है। पिछले 50 दिनों में, कनपुरियों (Kanpuriyon) ने सभी सरकारी और निजी बैंकों से 20 हज़ार करोड़ रूपए निकाले है। यानी की औसतन 400 करोड़ रोज़ाना, इसमें से अधिकतम राशि बचत खातों में से निकाली गयी है।

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आम तौर पर रोज़ की निकासी 250 करोड़ रहती है पर लॉकडाउन के कारण जब बाज़ार और उद्योग बंद है, तो ये अंदाजा लगाया जा रहा है की ये धनराशि कोरोना के इलाज में दवाई व अस्पतालों में खर्चा की गयी है। जानकारी के लिए बता दें, सभी बैंको को मिलाकर कानपुर में लगभग 700 शाखाएं हैं। आम तौर पर एक साल में अलग-अलग बैंकों में 60 हज़ार करोड़ रूपए जमा होते है पर कोरोना की वजह से महज़ 50 दिन में ही इसकी एक तिहाई रकम निकाली जा चुकी है। विशेषज्ञों की माने तो लोग कोरोना की तीसरी लहर से डरे हुए है, लॉकडाउन के कारण व्यापारी भी बचत खाते से पैसे निकाल कर गुज़ारा कर रहे है।

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लोगों ने लाखों रूपए किये खर्च | People spent lakhs for corona treatment in kanpur
कानपुर छावनी स्थित एक उद्यमी के घर के सभी लोग कोरोना संक्रमित हो गए थे, दो लोगों की मृत्यु भी हो गयी। सबके अलग अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, सभी लोग स्वस्थ होकर घर आ गए। पर अस्पताल में इलाज का कुल खर्चा 80 लाख रूपया आया। एक और परिवार में घर के बड़े बेटे को कोरोना हुआ, वेंटीलेटर पर भी रहना पड़ा, इलाज पूरा करने के लिए 7 लाख की एफ.डी. तक तुड़वानी पड़ी, कुल खर्चा लगभग 18 लाख रुपया आया। ऐसे कई केस पूरे शहर भर में है जहाँ लोगों ने अपनी गाड़ी, ज़्यादा मूल्य वाली वस्तुएं आदि भी बेच दी ताकि इलाज की रकम भरी जा सके।

वित्तीय वर्ष 2020 – 21 में  61,159,3882 रूपए जमा किये थे, पीपीएफ, एफडी, आरडी आदि शामिल हैं। रोज़ाना लगभग 500 से 550 करोड़ रूपए जमा होते थे पर जबसे दूसरी लहर आयी है यानी एक लगभग अप्रैल से 20 मई तक केवल 250 करोड़ रूपए जमा किये और रोज़ाना 400 करोड़ रूपए निकले। जबकि आम दिनों में ये आकड़ा 250 करोड़ रहता था। कोरोना ने समाज के हर वर्ग पर असर किया है, मिडिल क्लास और निम्न वर्ग को तो इलाज के लिए अपनी सारी जमा पूँजी लगानी पड़ी।

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