कोरोना से लड़ने में सरकारी मशीनरी हुई बेदम, कोरोना विस्फोट की ओर कानपुर

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Amitesh Agnihotri | Ground Report | UP

कानपुर कोरोना विस्फोट की तरफ बढ़ रहा है और सरकारी मशीनरी कोरोना वायरस के फैलाव का मुकाबला करने में फेल होती नजर आ रही है। लॉकडाउन खुलने के बाद से शहर में लगातार बढ़ रही संक्रमितों की संख्या आने वाले दिनों के और ज्यादा भयावह होने के संकेत देने शुरू कर दिये हैं।

यह मानने के अच्छे भले कारण है कि शहर में संक्रमण की शुरुआत से ही प्रशासन के पास वायरस से निपटने की कारगर नीति नही रही। कानपुर में कोरोना का पहला मरीज 24 मार्च को मिला और तबसे लेकर अभी तक कुल मरीजो की संख्या 554 हो चुकी है जिसमे से एक्टिव केसों की संख्या 198 है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों पर गौर करे तो कोरोना वायरस से निपटने का इकलौता कारगर तरीका ज्यादा से ज्यादा लोगो की टेस्टिंग कर संक्रमितों की पहचान कर उनका इलाज करना है। लेकिन पिछले ढाई महीने के दौरान कानपुर में सरकारी मशीनरी की दिशा डब्ल्यूएचओ के निर्देशों से अलग ही हटती नज़र आयी।

शहर की नौकरशाही किस कदर भटकी हुई है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश बंदी के 68 दिनों में भी शहर में कुल आबादी के मुकाबले टेस्टिंग की संख्या बहुत कम रही।

एक 25 हज़ार की आबादी वाले क्षेत्र में 500 टेस्ट भी नहीं हो सके

शुरुआती दौर में कोरोना संदिग्धों के सैम्पल लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज में भेजे जाते थे। बाद में अप्रैल में कानपुर के मेडिकल कालेज में कोविड 19 टेस्टिंग लैब बन गयी उसके बावजूद टेस्ट करने की गति धीमी ही रही। सरकारी मशीनरी की लाचारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के हॉटस्पॉट इलाको में भी कुल आबादी के अनुपात में टेस्टिंग की संख्या बेहद कम है।

उदाहरण के तौर पर शहर के सबसे घने बसे इलाको में आने वाले कर्नलगंज क्षेत्र के वार्ड 110 की आबादी तकरीबन 25 हजार है और यह इलाका शहर का हॉटस्पॉट रहा। यहां लगातार मरीजो के मिलने के बावजूद कुल आबादी के अनुपात में 500 टेस्ट भी नही हुए। इसलिए यह नही कहा जा सकता कि ये हॉट स्पॉट पूरी तरह कोरोना मुक्त हो चुका है। ध्यान देने वाली बात यह है कि कोरोना वायरस से संक्रमितो के ऐसे मामले भी सामने आ रहे है जहां मरीज में संक्रमण के कोई लक्षण दिखाई नही देते। ऐसे मरीज वायरस के साइलेंट कैरियर होते है।

बड़े पैमाने पर टेस्टिंग में फिसड्डी होने का नतीजा यह है कि शहर में कम्युनिटी संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। यह स्थिति तब है जब सरकार शॉपिंग मॉल, कोर्ट-कचहरी और धार्मिक स्थल यानी लगभग सभी कुछ खोलने जा रही है।फिलहाल शहर में हर रोज तकरीबन 400 कोविड-19 के टेस्ट करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि पिछले तीन दिनों में हर रोज लगभग 250 टेस्ट ही रोजाना हुए है।

कानपुर की कुल आबादी 2011 की जनगणना के हिसाब से लगभग 29 लाख है।

अगर हर रोज 400 लोगो का टेस्ट किया जाये तो पूरे शहर का टेस्ट करने में लगभग 7250 दिन यानी 19 साल से भी ज्यादा का समय लगेगा। जिस रफ्तार से संक्रमितों की संख्या सामने आ रही है उस हिसाब से शहर में कोरोना संक्रमितों की वास्तविक संख्या का सही अंदाजा लगाना बड़ा मुश्किल है। अकेले बर्रा का शिवनगर इलाका ही कानपुर में कोरोना से निपटने के तरीकों की पोल-पट्टी खोलने के लिये काफी है।

यहां बीते गुरुवार से लेकर रविवार तक एक ही गली में कोविड-19 के साठ मरीज मिल चुके थे। यह सारे मरीज शिवनगर की विद्युत कालोनी की एक 15 फीट चौड़ी और लगभग 200 मीटर लम्बी गली से निकले हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनमें संक्रमण का कोई भी लक्षण नहीं था। सारा सिलसिला स्थानीय पार्षद के बीमार पड़ने के बाद से शुरू हुआ। खबर लिखे जाने तक हॉटस्पॉट में तब्दील हो चुके शिवनगर में अभी तक कितने लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है इसका कोई रिकॉर्ड नही मिल सका है।

संक्रमण के फैलने की स्थिति में प्रशासन की तैयारी भगवान भरोसे है।

डीएम कानपुर नगर के फेसबुक पेज पर 8 मई 2020 को डाली गई विज्ञप्ति में दी गयी सूचना के मुताबिक शहर के राजकीय अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजो के लिये 610 और प्राइवेट अस्पतालों में 490 बेड यानी कुल 1100 बेड आरक्षित रखे गये थे। इसके अलावा शहर में कुल वेंटिलेटरो की संख्या 107 बतायी गयी है। कुल क्वारन्टीन हेतु बेडो की संख्या 2564 है।

वैसे डीएम कानपुर नगर का फेसबुक पेज 20 मई 2020 के बाद से अपडेट नही किया गया है। संक्रमण का फैलाव कम्युनिटी स्टेज पर होना शुरू होता है तो स्थिति से निपटने की तैयारियो पर कुछ कहना बेहद मुश्किल है।

ये लेख कानपुर से अमितेश अग्निहोत्री ने लिखा है अमितेश एक स्वतंत्र पत्रकार हैं ।

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