कांग्रेस ने देश को धर्म के आधार पर नहीं बांटा होता तो यह बिल नहीं लाना पड़ता : केंद्रीय गृह मंत्री

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

मोदी सरकार ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोपहर 12:20 बजे ये बिल सदन के पटल पर रखा। इस दौरान कांग्रेस के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में हंगामा किया, जबकि एआईएडीएमके इस बिल के समर्थन में है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। 

इस बिल के माध्यम से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जबकि असम समझौते के अनुसार 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था. सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक असम तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश में प्रभावी होगा। लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश करने को लेकर वोटिंग हुई। लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया। इस बिल को पेश करने के पक्ष में 293 वोट और विरोध में 82 वोट पड़े।

संसद में गृह मंत्री अमित शाह के CAB पर दिए भाषण के 10 अहम बिंदु-

मुस्लिमों को इस विधेयक में शामिल इसलिए नहीं किया गया है क्योंकि वो इन देशों में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार नहीं हुए हैं

हमारे देश की 106 किमी. सीमा अफगानिस्तान से सटी है, ऐसे में उसे शामिल करना जरूरी था। मैं इसी देश का हूं और भूगोल जानत हूं। शायद ये लोग PoK को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं

अगर कोई मुस्लिम भी भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करेगा तो उस पर भी विचार किया जाएगा

कांग्रेस पार्टी ने देश के बंटवारे के वक्त धर्म के आधार पर विभाजन किया, हमने नहीं किया

1950 में नेहरू लियाकत समझौता हुआ, तब भारत और पाकिस्तान में समझौता हुआ, जिसमें अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का जिक्र हुआ

नागरिकता संशोधन विधेयक संविधान के किसी भी आर्टिकल को आहत नहीं करता है, इसमें अनुच्छेद 11 और अनुच्छेद 14 का कोई भी उल्लंघन नहीं किया गया है

अगर समानता की बात हो रही है तो अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार कैसे होंगे? वहां समानता का कानून लागू क्यों नहीं होता है?

इस बिल में भारत की जमीनी सीमाओं से सटे हुए तीन देश- अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं

हमारे एक्ट के मुताबिक कोई भी आवेदन कर सकता है, सभी को नागरिकता मिलेगी

इस बिल के माध्यम से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जबकि असम समझौते के अनुसार 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था