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ICU में अर्थव्यवस्था, कई नामी कंपनियों की डूब रही है नैय्या

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

घाटा घाटा और सिर्फ घाटा सरकारी हो या प्राइवेट कंपनियां हर कोई इस समय घाटे में है। बैंक, इंडस्ट्री, टेलीकॉम, एयरवेज, पेट्रोलियम, एफएमसीजी, रिटेल, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, मीडिया कोई भी सेक्टर उठा कर देख लिया जाए तो पिछली तिमाही में कई नामी कंपनियों ने घाटा दर्ज किया है। भारत की जीडीपी की रेटिंग में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। मूडीज हो या SBI जीडीपी के आंकड़ों में गिरावट की भविष्यवाणी कर रही हैं। हमने यहां सेक्टर वार हो रहे कंपनियों के घाटों के आंकड़े जुटाए हैं जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि बाज़ार का रूख भारत की महत्वकांक्षाओं के विपरीत है।

पहले देश के बैंकिंग सेक्टर पर नज़र डालते हैं। यहां प्राईवेट और सरकारी सेक्टर के कई बैंक घाटे में चल रहे हैं। बढ़ रहा एनपीए और घट रही कर्ज़ की मांग इसके लिए ज़िम्मेदार बताई जा रही है। सरकार ने बैंकों के वित्तीय बोझ को कम करने और उनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए कई ऐलान किये इसमें कई बड़े सरकारी बैंकों का विलय शामिल है।

बैंकिंग सेक्टर

एक्सिस बैंक को हुआ 112 करोड़ का घाटा

निजी क्षेत्र के बैंक एक्सिस बैंक को वित्‍त वर्ष 2019-20 के दूसरी तिमाही में 112.08 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जबकि वित्‍त वर्ष 2018-19 के इसी तिमाही में बैंक को 789.61 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

पीएनबी बैंक को हुआ 4750 करोड़ का घाटा

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को नीरव मोदी के घोटाले के बाद पहली बार अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 246.51 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। लेकिन, बैंक फिर से घाटे में आ गया है। जनवरी-मार्च में बैंक को 4,750 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि, यह पिछले साल की मार्च तिमाही के 13,417 करोड़ रुपए के घाटे के मुकाबले 65% कम है। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के घोटाले की वजह से बैंक को पिछले साल इतना बड़ा नुकसान हुआ था।

यूनियन बैंक को हुआ 1190 करोड़ का घाटा

सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 1,194 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। फंसे कर्ज के लिए नुकसान अधिक प्रावधान करने से घाटे में यह वृद्धि हुई है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में बैंक को 139 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

यस बैंक को हुआ 600 करोड़ का घाटा

निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शुमार यस बैंक को दूसरी तिमाही में 600 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। बैंक के नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) में भी 7.39 फीसदी का नुकसान हुआ है।

बैंक को डीटीए का अडजस्टमेंट करने के लिए 709 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा, जिसकी वजह से उसे यह घाटा हुआ है। पिछले साल की दूसरी तिमाही में बैंक को 964.70 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इससे पहले इसी साल मार्च की तिमाही में बैंक को 1506.60 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बैंक के शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद अब तक का दूसरा सबसे बड़ा घाटा हुआ है।

सरकारी उपक्रम

भारतीय डाक को हुआ 15000 करोड़ का घाटा

भारतीय डाक को 15,000 करोड़ रुपये का घाटा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019 में कंपनी के राजस्व और ख़र्च के बीच का अंतर 15,000 करोड़ रुपये का है।

कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020 में वेतन/भत्तों पर ख़र्च 17,451 करोड़ रुपये और पेंशन पर ख़र्च 10,271 करोड़ रुपये रहेगा। वहीं, इस दौरान आय सिर्फ 19,203 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि स्थिति और खराब हो होगी।

बीएचईल को हुआ 2019 करोड़ घाटा

भेल को जून तिमाही में हुआ 219 करोड़ रुपये का घाटा। सरकारी कंपनी भेल को इस साल जून तिमाही में 218.93 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 39.98 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

एसएआईएल को हुआ 286 करोड़ का घाटा

सरकारी स्टील कंपनी सेल (SAIL) ने 2019 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 285.92 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

