पी चिदंबरम को ज़मानत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘आर्थिक अपराध गंभीर अपराध है’

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

पिछले 105 दिनों से जेल की हवा खा रहे पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए सशर्त ज़मानत दे दी है। उनका पासपोर्ट जब्त रहेगा। ताकि वह देश छोड़कर ना जा पाएं। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जेल से बाहर आने के बाद वह मीडिया से बात नहीं करेंगे। प्रेस इंटरव्यू और मीडिया में बयान देने पर रोक लगा दी गई है। उन्हें दो लाख के बॉन्ड और दो लाख के मुचलके पर जमानत दी गई है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा-

1. ‘अपराध की गंभीरता को हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से निपटना पड़ता है आर्थिक अपराध गंभीर अपराध हैं।

2. न्यायालयों को मामले की प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना होगा। अपराध की ‘गंभीरता’ को ध्यान में रखने के लिए दी जाने वाली शर्तों में से एक है निर्धारित सजा।

3. यह ऐसा नियम नहीं है कि हर मामले में जमानत से इनकार किया जाना चाहिए।निष्कर्ष यह है कि किसी अन्य मामले की मिसाल के आधार पर जमानत देने या जमानत से इंकार करने की जरूरत नहीं है। केस टू केस आधार पर विचार होना चाहिए।’

4. दिल्ली HC ने अपराध के गंभीरता से संबंधित जमानत को सही ठहराया था। हालांकि, हम मामले की मेरिट पर दिल्ली HC की टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं।

5.जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की तीन जजों की बेंच यह फैसला सुनाया है।

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INX मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चिदंबरम को 5 सितंबर को अरेस्ट किया गया था। चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई ने भी केस दर्ज किया था जिसमें उन्हें जमानत मिल चुकी है।

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