Home » अमेरिका को पछाड़ दुनिया की नई विश्वशक्ति बनने की राह पर चीन ?

अमेरिका को पछाड़ दुनिया की नई विश्वशक्ति बनने की राह पर चीन ?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Ground Report | News Desk

वर्तमान समय में पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कहर से जंग लड़ रही है । दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर 46 लाख को पार कर गई है।वहीं दुनिया में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 3 लाख से अधिक हो चुका है। अमेरिका में कोरोना का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से लगातार जूझ रही है। इस वायरस से मरने वालों की संख्या तीन लाख 13 हजार से ज्यादा हो गई है और संक्रमितों की संख्या 47 लाख 20 हजार को पार कर गई है। जबकि 18 लाख 11 हजार से ज्यादा लोगों ने कोरोना को मात दी है।

दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश अमेरिका में मृतकों की संख्या 90 हजार को पार कर गई है और 15 लाख 07 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। कोरोना का कारण कारोबार का प्रत्येक क्षेत्र विनाश की कगार पर जा पहुंचा है । अर्थव्यवस्था एक ठहराव सा आ गया है । अमेरिका में मरने वालों की संख्या इतनी अधिक है कि शवों को रखने के लिए कोई जगह नहीं है । अमेरिका इन शवों को एक साथ एक बड़ा सा गढ़्ढा खोद कर दफना रहा है ।

डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि लॉकडाउन को हटाना अमेरिका का अब तक का सबसे कठिन फैसला होगा । स्थिति हर दिन बिगड़ती जा रही है और इस महामारी को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कुछ किया जाना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से देश की अर्थव्यवस्था को खोलना चाहते हैं। देश की अर्थव्यवस्था कोरोनावायरस महामारी से पूरी तरह से तबाह हो रही है।

कोरोना के कारण अमेरिका में चल रहे लॉकडाउन की वजह से 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में 95 प्रतिशत लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके हैं । हालाँकि, लॉकडाउन कोरोना का समाधान नहीं है। वायरस तेज़ी से लगातार फैल रहा है और अमरिकी अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ रही है । अमेरिका, दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति कहा जाने वाला अमरिका लंबे समय तक लॉकडाउन स्थिति में नहीं रह सकता है।

कोरोनावायरस के कारण अमेरिका में बेरोजगारों की संख्या 40 मिलियन तक हो सकती है। अमेरिका में लगभग अभी तक 26 मिलियन लोग बेरोजगार हो चुके हैं। कोरोना के यह आंकड़ा 40 मिलियन तक जा सकता है। एसोसिएटेड प्रेस के आंकड़ों के अनुसार, 1930 में अमेरिका में इससे पहले ऐसी महामंदी को देखा गया था। अभी हर 6 में से 1 मजदूर को निकाल दिया जा रहा है। विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनों ने 2020 में अमेरिका में नकारात्मक वृद्धि का अनुमान लगाया है।

ट्रम्प ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है । सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और अपने चेहरे को ढक कर रखें। “सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से हमारी अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी भी तरह से अपनी सुरक्षा को कम कर रहे हैं । बल्कि, देश को प्रगति के पथ पर वापस लाने के लिए अथक रूप से काम करना हमारी रणनीति का हिस्सा है ।

कॉरोनोवायरस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने लगभग 500 बिलियन डॉलर दिए हैं। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन ने छोटे और मध्यम व्यवसायों को किराए और अन्य खर्चों में मदद करने के लिए $ 250 बिलियन के पैकेज का भी अनुरोध किया है। डेमोक्रेट द्वारा अस्पतालों के लिए 100 बिलियन डॉलर का आह्वान किया गया है। इसमें एक राष्ट्रव्यापी कोरोना का परीक्षण कार्यक्रम और साथ ही छोटे बैंकों के लिए $ 60 बिलियन का सेट अप और सामुदायिक विकास बैंकों का एक वैकल्पिक नेटवर्क शामिल है जो शहरी ऋणदाताओं और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पर काम कररेगा ।