वहीं पिछले साल की समान अवधि में सेल को 609.76 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

एयरलाईन कंपनियां

इंडिगो को हुआ 1062 करोड़ का घाटा

बात करते हैं सबसे पहले हवाई क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी इंडिगो की, जिसको दूसरी तिमाही में घाटा हुआ है। इंडिगो एयरलाइन का परिचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन को 1062 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 651.5 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी की आय 31 फीसदी बढ़कर 8,105.2 करोड़ रुपये रही है जो पिछले साल की इसी तिमाही में 6,185.3 करोड़ रुपये रही थी।

स्पाइस जेट को हुआ 463 करोड़ का घाटा

सस्ती हवाई सेवा उपलब्ध कराने वाली घरेलू विमानन कंपनी स्पाइसजेट को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 463 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कंपनी ने बताया कि बोइंग 737 मैक्स विमानों के खड़े होने, खर्च में इजाफे और अकाउंटिंग नियमों में बदलाव का सबसे ज्यादा असर हुआ है। एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी को 389.4 करोड़ का घाटा हुआ था।

एयर इंडिया को हुआ 4600 करोड़ का घाटा

एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में लगभग 4,600 करोड़ रुपये का घाटा परिचालन से हुआ है, इसका मुख्य कारण तेल के दाम में तेजी और विदेशी विनिमय दर में बदलाव से नुकसान है।

टेलीकॉम कंपनियां

सरकार द्वारा वसूले जाने वाले एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की वजह से भारत की कई टेलीकॉम कंपनियां बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का सबसे ज्यादा 50,921 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है। इसी तरह एयरटेल को भी 23,045 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है। हालांकि वशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इन कंपनियों को मुकेश अंबानी की जियो से मिल रही टक्कर भी घाटे की वजह है लेकिन यहां यह सवाल ज़रुरी है कि आखिर टेलीकॉम सेक्टर पर ऐकाधिकार कैसे स्थापित हुआ। किसी सेक्टर में एकाधिकार, अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से ठीक नहीं होता। एक समय पर भारत में कई टेलीकॉम कंपनियां हुआ करती थीं अब केवल गिनी चुनी ही कंपनियां बची हैं। कई छोटी कंपनियों का बड़ी कंपनियों में विलय हो गया या फिर वे खत्म हो गईं। कंपनियों के बंद हो जाने से रोज़गार पर भी असर होता है। जिस सेक्टर में ज़्यादा कंपनियां होंगी वहां रोज़गार के अवसर भी अधिक होंगे। एकाधिकार स्थापित हो जाने से कंपनियां मनमानी पर उतर सकती हैं जो कि उपभोक्ता के लिहाज़ से ठीक नहीं होता। टेलीकॉम संकट इतना बड़ा है कि अगर इसमें जल्द कदम नहीं उठाए गए तो वोडाफोन जैसी कंपनी बंद भी हो सकती है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल का हाल तो देश जानता ही है। सरकार ने बीएसएनएल के कर्मचारियों को वीआरएस पैकेज ऑफर किया है ताकि कंपनी के खर्चों में कटौती कर उसे पटरी पर लाया जा सके।

ऑटोमोबाईल सेक्टर

दिवाली से पहले ऑटोमोबाईल सेक्टर मंदी की मार झेल रहा था। दिवाली पर भी इसमें खास उत्साह नहीं दिखा। हालांकि मारुती की बिक्री में सुधार हुआ। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की बड़ी ऑटोमोबाईल कंपनी टाटा मोटर्स को 23045 करोड़ का घाटा हुआ।

हालंकि सरकार अभी भी कह रही है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी इसके लिए ज़रुरी कदम उठाए जा रहे हैं। वित्त आयोग के चेयरमैन ने कहा कि ‘‘मैं नहीं समझता कि मौजूदा आर्थिक नरमी ऐसी कोई चीज है जिसका सामना देश लंबे समय से कर रहा हो। मैं अभी आशान्वित हूं कि मौजूदा आर्थिक नरमी की बात किसी छोटी घटना की कहनी की तरह है ना कि ढांचागत। ’’

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