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मध्यप्रदेश और छत्तीसगड़ में बसपा ने तोड़े कांग्रेस के सपने

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न्यूज़ डेस्क।। 2019 में महागठबंधन का ख्वाब देख रही कांग्रेस विधानसभा चुनावों में सहयोगियों को साथ ला पाने में नाकाम दिख रही है। मध्यप्रदेश में बसपा, सपा और गोंडवाना गणतंत्र जैसी पार्टियों को कांग्रेस अपने साथ लाना चाहती थी। लेकिन बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ इस सपने पर पानी फेर दिया है। कमलनाथ को बसपा के साथ तालमेल का फार्मूला तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन लगता है, कमलनाथ इसमें सफल नहीं हो सके। कहा जा रहा है कि बसपा उन सभी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी, जहाँ कांग्रेस 2013 के चुनावों में हारी थी। 22 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने के साथ ही बसपा ने सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।

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छत्तीसगढ़ में भी बसपा ने जोगी की जनता कांग्रेस के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी है। यहां भी कांग्रेस को झटका लगा है।

दोनों ही राज्यों में बसपा का अच्छा खासा जनाधार है। अगर दोनों राज्यों में कांग्रेस और बसपा साथ लड़ते तो भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते थे। यह कहना अब ठीक होगा कि दोनों राज्यों में अब भाजपा ने बढ़त हासिल कर ली है।

मायावती को कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन करने पर अपना जनाधार खिसकने का डर सता रहा है। इसीलिए वो छोटी पार्टियों के साथ हाथ मिलाना बेहतर समझ रही हैं। कर्नाटक में बसपा ने कांग्रेस की जगह जेडीएस से हाथ मिलाया, हरियाणा में INLD से पहले ही गठबंधन की घोषणा मायावती कर चुकी हैं। कर्नाटक में जेडीएस के साथ जाने पर मायावती को कुछ खास सफलता नहीं मिली लेकिन राष्ट्रीय पार्टी की अपेक्षा क्षेत्रीय पार्टी के साथ तालमेल मायावती के लिए सहज है।

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राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में तैयार होगा इसकी संभावना अब घटती हुई दिखाई दे रही है। और तीसरा मोर्चा तैयार होने की संभावना बढ़ गई है, जिसमे केवल क्षेत्रीय पार्टियां इकट्ठा होकर चुनाव लड़ सकती हैं। कांग्रेस मायावती को मनाने की कोशिश आखिरी दम तक करेगी। 230 सीट पर लड़ने की घोषणा के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है और मायावती अब अपनी बात मनवाने में भी कामयाब हो सकती है।