पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज़ी से फ़ैल रही प्रदर्शन की आग, गुवाहाटी में लगा अनिश्चितकाल कर्फ्यू

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ग्राउंड रिपोर्ट। न्यूज़ डेस्क

नागरिकता संशोधन विधेयक मोदी सरकार के गले की फांस बनता नज़र आ रहा है।  विधेयक (CAB) के खिलाफ छात्र संघों और वाम-लोकतांत्रिक संगठनों ने मंगलवार को पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दियी है । सोमवार 9 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जब लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश कर रहे थे, उस समय पूर्वोततर के कई राज्यों में लोग इस विधेयक के विरोध में सड़कों पर उतरे हुए थे। असम, त्रिपुरा, मणिपुर, नगालैंड में बीते कई हफ्तों से इस विधेयक का विरोध जारी है।

सोनितपुर, लखीमपुर और तिनसुकिया में धारा 144 लगा दी गई

गुवाहाटी में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया है। इसके अलावा असम के 10 जिलों में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया है। यह प्रतिबंध आज शाम 7 बजे से शुरू होगा। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बुधवार को हजारों लोग असम में सड़कों पर उतरे। राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प से राज्य में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है।

इसके अलावा नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे एक हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही सोनितपुर, लखीमपुर और तिनसुकिया में धारा 144 लगा दी गई है। असम के कई जिलों में हिंसक प्रदर्शनों के चलते प्रशासन ने ये कदम उठाए हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक का सड़क से लेकर संसद तक विरोध हो रहा है।

यूपी में भी शुरू हुआ कैब को लेकर प्रदर्शन

देवबंद में भी कैब को लेकर बुधवार शाम के समय उस समय अफरातफरी फैल गई, जब नमाज के बाद हजारों मुस्लिम शहर के अंदर नारेबाजी करते हुए मुजफ्फरनगर-सहारनपुर हाईवे की ओर दौड़ पड़े। इस बीच पुलिस ने उनको रोकने का प्रयास किया, तो पुलिस से धक्का-मुक्की की। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जो यह नागरिकता संशोधन बिल लाया गया है, इसको तुरंत वापस लिया जाए। आक्रोशित भीड़ ने सड़क पर ही नमाज भी अदा की।

नागरिकता संशोधन विधेयक में कहा गया है कि पूर्वोत्तर के जिन राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, सिक्किम और मिजोरम) में ‘इनर लाइन परमिट’ व्यवस्था और जो क्षेत्र संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, उन्हें इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा जाएगा। सोमवार को लोकसभा में यह विधेयक पेश करने के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मणिपुर भी अब से इनर लाइन परमिट व्यवस्था के अंतर्गत आएगा, जिसके चलते यहां भी नागरिकता संशोधन विधेयक लागू नहीं होगा।

अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते गृह मंत्री अमित शाह की इस विधेयक को आगामी संसद सत्र में पेश करने की घोषणा के बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया था। संगठनों द्वारा जारी एक ज्ञापन में कहा गया था कि यह विधेयक पूर्वोत्तर क्षेत्र की जनजातियों के सिर पर लटक रही खतरे की तलवार है।