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…तो यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा ब्रिटेन

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आयुष ओझा | नई दिल्ली

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन को ब्रेक्जिट मुद्दे पर वहां की संसद में बीते मंगलवार को पहली बड़ी हार मिली, यहां तक कि उनकी खुद की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसदों ने विपक्षी सांसदों के साथ मिलकर हाउस ऑफ कॉमंस के कामकाज का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया जिससे ब्रेक्जिट में देरी हो सकती है और मजबूरन समय से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं।

बोरिस जॉनसन के 21 सांसदों का सरकार के खिलाफ मतदान
जॉनसन की खुद की पार्टी के 21 सांसदों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया जिससे इंग्लैंड में अक्टूबर के मध्य तक आम चुनाव कराए जाने की संभावना बन गई है । गौरतलब है कि जॉनसन इस वादे के साथ ही प्रधानमंत्री बने थे कि अगर 31 अक्टूबर तक ब्रेक्जिट पर समझौता नहीं हुआ तो भी ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा।

’31 अक्टूबर तक यूरोपीय संघ से अलग होगा ब्रिटेन’
बोरिस जॉनसन का कहना है कि डील हो या न हो, 31 अक्टूबर तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ये समयसीमा बढ़ाने के लिए उन्हें मजबूर किया गया तो देश को आम चुनावों की ओर बढ़ना होगा।

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ये है विवाद की जड़
इससे पहले ब्रेक्सिट प्रस्ताव पर कई बार हार का सामना करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री टेरीसा ने मई में इस्तीफ़ा दे दिया था, इसके बाद बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने थे। यह सारा विवाद 31 अक्टूबर तक यूरोपीय संघ से अलग होने को लेकर शुरू हुआ जिसमें विपक्षी सांसद लगातार दबाव बना रहे है कि इस समय सीमा को और अधिक बढ़ाया जाए।

ख़त्म हो चुकी है डील
गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने यूरोपीय संघ से जो ब्रेक्सिट डील की थी, उसे ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ में कई बार अस्वीकृत किया जा चुका है। यहां तक वर्तमान प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि ये डील अब ‘डेड’ यानी ख़त्म हो चुकी है।

समय से पहले चुनाव के लिए दो तिहाई सांसदों की सहमति
अब अगर इस पूरे विवाद को लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री समय से पहले चुनाव कराना चाहते है तो उसके लिए उन्हें दो तिहाई सांसदों की सहमति चाहिए होगी, ऐसे में क्या दो तिहाई सांसद इसके लिए राजी होंगे। हालांकि सैद्धांतिक तौर पर इसके अलावा एक और रास्ता है। जॉनसन इसके लिए संसद में एक प्रस्ताव लेकर आ सकते हैं और इसे वे साधारण बहुमत से पास करा सकते हैं, इसके लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत भी नहीं है।

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अब आगे क्या…
ऐसे में अगर 31 अक्टूबर से पहले चुनाव हो जाते हैं तो ब्रेक्सिट पर आगे क्या होगा, यह चुनाव के परिणाम पर निर्भर करेगा लेकिन अभी तो एक बार फिर से वहां पर सरकार को इस मुद्दे पर मुंह की खानी पड़ी है।