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Buddha Purnima 2021: बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है इस दिन क्यों क्यों करते है Lord Buddha की पूजा

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Buddha Purnima 2021: 26 बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध (Lord Buddha) की पूजा की जाती है। इस पर्व को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बुद्ध धर्म ( Buddhism ) को मानने वाले लोग बड़ी आस्था और विश्वास के साथ बहुत ही धूम-धाम से (Buddha Purnima 2021) मनाते हैं। इस दिन को इतिहास के पन्नों में एक विशेष दर्जा दिया गया है।

History of Buddha Purnima क्या है बुद्ध पूर्णिमा का इतिहास

Buddha Purnima को मनाने के पीछे भी एक इतिहास है। इस दिन Lord Buddha का जन्म 563 ईशा पूर्व में Nepal के कपिलवस्तु के पास लुम्बिनी में हुआ था। इसी जगह में तीसरी शताब्दी ईशा पूर्व में सम्राट अशोक (Samrat Ashok ) ने भगवान बुद्ध के प्रतीक में एक स्तम्भ ( Column ) बनवाया था। इनका वास्तविक नाम सिद्धार्थ था। ऐसा माना जाता है की बुद्ध धर्म के संस्थापक स्वयं महात्मा बुद्ध हैं। वर्षों कठोर तपस्या के बाद उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई। अपने ज्ञान और बुद्धि से उन्होंने पूरे देश को प्रकाश से भर दिया। अंत में कुशीनगर में वैशाख पूर्णिमा (Vaisakh Purnima) को उनका निधन हो गया।

Buddha Purnima 2021 का पर्व भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा को 20वीं सदी में एक विशेष दर्जा प्राप्त नहीं था। सन् 1950 में श्रीलंका में बौद्ध सभा का आयोजन हुआ था। जिसके बाद लोगों को इसके बारे में पता चला, और इस दिन को एक विशेष दर्जा दिया गया। इस दिन अवकाश रखने की भी मंजूरी दी गई।

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Buddha Purnima कैसे मनाई जाती है

Buddha Purnima का पर्व बोधगया में मनाया जाता है। इस दिन लोग मंदिर और वहा के क्षेत्र को रंगीन बौद्ध झंडों, रोशनी, मोमबत्तियों, दीयों से सजाते है।इस दिन भिक्षुओं का रंगारंग जुलूस निकाला जाता है और, मिठाई,नमकीन के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग सफेद कपड़े पहनते है, और बुद्ध के दिए गए उपदेश घरों में गूंजते है। महाबोधि वृक्ष, जिसे “पीपल-वृक्ष” या पवित्र अंजीर के पेड़ के रूप में भी जाना जाता है। उसकी पूजा की जाती है, और प्रसाद चढ़ाया जाता है।

यह वह वृक्ष है , जिसके नीचे बैठकर Lord Buddha ने आत्मज्ञान प्राप्त किया था। जो लोग मांसाहारी होते हैं, वे इस दिन मांस नहीं खाते हैं। इस दिन पंक्षियों को पिंजरे से आजाद करने की भी प्रथा है। घरों में मीठे पकवान बनते है। पूरा दिन बुद्ध के जीवन का प्रवचन सुनते है।

Buddha Purnima क्यों मनाई जाती है

Lord Buddha ने जब अपने जीवन में दुनिया में हो रहे पाप, मृत्यु, और हिंसा के बारे में जाना तो उन्होंने मोह माया का त्याग करने की सोची। उन्होंने अपना परिवार छोड़कर , सभी जिम्मेदारियों से मुक्ति ले ली और सत्य की खोज में इधर उधर भटकते रहे। इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। वैशाख पूर्णिमा (Vaishakh Purnima ) के दिन से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं हैं। जिनका उनके जीवन से संबंध है। इसलिए बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध की स्मृति में मनाई जाती है।

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