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PM मोदी को अब सिक्काबंदी का निर्णय ले लेना चाहिए!

Coins Problem in Itarsi RBI bank PM Modi sikkabandi
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सौरभ दुबे | भोपाल/इटारसी

नोटबंदी का निर्णय सही था या नहीं इस पर सबकी अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन सरकार को जल्द से जल्द सिक्काबंदी का निर्णय ले लेना चाहिए जो व्यापारियों और आम जनता के हित में तो होगा ही साथ ही इससे अर्थव्यवस्था को बल भी मिलेगा और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा भी मिलेगा।

आम तौर पर ये बात सामने आती है कि जब भी सिक्कों के नहीं चलने की अफवाह फैलती है तो व्यापारियों पर सिक्के नहीं लेने पर FIR दर्ज कराने की बात की जाती है, लेकिन बैंकों की ज़िम्मेदारी पर कोई बात नहीं होती। जबकि RBI की गाइडलाइन के अनुसार बैंकों को एक बार में 1 हजार रुपए के सिक्के लेने के निर्देश हैं जिसका वे पालन नहीं करते।

लोगों में जागरूकता और जानकारी की कमी के कारण भी बैंकों को इस बात की शह मिलती है। वहीं सरकारी संस्थानों द्वारा भी सिक्के लेने से मना किया जाता है। कोई व्यक्ति यदि अपने घर या दुकान का बिजली बिल का भुगतान करने के लिए सिक्कों का उपयोग करता है तो उसका भुगतान नहीं लिया जाता।

वहीं अगर कोई अपने संपत्ति कर का भुगतान करना चाहे तो वह सिक्कों के माध्यम से नहीं कर सकता। बीमार होने पर अस्पताल के बिल का भुगतान नहीं कर सकता। अफवाहों का दौर जब चलता है तो सबसे ज़्यादा नुकसान व्यापारी को होता है। इन तमाम समस्याओं को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी को या तो कोई एक्शन लेना चाहिए या फिर नोटबंदी की तरह ही सिक्काबंदी का फैसला ले लेना चाहिए।

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व्यापारियों के संगठन ऐसे विषय में कोई आवाज़ नहीं उठाते क्योंकि सामान्य तौर पर देखा जाये तो व्यापारी संगठनों पर मुख्य पदों पर बड़े थौक व्यापारियों और राजनैतिक रसूखदारों का कब्जा होता है। छोटे और मंझोले व्यापारियों को बस अपनी पार्टी द्वारा बंद कराए जाने पर समर्थन देने के लिए सदस्य बनाकर रखा जाता है। उनकी असली समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देता। जबकि सबसे ज़्यादा सिक्कों की आवक फुटकर व्यवसायियों के पास होती है।

सिक्कों के चलन पर अगर कोई भी अफवाह फैलती है तो सबसे ज्यादा परेशानी छोटे और फुटकर दुकनादार झेलते हैं यह सिर्फ इटारसी का नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश के तमाम राज्यों का हाल है। कई जगह तो 5 रुपये के सिक्के चलन में हैं लेकिन 5 रुपये का नोट नहीं लिया जा रहा है।

सिक्कों से समस्या किस बात की –
आम लोगों के लिए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के आज भी सिरदर्द बने हुए हैं। RBI की गाइडलाइन के बाद भी बैंक सिक्के लेने से मना करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक बाजार में लगभग 25,000 करोड़ रुपए के सिक्के हैं। मोची, सब्जी वाला, फेरीवाला, रिक्शा वाला, छोटे दुकानदार, फुटकर विक्रेता जैसे कई अन्य वर्ग अगर बैंक में सिक्कें बदलवाने जाते हैं तो बैंक उन्हें साफ मना कर देता है। ऐसे उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता। अगर वे इन चिल्लर सिक्कों से बिजली का बिल भी भरते हैं तो वहां भी उन्हें मना कर दिया जाता है।

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क्या कहता है RBI –
सिक्कों के मुद्रीकरण के बारे में बीते दिनों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा था कि जो भी सिक्कें इस वक्त बाज़ार में मौजूद हैं वे पुरी तरह वैध हैं। अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। RBI का कहना है कि, सिक्कें पूरी तरह से वैध मुद्रा हैं। लोगों को बिना किसी झिझक के उसे स्वीकार करना चाहिए। केन्द्र सरकार द्वारा ढाले गए सिक्कों को आरबीआई चलन में डालता है।

बैंको को RBI के निर्देश –
वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी बैंकों को सिक्कों के संबंध में दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे सिक्का बदलने वाले ग्राहकों को अपनी शाखा से वापस नहीं लौटा सकते। बैंक ग्राहकों-व्यपारियों से छोटी राशि के सिक्कों और नोट को स्वीकार करें।