अमेरिका की हार के रहे प्रमुख कारण

आज हम सभी के मन में जो एक सवाल है वह यह है कि आखिर चीन ने कोरोनावायरस पर जीत हासिल कैसे की? दुनिया के तमाम देशों ने कोरोना महामारी के आगे घुटने टेक दिये तो फिर चीन ने ऐसा क्या किया जो वह इतनी जल्दी कोरोना से उबर गया और फिर से अपने देश की अर्थव्यस्था खोलने के लिए तैयार है। हम कितना भी चीन को इस बीमारी के फैलाव के लिए कोसें लेकिन एक बात पर हमें गौर करना ज़रुरी है वह है चीन की सरकार द्वारा कोरोना को रोकने के लिए उठाए गए त्वरित कदम। चाहे 10 दिन में कोरोना के लिए अलग से अस्पताल खड़ा करना हो या कोरोना के रोकथाम के लिए उठाए गए कड़े कदम हो। यहां हमें अमेरिका की हार के कारणों का विश्लेषण करना भी ज़रुरी है।

READ:  Indians donated 43% more during Covid pandemic in 2020: Survey

जब दिसंबर में चीन के वुहान में कोरोनोवायरस का फैलना शुरू हुआ, तो चीन ने तेजी से काम किया और बलपूर्वक सभी चीज़ों पर पूरी तरह से रोक लगा दी । कोरोना की चपेट में आए चीन की पहली तिमाही में जीडीपी में अभूतपूर्व 6.8% की गिरावट देखी गई । लेकिन चीन ने युद्र स्तर पर काम किया जिसके चलते वे कोरोना पर काबु पाने में कामयाब रहा । चीन में कोरोना से अब तक लगभग 85,000 संक्रमित हुए और 4,634 लोगों मे जान गई । वहीं, अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश बन गया । अमेरिका में मृतकों की संख्या 90 हजार को पार कर गई है और 15 लाख 07 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। 

महामारी के दौरान अमेरिका केवल 90 लाख टेस्ट ही कर पाया जो उसकी जनसंख्या का 3 फीसदी ही है। जबकि चीन ने 10 दिन के भीतर वुहान की 11 मिलियन कुल आबादी का टेस्ट करने का लक्ष्य रखा। आपको बता दें की कोरोना से जंग में टेस्टिंग का सबसे अधिक महत्व रहा है। जितने ज्यादा टेस्ट होंगे उतनी ही जल्दी कोरोना को रोका जा सकता है। न्यूज़ीलैंड ने भी इसी को ध्यान में रखा और अब वे कोरोना मुक्त होने की तरफ बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी सिस्टम की हार का मुख्य कारण वहां की सरकार की देरी, महामारी को हल्के में लेना और फिर बिना सोचे समझे लिए गए कदम हैं। जबकि चीन ने इस महामारी को अवसर के रुप में देखा। चीन ने इस महामारी से लड़ने के लिए राज्य की सरकार को आगे किया अर्थव्यव्स्था और कानून व्यवस्था पर राज्यों को अधिक शक्ति दी।

विश्वशक्ति बनने के लिए चीन बनाई दूरदर्शी योजनाओं

अर्थव्यवस्था की बात करें तो दुनिया के तमाम देश लॉकडाउन की वजह से बुरे हालातों से गुज़र रहे हैं वहीं चीन ने कोरोना के बाद खड़े हुए संकट को अवसर के रुप में देखा और कई ऐसे फैसले लिए जो उसे आने वाले समय में दुनिया के नक्शे पर सबसे चमकता हुआ देश बना देंगे। डॉनल्ड ट्रंप की घातक नीतियों की वजह से दुनिया में एक जगह बनी है जिसे चीन हथियाने के लिए बेताब है। एक्सपर्ट का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का अमेरिका को इतना नुकसान होगा कि वह कभी दोबारा विश्व शक्ति कहलाने के लायक नहीं रहेगा। इसमें अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां जैसे आईएमएफ, डब्लयूएचओ पर अमेरिका का घटता प्रभाव और चीन की नज़़दीकियां अहम किरदार निभाएंगी। महामारी के दौरान चीन ने दुनिया के तमाम देशों की तरफ मदद के हाथ बढ़ाए ईरान, इटली जैसे देश जो कोरोना की वजह से बदहवास हो चुके थे वहां सबसे पहले मैडीकल टीम और ज़रुरी उपकरणों की खेप चीन ने पहुंचाई बावजूद इसके की उसपर कोरोना फैलाने के आरोप लगाए जा रहे थे।

