जलवायु परिवर्तन और जनस्वास्थ्य

“पेरिस समझौते के लक्ष्य मानवता के सबसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य लक्ष्य भी हैं”

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भले ही COP26 UN जलवायु वार्ता में फ़िलहाल साल भर का समय हो, लेकिन दुनिया भर के डॉक्टरों और तमाम स्वास्थ्यकर्मियों को अभी से ही एकजुट हो जाना चाहिए उस वार्ता को सार्थक बनाने के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पेरिस समझौते के लक्ष्यों का पूरा होना सीधे तौर पर पूरी मानवता के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकता है।

इस विचार को विस्तार से द जर्नल ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड हेल्थ में एक लेख में उल्लेखित किया गया है। लेख में स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों से पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने में उनकी भूमिका निभाने के लिए आग्रह किया गया है। लेख के अनुसार नवंबर 2021 में होने वाले COP 26 के परिणाम को प्रभावित करने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों और उनके संगठनों को अभी से एकजुट होना होगा।

हेल्थ प्रोफेशनल्स, द पेरिस अग्रीमेंट, एंड द फीयर्स अर्जेंसी ऑफ़ नाउ  शीर्षक के इस लेख को पेरिस समझौते की पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ एलायंस (GCHA) के निदेशक मंडल के सदस्यों द्वारा लिखा गया है। इस लेख के अनुसार, “स्वास्थ्य पेशेवरों को पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम कर रहे विज्ञान-आधारित अधिवक्ताओं के बढ़ते वैश्विक समुदाय में शामिल होना चाहिए। सभी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा और सुधार के लिए हमारी प्रतिबद्धता को पूरा करने से अभिनेताओं के विविध और व्यापक गठबंधन की आवश्यकता होती है। हमें विश्व की ऊर्जा, परिवहन, कृषि और अन्य भूमि उपयोग प्रणालियों को बदलने के लिए समर्थन और निर्माण करना चाहिए, जो मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पर्याप्त है और जलवायु प्रणाली की मरम्मत करता है जिस पर यह निर्भर करता है। स्वास्थ्य पेशेवरों के रूप में, हमें इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक और राजनीतिक निर्माण करने में मदद करनी चाहिए, जिस तरह हम नशे की लत को समाप्त करने और वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारी को रोकने के लिए काम करते हैं।”

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GCHA बोर्ड के सदस्य और जलवायु और चिकित्सा पर मेडिकल कंसोर्टियम का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवर्ड मेबाच, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा मानना है कि पेरिस समझौते के लक्ष्य मानवता के सबसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य के लक्ष्य भी हैं।”  वो आगे कहते हैं, “फ़िलहाल एक-एक दिन की देरी भारी पड़ रही है और तमाम बाधाओं का भी सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन यह अवसर है हम स्वास्थ्य पेशेवरों के के लिए एकजुट होने का।”

आगे, GCHA के कार्यकारी निदेशक जेनी मिलर कहते हैं, “COP26 के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ आने की संभावना है, जो दुनिया भर में वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मानव स्वास्थ्य, समृद्धि, इक्विटी और न्याय के भाग्य को निर्धारित कर सकता है। और इसमें स्वास्थ्य पेशेवरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।” इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन  में सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों के लिए लिआसन अधिकारी, ओमानिया एल ओमरानी ने कहा, “दुनिया भर में, हजारों अस्पताल और स्वास्थ्य प्रणाली पहले से ही जलवायु पर काम कर रहे हैं और स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक वैश्विक आंदोलन का गठन, लचीलापन और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच – और यह राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है”।

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द क्लाइमेट एंड हेल्थ एलायंस में एसोसिएट प्रोफेसर यिंग झांग, कहते हैं “तूफ़ान और बाढ़ जैसी चरम मौसम घटनाएँ सीधे तौर पर लोगों पर असर करते हैं और हम वैसे ही वायु प्रदूषण, वेक्टर जनित बीमारियों, दूषित भोजन और पानी से बिगड़ते हुए स्वास्थ्य को देख रहे हैं। जो लोग हाशिए पर हैं और बेरोजगार हैं, उन्हें आमतौर पर सबसे ज्यादा नुकसान होता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सभी पर पड़ेगा।”

Contributor: Nishant, a Lucknow-based journalist and environment enthusiast working towards prioritization of issues like climate change and environment in Hindi and vernacular media.

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