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मैं इस्लाम से नफरत नहीं करता क्योंकि…

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दुनिया को धर्म के नाम पर बांटने वाली भावनाओं का प्रचार आजकल बहोत तेज़ी से हो रहा है। आईएसआईएस द्वारा युरोपीय देशों में हुए हमले और सीरिया युद्ध के बाद पैदा हुए रिफ्यूजी संकट की वजह से लोगों में इस्लाम विरोधी भावना का विस्तार हुआ है। ऐसे में यह पोस्ट एक सकारात्मक सोच का संचार करता है।

न्यूज़ डेस्क।। दुनिया को देखने का नज़रिया हमारे साथ घटने वाली घटनाएं और हमारे अच्छे-बुरे अनुभव तय करते हैं। ऐसा ही एक अनुभव फेसबुक पर साझा किया 2007 में इराक युद्ध के दौरान अपना एक पैर खो चुके ब्रिटिश सैनिक क्रिस हर्बर्ट ने। उन्होने अपने फेसबुक पोस्ट में उन लोगों को करारा जवाब दिया, जो उनसे अपेक्षा करते हैं की उनके साथ घटी घटना के लिए उन्हे इस्लाम को ज़िम्मेदार मानना चाहिए और इसके लिए उन्हे इस्लाम से नफरत करनी चाहिए।

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2007 में इराक युद्ध के दौरान क्रिस ने एक हमले में अपना दाहिना पैर खो दिया था। साथ ही उनके कुछ साथियों की इस हमले में जान चली गई। तब क्रिस की उम्र मात्र 19 वर्ष थी। इस घटना ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। लेकिन साथ ही दिया एक नज़रिया जो उन्होने दुनिया के सामने ऐसे समय में ज़ाहिर किया है, जब दुनिया भर में इस्लाम विरोधी भावनाएं भड़काई जा रही हैं और लोग आतंकवाद को एक धर्म विशेष से जोड़ कर देख रहे हैं। क्रिस के इस फेसबुक पोस्ट को 125000 बार शेयर किया गया हालांकि अभी यह पोस्ट डिलीट कर दिया गया है।

क्या लिखा है क्रिस ने पोस्ट में..

क्रिस ने अपने पोस्ट में लिखा की मै उन लोगों से तंग आ चुका हूं जो मुझसे इस्लाम विरोधी होने की अपेक्षा करते हैं, क्योंकि मेरा पैर बम से उड़ा दिया गया था।

  • हां एक मुस्लिम ने मुझ पर हमला किया और मैने अपना पैर खो दिया ।
  • लेकिन उसी दिन ब्रिटिश सेना की एक वर्दी वाले मुस्लिम सैनिक ने भी अपना हाथ खोया था।
  • जिस हैलिकॉप्टर ने मुझे ज़मीन से उठाकर मेरी जान बचाई उसमें बैठा डॉक्टर भी मुस्लिम था।
  • जिस सर्जन ने मेरी सर्जरी की वह भी एक मुसलमान था।
  • जब में यूके वापस लौटकर आया तो मेरी देखभाल करने वाली नर्स भी एक मुस्लिम महिला थी।
  • मेरा स्वास्थ सहयोगी जिसने मेरी रोज़ाना की ज़रुरतों का ध्यान रखा, जिसने मुझे अपने झख्मों से उभरने में मदद की, जिसने मुझे फिर से चलने में मदद की वह भी एक मुस्लिम था।
  • घर लौटने के बाद जब में पहली बार अपने पिता के साथ बीयर पीने गया तब मुझे फ्री टैक्सी राईड देने वाला टैक्सी ड्राईवर भी एक मुस्लिम था।
  • एक मुस्लिम डॉक्टर ने ही मेरी पिता को पब में मेरी इलाज संबंधी सलाह दी।

क्रिस आगे समझाते हुए लिखते हैं की क्यों इस्लामोफोबिया त्रुटिपूर्ण सिधांत पर आधारित है..

अगर आप कुछ लोगों की वजह से पूरी कौम से नफरत करना करना चाहते हैं तो आप ऐसा करने के लिए मुक्त हैं, लेकिन कृपया अपने विचार मुझ पर न थोपें। आप सोचतें हैं की मुझे आसानी से निशाना बनाया जा सकता है क्योंकि किसी ने मुझ पर हमला कर यह तय कर दिया था की वह मेरा आखिरी दिन है। आईएसआईएस और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों की हरकतों के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को दोषी ठहराना वैसा ही है, जैसे केकेके और वेस्टबोरो बाप्टिस्ट चर्च की हरकतों की वजह से सभी क्रिश्चियन्स को दोषी ठहराना। अपने परिवार को गले लगाएं, अपनी ज़िंदगी देखें और अपने काम से मतलब रखें।

क्रिस हर्बर्ट का यह पोस्ट कुछ ही समय में वायरल हो गया और दुनिया भर में इसकी प्रशंसा की जाने लगी। दुनिया को धर्म के नाम पर बांटने वाली भावनाओं का प्रचार आजकल बहोत तेज़ी से हो रहा है। आईएसआईएस द्वारा युरोपीय देशों में हुए हमले और सीरिया युद्ध के बाद पैदा हुए रिफ्यूजी संकट की वजह से लोगों में इस्लाम विरोधी भावना का विस्तार हुआ है। ऐसे में यह पोस्ट एक सकारात्मक सोच का संचार करता है।

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