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Child Labour: ILO और UNICEF की चौकाने वाली रिपोर्ट, दो दशकों में बढ़ गई बाल मजदूरी

Child Labour
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Child Labour: The International Labour Organization (ILO) और United Nations Children’s Fund(UNICEF) ने बताया कि दुनिया ने 20 सालों में पहली बार बाल मजदूरी में लगे बच्चों की संख्या बढ़ते देखी है। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोनावायरस का संकट किशोरों को उसी तरफ धकेल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बाल मजदूरों( Child Labour) की संख्या 2016 में 15.2 करोड़ से बढ़कर 16 करोड़ हो गई थी। इससे पता चलता है कि 2000 के बाद से 246 मिलियन बच्चे मजदूरी में लगे हुए थे।

सबसे ज्यादा कहाँ बढ़ी बाल मजदूरी

बाल मजदूरी में सबसे ज्यादा बढ़त अफ्रीका में हुई। जनसंख्या बढ़ना इसका सबसे बड़ा कारण है जिसकी वजह से यहां के लोगों को गरीबी का भी सामना करना पड़ रहा है। उप-सहारा अफ्रीका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में 2.3% की तुलना में, 5 से 17 साल की उम्र के लगभग एक चौथाई बच्चे पहले से ही बाल मजदूरी कर रहें हैं।

क्या कहता है इंडियन लेबर लॉ(Indian Labour Law)

भारतीय श्रम कानून(Indian Labour Law) के कहता है कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए काम करना गैरकानूनी है। लेकिन स्कूल के बाद वह फैमिली बिजनेस से जुड़ सकते हैं। लेकिन इसका गलत फायदा उठाकर बच्चों की तस्करी की जाती है उसके बाद उनसे काम कराया जाता है। बिहार जैसे राज्यों में जहां 4.5 लाख बच्चे मजदूर के रूप में काम करते हैं, उनके लिए ऐसे तंत्र तैयार किए जा रहे हैं जिसमें बाल मजदूरी की मैपिंग की जा सके। पूरे देश में 5 से 14 साल की उम्र के कामकाजी बच्चों की संख्या करीब 44 लाख है।

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17 साल के बच्चों की संख्या में हुई वृद्धि

एक रिपोर्ट के मुताबिक 5 से 17 साल की उम्र के बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हुई है जो सप्ताह में 43 घंटे से ज्यादा समय तक भारी मशीनों से खनन या “खतरनाक काम” करते हैं।हर चार साल में प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट से पता चलता है कि 5 से 11 साल के बच्चों की संख्या वैश्विक संख्या के आधे से भी ज्यादा है। हालांकि, लड़कों के बाल श्रम में जाने की अधिक संभावना होती है।

2021 को घोषित किया एलिमिनेशन ऑफ चाइल्ड लेबर

ILO के महानिदेशक गाय राइडर ने एक ने कहा कि “नए अनुमान एक चेतावनी हैं। हम नई पीढ़ी के बच्चों को खतरे में नहीं देख सकते। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2021 को बाल श्रम उन्मूलन(elimination of child Labour) के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (international year) घोषित (declare) कर दिया है।

क्या कहना है संयुक्त राष्ट्र का

संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बड़े कदम नहीं उठाए गए तो 2022 के आखिर तक यह आंकड़ा 206 करोड़ तक जा सकता है। एजेंसियों ने चेतावनी दी कि कोरोना संकट पहले से ही बाल श्रम में लगे बच्चों को ज्यादा घंटे और बिगड़ते हालातों में काम करने के लिए मजबूर कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने देशों से 2025 तक इसे खत्म करने के लिए तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि कोविड-19 के कारण ज्यादा बच्चों को खतरा है।

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क्या कहतें हैं विशेषज्ञ

एक रिपोर्ट के सह-लेखक और यूनिसेफ के सांख्यिकी विशेषज्ञ क्लाउडिया कैपा के अनुसार, “अगर सामाजिक सुरक्षा कवरेज मौजूदा स्तरों से फिसल जाता है, तो खर्च में कटौती के कारण बाल मजदूरी में बच्चों की संख्या (अतिरिक्त) 4.6 करोड़ तक बढ़ सकती है।

यूनिसेफ के निदेशक का क्या कहना है

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर के कहते हैं कि “हम बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ाई में जमीन खो रहे हैं, और पिछले एक साल ने उस लड़ाई को आसान नहीं बनाया है।” उनके अनुसार, “अब, वर्ल्ड लॉकडाउन के दूसरे साल में, स्कूल बंद होना, आर्थिक रुकावटें और सिकुड़ते बजट परिवारों को दिल तोड़ने वाले ऑप्शन बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

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