CAB Passed by Rajyasabha

नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में भी पारित, पक्ष में 125 वोट

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

नागरिकता संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित होने के बाद अब यह बिल राज्यसभा में भी पारित हो गया। इस विधेयक के पक्ष में 125 वोट पड़े और विरोध में 105 वोट पड़े। वोटिंग के समय कुल 230 सांसद मौजूद थे। शिवसेना नें सदन से वॉकआउट कर दिया। शिवसेना के राज्यसभा में 3 सांसद हैं। विपक्ष इस बिल का कड़ा विरोध कर रहा था, लेकिन सरकार के संख्या बल के आगे विपक्ष कमज़ोर पड़ गया। विपक्ष द्वारा लाए गये सभी संशोधन प्रस्ताव भी राज्यसभा में खारिज हो गए। इस विधेयक को सिलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग भी खारिज हो गई। राज्यसभा में पारित होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति को हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा उसके बाद राष्ट्रीय गजट में प्रकाशन के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा और पूरे देश में लागू हो जाएगा। इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

इस कानून के तहत अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्गानिस्तान से आए हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी। इस बिल में मुस्लिमों को अलग रखा गया है, यानी मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता नहीं दी जा सकेगी। इस बिल का विरोध इसलिए किया जा रहा था क्योंकि यह संविधान की मूल भावना को चोट पहुंचाता है जिसमें कहा गया है कि हर नागरिक को एक समान अधिकार दिये जाएंगे बिना किसी धार्मिक, लैंगिक और जातीय भेदभाव के। लेकिन यह विधेयक संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?

1.इस विधेयक में बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है।

2.मौजूदा क़ानून के मुताबिक़ किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। इस विधेयक में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह समयावधि 11 से घटाकर छह साल कर दी गई है।

3.इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए जाएंगे ताकि लोगों को नागरिकता देने के लिए उनकी क़ानूनी मदद की जा सके।

4. मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीक़े से दाख़िल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती है और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान है।

5. इस विधेयक से देश के मौजूदा मुस्लिम नागरिकों की नागरिकता खतरे में नहीं पड़ेगी। यह केवल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए मुस्लिम शर्णार्थियों को प्रभावित करेगा।