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Black Fungus: कोरोना की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है ब्लैक फंगस?

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Black Fungus mucormycosis : देश में कुछ दिन पहले कोरोना का संक्रमण (Coronavirus) बहुत गंभीर था लेकिन अब इस समय सबसे ज्यादा ब्लैक फंगस (Black Fugus) के मामले सामने आ रहे हैं। भारत में कोरोना वायरस के साथ-साथ म्यूकर माइकोसिस (Black Fungus mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ता जा रहा है। देश भर के कई राज्यों से कोविड-19 से ठीक होने वाले मरीजों में ब्लैक फंगस का संक्रमण और इससे हुई मौतों के मामले सामने आ रहे हैं। अकेले महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस इंफेक्शन से अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है, और 120 से अधिक लोग ब्लैक फंग्स से संक्रमित हैं।इसके काफी सक्रिय मामले भी सामने आयें।

ब्लैक फंग्स से कैसे बचें, क्या सावधानियां बरतें
एम्स प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया (Dr. Randeep Guleria, AIIMS) ने बताया कि दरअसल ब्लैक फंगस उन्हीं लोगों पर अटैक कर पाता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। चूंकि डाइबिटीज मरीज स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनका इम्यूनिटी लेवल कम हो जाता है, इस कारण ब्लैक फंगस को उन्हें अपना शिकार बनाने का मौका मिल जाता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को स्टेरॉइट्स का उपयोग नही करना चाहिए दोनों एक्सपर्ट ने इस संबंध में बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिन्हें आपको भी गंभीरता से समझना चाहिए। ब्लैक फंग्स से संक्रमित होने वाले व्यक्ति को दो दिनों तक इलाज न मिलने पर उसकी आँखों की रोशनी जाने के साथ-साथ उसकी मौत भी हो सकती है।

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कितना खतरनाक है ब्लैक फंगस
यह ब्लैक फंग्स ने लोगों के बीच एक डर पैदा कर दिया है सर गंगाराम अस्पताल से जुड़े वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनीष मुंजाल मानते हैं कि ये एक गंभीर बीमारी ज़रूर है, लेकिन इससे डरने की ज़रूरत नहीं हैं वे कहते हैं, ब्लैक फंगस या म्यूकॉरमाइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं हैं ये नाक, कान और गले ही नहीं, शरीर के अन्य अंगों को भी नुक़सान पहुँचाती है। लेकिन बीते कुछ दिनों से ये बीमारी एक बड़ा रूप अख़्तियार कर रही है, क्योंकि ये बीमारी इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने की वजह से होती है।

शरीर पर किस तरह हमला करता हैं ब्लैक फंग्स
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये फंगस हवा में रहता है जिससे हमारे किसी भी चीज़ में उपस्थित हो जाता हैं जैसे कि खाने के चीज पर बाहरी किसी खाने के होटल में किसी खुली चीज़ पर और साथ हमारे बॉडी पर भी हावी हो सकता हैं हमें इन सब से बचने की जरूरत है। इसके बाद ये बीमारी बहुत तेज़ी से फैलती हुई सब कुछ ख़राब करते हुए दिमाग़ तक चली जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें मौत का रिस्क फैक्टर 50 प्रतिशत है।

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