विश्वशक्ति बनने के लिए चीन दूरदर्शी योजनाओं पर काम कर रहा है। जिसकी अगुवाई खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग कर रहे हैं। शी जिनपिंग का चाईना ड्रीम हो या चाईना स्टैंडर्ड 2035, यह वे योजनाएं हैं जो चीन को दुनिया के सेंटर स्टेज पर लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। चाईना ड्रीम के तहत मेड इन चाईना 2025 का लक्ष्य रखा गया है। इसमें चीन उत्पादन और भविष्य की तकनीकों पर बेतहाशा निवेष कर रहा है। इसमें चीन की मदद स्थानीय इंडस्ट्रलिस्ट कर रहे हैं। 5जी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में नए तरह का ढांचागत विकास किया जा रहा है।

READ:  Karwa Chauth 2021: व्रत के दौरान बरतें ये सावधानियां, नहीं होगी पेट संबंधी समस्या

चीन की अर्थव्यवस्था उत्पादन कुशलता, कनेक्टीविटी और उत्तम श्रेणी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है। चीन की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा दुनिया में उत्पादों की बिक्री पर निर्भर है। जब दुनिया की अर्थव्यवस्था लॉकडाउन की वजह से चरमरायी तो इसका असर चीन के छोटे एवं लघु उद्योंगों पर भी पड़ा। चीन ने इससे निपटने के लिए कई सुधार किए, चीन अबतक 586 बिलियन डॉलर की मदद छोटे उद्योगों को दे चुका है। इस काम में सरकार की मदद वहां की सबसे सफलतम प्राईवेट कंपनियां भी कर रही हैं। अलिबाबा के संस्थापक जैक मा अब तक 282 बिलियन डॉलर की मदद चीन के लघु उद्योगों को उबारने के लिए कर चुके हैं। डिलीवरी सर्विस म्यूटान देश के बैंकों के साथ मिलकर छोटे उद्योगों को अब तक 2.8 बिलियन डॉलर के लोन कम ब्याज पर बांट चुके हैं। इसे कहते हैं पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप जहां प्राईवेट कंपनियां देश को बनाने में सरकार का सहयोग अपनी इच्छा से करती हैं।

100 मानव रहित फैक्ट्री बनाएगा चीन

अब बात करते हैं चीन की दूरदृष्टी की। महामारी की वजह से फैक्ट्रीयां बंद हो गई क्योंकि उन्हें चलाने के लिए मज़दूरों की आवश्यकता होती है, उत्पादन ठप पड़ गया। इस चुनौती से भविष्य में निपटने के लिए चीन ने 2025 तक 100 मानव रहित फैक्ट्री लगाने का प्लान बनाया है। इससे रोज़गार संकट तो ज़रुर खड़ा होगा लेकिन संकट के समय देश में उत्पादन ठप नहीं होगा। कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बड़ गया, चीन इससे बेहतर ढंग से लड़ पाया क्योंकि वह पहले ही ऑनलाईन कंसलटेशन पर काम कर रहा था। महामारी के समय 150,000 ऑनलाईन मेडिकल कंपनियां मरीज़ों को उनके घरों तक दवाईयां पहुंचा रही थी। चीन में ऑनलाईन अपनी बीमारी के इलाज और घर पर दवाओं की डिलीवरी पर विश्वास करते हैं। इससे देश के हॉस्पिटल और क्लीनिक्स पर कम दबाव रहता है

चीन और अमेरिका चाहे एक दूसरे को कितना भी क्यों न कोस लें एक दूसरे के बिना इन दोनों देशों को नुकसान ही उठाना पड़ेगा। आप को बता दें कि अमेरिका के 97 फीसदी एंटीवायोटिक्स चीन में बनते हैं। अमेरिका की सबसे मूल्यवान कंपनी एप्पल अपने अधिकतम पार्टस चीन में बनाती है। चीन की कंपनियां अभी तक अमेरिकी बाज़ार में सफलता पाने का प्रयास कर रही हैं। अगर ज़ूम एप का ही उदाहरण लें तो यह एप अमेरिका की सिलीकॉन वैली में बनाया गया लेकिन इसे बनाने वाला चीन के शैनडांग प्रांत में पैदा हुआ है।

मुमकिन जब दुनिया कोरोना वायरस से बाहर निकलेगी तो चीन मज़बूती के साथ दूसरों देशों के सामने ख़डा होगा । ख़ासकर अमेरिका के सामने चीन की ताक़त बढ़ती हुई नज़र आए । विश्व शक्ति कहा जाने वाला अमेरिका चीन से पिछड़ जाए । शायद दुनिया के सामने कोरोना के बाद अमेरिका दोबारा विश्वशक्ति कहलाने के लायक ही न बचे ।

ग्राउंड रिपोर्ट के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।