बोडोलैंड आज़ादी आंदोलन को शांति से कुचलने जा रहे हैं अमित शाह

Bodoland
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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

सोमवार यानी 27 जनवरी 2020 को गृह मंत्री अमित शाह और अलग बोडोलैंड (Bodoland) की मांग कर रहे एनडीएफबी (National Democratic Front of Bodoland-Progressive) उग्रवादियों के बीच शांति समझौता होने जा रहा है। भारत की अखंडता को बरकरार रखने में यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। आपको बता दें कि कई वर्षों से असम से अलग एक राज्य बोडोलैंड बनाने की मांग हो रही थी। जहां मुख्यतः बोडो समुदाय के लोग रहते हैं। बोडोलैंड को न सिर्फ अलग राज्य बनाने बल्कि एक स्वतंत्र देश घोषित करने की भी मांग होती रही है। इस लड़ाई में अब तक कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं।

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सुत्रों के मुताबिक सरकार बोडोलैंड की स्थापना के पक्ष में नहीं है और न ही उस क्षेत्र को केंद्र शासित राज्य बनाने का सोच रही है। इस शांति समझौते के तहत अलग बोडोलैंड की मांग करनेवाले सभी अलगाववादियों को सरकार रिहा कर देगी। एनआईए और सीबीआई एनडीएफबी नेताओं को सभी आरोपों से मुक्त कर देगी। बोडो समुदाय के विकास के लिए सरकार विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी जिसकी मदद से बोडो समुदाय के लोगों की संस्कृति और सभ्यता को बचाया जाएगा। अलगाववादियों के पुनर्वास का भी आश्वासन दिया जाएगा।

बोडोलैंड की स्थापना के लिए कई संगठन कार्यरत हैं इसमें कई उग्रवादी समूह भी हैं। इस शांति समझौते से एक बड़ा मसला हल हो जाएगा साथ ही असम की अखंडता बरकरार रहेगी।

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बोडोलैंड स्वायत्त क्षेत्र

असम के कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुरी जिले बोडोलैंड के अंतर्गत आते हैं। इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र काउंसिल काम करती है जिसे कई विशेष अधिकार भारत सरकार की तरफ से दिए गए हैं, इसे बीटीसी कहा जाता है, यानी बोडेलैंड टेरिटोरियल काउंसिल। 1993 में बोडोलैंड स्टूडेंट यूनियन और भारत सरकार के बीच हुए समझौते में बोडोलैंड ऑटोनॉमस काउंसिल बनाई गई जिसे मामुली शक्तियां दी गई थी। 2003 में बीटीसी की स्थापना हुई जिसमें कुछ आर्थिक शक्तियां भी इस काउंसिल को प्रदान की गई। अब नए समझौते के बाद इस काउंसिल को और शक्तिशाली बनाया जाएगा। पहले चार जिलों तक सीमित यह काउंसिल नए समझौते के बाद 5 जिलों तक फैल जाएगी इसमें सोनितपुर और लखीमपुर जिले भी शामिल होंगे।

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