झाँसी में कोरोना खतरनाक स्तर पर, जिला जेल में 210 कैदी संक्रमित

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झाँसी में कोरोना की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हाल के दिनों में रिकार्ड रूप से संक्रमण के मामले देखने को मिले हैं। झाँसी वर्तामान समय में उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी की रैंकिंग में चौथे नंबर पर पहुँच गया है। सक्रिय मामलों की संख्या में झाँसी नें कोरोना से सबसे ज्यादा संक्रमित रहे गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे जिलों को पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं जिला जेल में कोरोना की चपेट में आ गई है। यहां बीते दो दिनों में 210 कैदी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

मोहित सिंह कुशवाहा | झाँसी

अब लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी जैसे 40 लाख से अधिक जनसंख्या की आबादी वाले जिलों के बाद झाँसी चौथे स्थान पर आ गया है। जबकी झाँसी की कुल जनसंख्या सिर्फ 22 लाख के करीब है। एक हफ्ते में यहाँ 800 के करीब मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिला है। लॉकडाउन में 30 जून तक महानगर में कोरोना के संक्रमण के कुल मामले 200 थे। शनिवार को मिले आंकड़ों के अनुसार आज कुल मामलों की संख्या 1810 पहुँच गई है।

सबसे गंभीर बात यह रही है कि झाँसी जिला कारागार अब इस महामारी की चपेट में आ चुका है। पिछले तीन दिनों में झाँसी जिला कारागार में 210 से भी अधिक कैदी संक्रमित पाये गये हैं। यूपी की अन्य जिलों की तरह झांसी जिला कारागार में भी क्षमता से दोगुने कैदी बंद हैं। यहाँ पर कुल 600 कैदियों को रखने की व्यवस्था है जबकी वर्तमान में 1200 से भी अधिक कैदी यहाँ बंद हैं। कोरोना की महामारी में प्रशासन लगातार सोशल डिस्टेंसिंग की बात कह रहे हैं। लेकिन प्रशासन की नाक के नीचे अचानक से दो दिनों में सीधे 210 कैदी कोरोना की चपेट में आ जाते हैं। यह स्थिति जिला प्रशासन की नाकामी को प्रदर्शित करता है।

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प्रशासन पर उठते कई गंभीर सवाल
आखिर सवाह यह उठता है कि कैदियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी है? जिला कारागार में संक्रमण कैसे पहुँचा है? और इतनी ज्यादा संख्या में कोरोना फैलने का क्या कारण रहा है? प्रशासन ने कोरोना काल में जेल जैसी स्थानों पर सोशल डिस्टैंसिंग के लिए क्या कदम उठाय थे? जब देश के कई हिस्सों में कैदियों को छोड़ा गया है तो इस दौरान झाँसी जिला प्रशासन ने क्या योजना बनाई है? कोरोना से संक्रमित मरीजों को किस तरीके से क्वारंटाईन किया जाएगा?

दरसल जिले में कोरोना से होने वाली मौतों की दर काफी अधिक है। अब तक कुल 56 लोगों की कोरोना वॉयरस के कारण मौत हो चुकी है। बीते शुक्रवार को यहाँ 167 नये मरीज मिले जिनमें से 120 जिला कारागार से थे। गुरूवार को भी 134 लोग कोरोना से संक्रमित पाये गये थे। कोरोना की जाँच के में रोज 10 से 15 प्रतिशत तक मरीज देखने को मिल रहे हैं।

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आखिर कारण क्या है इतना ज्यादा संक्रमण का?
लगातार विशेषज्ञों की ओर से कहा जा रहा है कि इस बीमारी से बचने के लिए अधिक से अधिक संख्या में कोरोना की जाँच करना जरूरी है। लेकिन इस मामले में झाँसी जिला प्रशासन फिसड्डी बना हुआ है। यहाँ पर कोरोना सैंपलों की जाँच 600 से 800 के बीच है। इस आंकड़े के आगे बढ़ ही नहीं पा रही है। इतने दिन बीत जाने के बाद गुरूवार को रिकार्ड रूप से 1096 जांचे की गईं। लोकिन इसके अगले ही दिन 24 जुलाई को सिर्फ 380 सैंपलों की जाँच की गई। इन 380 में से 167 लोग संक्रमित पाये गये। आज शनिवार को भी कोरोना जाँच का आंकड़ा बड़ कर 551 तक ही पहुँच सका है। इन आंकड़ों के बाद दिखता है कि प्रशासन न तो जाँचों आंकड़ा बढ़ा पा रहा है और न ही कोरोना को फैलने से रोकनें में सफल हो रहा है।

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कोरोना के इतने ज्यादा संख्या में फैलने का एक कारण यह भी है कि कोरोना की जाँच की रिपोर्ट मिलनें में कई दिन लग रहे हैं। कोरोना सैंपल लेने के बाद इसकी जाँच की रिपोर्ट 2 से 5 दिनों में दी जा रही है। इस महीने में कई मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक जिले का दौरा कर के जा चुके हैं। कई स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई परिणाम होते नहीं दिख रहे हैं। अब देखना ये होगा कि ये वायरस कितना गंभीर संकट देकर जाता है।

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