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गुलों में फिर रंग भरा है अली सेठी नें, ज़रूर सुनिए

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

पाकिस्तान के कोक स्टूडियो के नए सीज़न का हर संगीत प्रेमी इंतज़ार करता है। भारत और पाकिस्तान के लोगों को कोक स्टूडियो के गाने एक रंग कर देते हैं। कोक स्टूडियो के चैनल पर कमेंट बॉक्स में जाकर आप लोगों के कमैंट्स पढ़कर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत और पाकिस्तान को कैसे संगीत एक कर देता है, फिर राजनीतिक माहौल में कितनी ही कड़वाहट क्यों न हो। शायद यह सही है कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती। तो कोक स्टूडियो का सीज़न 12 आ चुका है और यह खूब तारीफें भी बटोर रहा है। इस बार जो गाना सबसे चर्चा में है वो है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़ल ” गुलों में रंग भरे”, जिसे कोक स्टूडियो में पाकिस्तानी गायक अली सेठी ने स्वर दिया है।

वैसे तो इस गीत को कई लोग स्वर दे चुके हैं जैसे सबसे पहले मेहंदी हसन ने इसे आवाज़ दी थी फिर विशाल भारद्वाज की फ़िल्म हैदर में अरिजीत सिंह की आवाज़ में भी हम इस गीत को सुन चुके हैं। अली सेठी ने इस गीत को कोक स्टूडियो में गाकर इसे फिर से नया रंग दिया है जिसे काफी पसंद किया जा रहा है।

जानिए फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एक विख्यात शायर थे जिनको अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में इंक़लाबी और रूमानी के मेल की वजह से जाना जाता है। सेना, जेल तथा निर्वासन में जीवन व्यतीत करने वाले फ़ैज़ ने कई नज़्म, ग़ज़ल लिखी तथा उर्दू शायरी में आधुनिक दौर की रचनाओं को सबल किया। उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया गया था। जेल के दौरान लिखी गई उनकी कविता ‘ज़िन्दान-नामा’ को बहुत पसंद किया गया था। उनके द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियाँ अब भारत पाकिस्तान की आम-भाषा का हिस्सा बन चुकी हैं, जैसे कि ‘और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा’।

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