माखनलाल पत्रकारिता विवि पर सीएम कमलनाथ की नजर, 12 साल की नियुक्तियों पर प्रशासन को किया तलब

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भोपाल/डेस्क।  कमलनाथ सरकार आने के बाद से प्रदेश की राजधानी में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय अब निशाने पर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले 12 सालों में हुई नियुक्तियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को तलब किया है। माना जा रहा है कि देश के इस नामी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 12 सालों में कई बड़े पदो पर गलत भर्ती हुईं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व कुलपति बीके कुठियाला के कार्यकाल में अवैध भर्तियां हुई थी। खबरों के मुताबिक संघ और भाजपा से जुड़े उन लोगों को वेतन दिया जाता है जो कॉलेज में आते नहीं है। पहले भी 2010 और 2016 के बीच नियुक्तियां हुईं थी उनपर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे। कहां जाता है कई नियुक्तियों पर योग्यता को दरकिनार किया गया तो कई नियुक्तियों को बिना व विज्ञापन जारी किए कर दी गईं।

इससे पहले 2012 इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए लोकायुक्त में शिकायत भी की गई थी। इस दौरान नियुक्तियों में ढाई करोड़ के घोटाले के आरोप भी लगे थे। शिकायत में आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने विवि की जनरल काउंसलिंग की बैठक बुलाए बिना नियुक्तियां कर दी थी। इसके बाद लोकायुक्त ने जांच से मना कर दिया था। लोकायुक्त का कहना था कि लोकसेवक लोकायुक्त की परिभाषा में नहीं आते हैं, इसलिए यह संगठन उनकी जांच नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट में पहुंचा था मामला…

इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। नियुक्तियों में भाजपा सरकार और संघ पर फर्जी नियुक्तियों के आरोप लगे थे। इस दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस भी जारी कर दिये थे लेकिन अधिकारियोंने हाईकोर्ट को भी गुमराह कर दिया था।

विवि की महापरिषद का होगा पुनर्गठन

माखनलाल विवि की महापरिषद भी भंग हो गई है। इससे विवि की महापरिषद का पुनर्गठन होगा। महापरिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। इसके अलावा इस सदस्य में 30 लोग होते हैं। इसमें वित्त मंत्री, जनसंपर्क मंत्री उच्च शिक्षा मंत्री प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष विवि के कुलपति वरिष्ठ पत्रकार सहित अन्य सदस्य होते हैं। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ नई महापरिषद के अध्यक्ष होंगे ।

ऐसे समझिए मामला…

– एक आवदेक को एससी कोटे से नेट क्वालिफाइड होनेके बाद भी असिस्टेंट प्रोफेसर के जनरल कोटे में नियुक्ति दी गई थी।
– एक एसोसिएट प्रोफेसर पर नियुक्ति में उसके पीएचडी के दौरान पढ़ाए गए एक्सीपिरियंस को भी जोड़ लिया गया जबकि अनुभव क्वालिफिकेश के बाद माना जाता है। हालांकि शिकायत होने के बाद कई नियुक्तियों को विश्वविद्यालय ने निरस्त कर दिया था।