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चार्ल्स मैनसन : वो सीरियल किलर जो लोगों को मारकर उनके ख़ून से दीवारों पर संदेश लिखा करता था

चार्ल्स मैनसन : वो सीरियल किलर जो लोगों को मारकर उनके ख़ून से दीवारों पर संदेश लिखा करता था
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यूं तो इस दुनियां में एक से एक खूंखार सीरियल किलर गुज़रे हैं। ऐसे खूंखार कि जिनका नाम सुनते ही लोग सिहर जाया करते थे। आपने ऐसे बहुत से सीरियल किलर्स के बारे में पढ़ा या सुना होगा। आज आपको एक ऐसे सीरियल किलर चार्ल्स मैनसन के बारे में बताएंगे जो खुद को भगवान घोषित कर चुका था।

20वीं सदी का सनकी और खूंखार हत्यारा चार्ल्स मैनसन एक धार्मिक नेता के रूप में भी जाना जाता था। बात 1969 की है जब चार्ल्स मैनसन ने सिलसिलेवार हत्याएं कर सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। चार्ल्स मैनसन इन्हीं हत्याओं के बाद सीरियल किलर के रूप में दुनिया भर में कुख्यात हुआ।

किसने सोचा था कि महज़ 13 बरस की उम्र में हथियार चुराने के आरोप में गिरफ्तार एक लड़का 20वीं शताब्दी का सबसे बदनाम सनकी और खूंखार हत्यारा बन जाएगा।चार्ल्स मैनसन का हथियार चुरा कर जेल जाना उसकी ज़िन्दगी में ऐसा बदलाव लाया कि किसी को भी इसका एहसास तक न था।

1967 में गिरफ्तारी के बाद पैरोल पर बाहर आए चार्ल्स मैनसन ने सैन फ्रान्सिस्को में एक घर बनाया, जहां उसने धीरे-धीरे अपनी धार्मिक और नस्लवादी सोच को बढ़ावा दिया और अंततः पागलपन, हिंसा और भयावहता का प्रतीक बन गया। चार्ल्स मैनसन की सनक उसपर धीरे-धीरे ऐसे हावी हुई कि किसी का क़त्ल करना उसके लिए एक मज़ाक सा बन गया।

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चार्ल्स मैनसन के अनुयायियों ने 1969 में 26 वर्षीय गर्भवती अभिनेत्री शेरॉन टेट की लॉस एंजिल्स स्थित उसी के घर में अन्य चार लोगों के साथ चाकूओं से गोद कर हत्या कर दी। इन हत्याओं ने पूरे अमेरिका को हिला दिया था।

यहां तक कि हत्यारों ने पीड़ितों के खून से दीवारों पर संदेश भी लिखा कि हॉलीवुड को आतंक की स्थिति में भेजा। वहीं एक जनरल स्टोर के मालिक और उसकी पत्नी की हत्या के बाद मैनसन फैमिली के सदस्यों ने उन्हीं के खून से दीवार पर लिख दिया था, ‘सुअरों की मौत’।

चार्ल्स मैनसन का पूरा नाम चार्ल्स माइल्स मैडोक्स था। मगर वो चार्ल्स मैनसन के नाम से ही दुनिया भर में जाना गया। चार्ल्स मैनसन का जन्म 12 नवंबर 1934 को सिनसिनाटी में हुआ था। मैनसन की मां एक सोलह साल की किशोरी थी। मैनसन ने अपना ज्यादातर जीवन रिश्तेदारों और किशोर बालसुधार गृह में ही गुजारा। 13 साल की उम्र में उसे हथियार चुराने के लिए गिरफ्तार किया गया था। पैरोल पर बाहर आने के बाद 1967 में उसने अपना ‘परिवार बनाने के बारे में सोचा।

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चार्ल्स मैनसन ने सैनफ्रान्सिस्को के हेट-ऐशबरी को हिप्पियों के लि स्वर्ग बना दिया था।’ कम्यूनल सेक्स और ड्रग्स का इस्तेमाल यहां भरपूर होता था। एक तरह से मैनसन भगौड़ों, अपराधियों के लिए मसीहा बन गया था। वह अपने करिश्में और आध्यात्म की बातों से युवाओं को आसानी से भरमा लेता था। उसके अड्डे से पकड़े गए लोगों में से कुछ ने पुलिस को कहा था कि कहीं भी कोई भी बात उसके बारे में की जाए वह सब सुनने में सक्षम था।

मैनसन रॉक स्टार बनना चाहता था। लेकिन अंततः उसका नाम क्रूरतम लोगों में शामिल हुआ। मैनसन ने अपने माथे पर स्वास्तिक चिन्ह गुदवाया हुआ था। उसके कल्ट का यही निशान था। एक सुनवाई के दौरान वह अपने बचाव में जज के सामने यह चिल्लाते हुए कूद गया था कि क्रिश्चिय न्याय के नाम पर कोई भी तुम्हारी गर्दन कलम कर सकता है।

कहते हैं कि चार्ल्स चाहता था कि पूरी दुनिया उसे अपना भगवान माने, लोग उससे डरें और उसकी पूजा करें। यहां तक कि उसने अपने आपको ईसा-मसीह घोषित कर लिया था।बाद में उसने कैलिफोर्निया जेल में नौ बार उम्र कैद की सजा काटी ।इस बदनाम शख्स पर कई किताबें लिखी गई हैं और फिल्में बनाई गईं, जो चर्चा में रहीं।

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अमेरिका के दक्षिण कैलिफोर्निया की एक जेल में चार्ल्स मैनसन ने 83 साल की उम्र में अपनी आख़री सांस ली थी। सुधार केंद्र में रखे गए मैनसन की मृत्यु प्राकृतिक थी। जेल अधिकारियों ने जब इस बात की घोषणा की तो अमेरिका सहित विश्व के दूसरे देशों में भी फिर रीढ़ की हड्डी कंपा देने वाले उसके अपराध ताजा हो गए थे ।

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