ब्रिटेन जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन: जीवाश्म ईंधन को, 2030 तक, ब्रिटेन कर देगा बे‘कार’!

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ब्रिटेन जलवायु परिवर्तन: ताज़ा वैश्विक घटनाक्रम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एक हरित औद्योगिक क्रांति के लिए प्रतिज्ञा ली है। उनके नेतृत्व में ली गयी इस प्रतिज्ञा का दावा है कि यूके में न सिर्फ़ ऊर्जा, परिवहन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 250,000 नौकरियों का सृजन होगा बल्कि 2030 तक वहां नयी डीजल और पेट्रोल करों की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लग जायेगा।

साथ ही, उसके बाद अगले पाँच सालों में सभी नए निवेश, कारोबार, हीटिंग सिस्टम, और कारों को शून्य कार्बन उत्सर्जन के अनुरूप होना पड़ेगा। यहीं नहीं, 2021 तक ट्रेजरी को सभी निवेश निर्णयों की समीक्षा करनी होगी और ये सुनिश्चित करना होगा कि सभी निवेश शुद्ध शून्य कार्बन के अनुसार हों और सरकार की जलवायु अनुकूलन टीमों की सभी योजनाएं, विश्व तापमान वर्ष 2100 तक 4c  को ध्यान मैं रखकर बनाना शुरू कर देना चाहिए।

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इसी क्रम में यह फ़ैसला भी लिया गया कि सभी तरह के व्यवसायों को ‘नेट शून्य कार्बन के अनुसार निगरानी और सत्यापन’ के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। इस बात की भी उम्मीद है कि यूके नए एनडीसी कंट्रीब्यूशन को दिसंबर 2020/जनवरी 2021 तक  प्रस्तुत करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम का आधार बनी यूके क्लाइमेट असेम्बली की एक जांच रिपोर्ट जो कहती है कि कोविड के बाद सरकार को सभी भागीदारों (चीन, अमेरिका सहित) के साथ काम करना चाहिए, यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज जलवायु-अनुकूल हों ।

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इस जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि:

कुल 93% विधानसभा सदस्य पूरी तरह से सहमत थे कि नियोक्ताओं और अन्य लोगों को लॉकडाउन आसान करने के इस तरह के कदम उठाने चाहिए जिससे जीवन शैली में ऐसे बदलाव आएं कि वह नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के अनुरूप हो सकें।

79% सदस्यों को लगता था कि नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन को प्राप्त करने में मदद के लिए सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए उठाए गए कदम ठीक हैं लेकिन 9% सदस्य इस बात से असहमत थे।

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इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (IIED) की वरिष्ठ फेलो डॉ कमिला तौल्मिन कहती हैं, “महामारी के कारण जलवायु सम्बन्धी वार्ताएं लगभग एक वर्ष पीछे चली गई हैं, COP26 के राष्ट्रपति के रूप में हम वर्ष 2020 में जलवायु कार्रवाई में मंदी या देरी को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं।

ब्रिटेन में और दुनिया भर में जलवायु का प्रभाव बार बार और लगातार महसूस किया जा रहा है। कई अफ्रीकी देश जलवायु प्रभावों और महामारी की दोहरी मार की वजह से एक गंभीर ऋण संकट का सामना कर रहे हैं । जलवायु संकट थम नहीं रहा है।”

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यह रिपोर्ट और प्रधान मंत्री जॉनसन के फ़ैसले दर्शाते हैं कि युके रिकवरी पैकेज पेश करके अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है जिससे आने वाले वक्त में अर्थव्यवस्था, नौकरियों और जलवायु के अनुरूप कम कार्बन उत्सर्जन को बढ़ावा मिलेगा।

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आगे, इंस्टीट्यूट फॉर न्यू इकोनॉमिक थिंकिंग (INET) के सीनियर फेलो, एडिअर टर्नर ने कहा, “समिति उन नीतियों के लिए अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर देती है जिससे दोनों दिशाओं में प्रगति होगी एक ओर आर्थिक सुधार और दूसरी ओर शून्य कार्बन उत्सर्जन, जो बिल्कुल सही भी है।

वो आगे कहते हैं, “ब्याज की गिरती हुई दरों को देखते हुए, अब अक्षय ऊर्जा और हरित बुनियादी ढांचे के अन्य रूपों में निवेश करने का समय है;  रोजगार को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए सरकार की नीतियां हरित रोजगार बनाने पर केंद्रित होनी चाहिए और उन फर्मों को सरकारी समर्थन मिलना चाहिए जो  उत्सर्जन में कटौती के लिए ज़्यादा से ज़्यादा प्रतिबद्ध हैं, पुरानी तकनीक पर निर्भर और संभावित रूप से फंसी हुई परीसंपत्तियों का समर्थन करने से बचना चाहिए।”

एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट (ECIU) के विश्लेषक जेस राल्सटन कहते हैं, “कुछ समय के लिए यह स्पष्ट है कि UK का बिल्डिंग स्टॉक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के अनुसार नहीं है और महामारी के दौरान ये भी पता लगा कि हमारे घर पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं । फिर भी आज, CCC की रिपोर्ट वास्तव में इस बात पर प्रकाश डालती है कि हमें इस उद्देश्य को पाने के लिए और कदम उठाने होंगे – क्योंकि यूके के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रति मिनट एक से अधिक घर 2050 तक रेट्रोफिट किए जाने की आवश्यकता होगी ।”

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एक महत्वपूर्ण बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “इस सब के साथ ही साथ एक पेचीदा सेक्टर को decarbonise करने के लिए, घरों को एनर्जी एफ्फिसियेंट बनाने और साथ ही साथ ऊर्जा बिल कम करने से देश भर में, अच्छी सैलरी और कुशल नौकरियों को भी अनलॉक किया जा सकता है, जिन क्षेत्रों में घरों में एनर्जी एफिसिएंसी ठीक नहीं है, खासकर उत्तर और मिडलैंड्स के इलाकों में, वहां स्टॉक को रेट्रोफिट कर अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किये जाने चाहिए, जिससे सरकार को कानूनी रूप से आवश्यक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक वास्तविक अवसर पैदा हो सके।”

Contributor: Nishant, a Lucknow-based journalist and environment enthusiast working towards prioritization of issues like climate change and environment in Hindi and vernacular media.

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