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चंद्रयान का 95 फीसदी हिस्सा अभी भी सलामत, 1 साल तक मिलती रहेगी महत्वपूर्ण जानकारी

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

भारत का चंद्रयान मिशन अपने अंतिम दौर में पहुंचने से पहले थम गया। चांद पर तिरंगे की छाप का हमारा सपना अधूरा रह गया। लेकिन 978 करोड़ की लागत का इसरो का यह मिशन अभी भी हमें चांद से महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करने में मददगार साबित होगा।

विक्रम लैंडर की तस्वीर

चंद्रयान के तीन भाग हैं पहला ऑर्बिटर जो 2 सितंबर को सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में स्थापित हो चुका है। यह पूरे एक वर्ष तक चांद की तस्वीर इसरो को भेज सकता है। दूसरा भाग है विक्रम लैंडर और तीसरा भाग है रोवर। लैंडर से संपर्क टूट जाने के बाद चंद्रयान का दूसरा और तीसरा भाग व्यर्थ हो गया है। जो कि पूरे मिशन चंद्रयान का मात्र 5 फीसदी है। इसरो का ऑर्बिटर अभी भी सलामत है जो लैंडर की तस्वीरें भी भेज सकता है। जिससे उसकी स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

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यह जानकारी इसरो के एक अधिकारी ने न्यूज़ एजेंसी IANS को दी है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर का लिंक आप यहां देख सकते हैं।