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Black Fungus मामले तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?

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भारत में अब तक ब्लैक फंगस (Black Fungus) के 6 हजार (above 6 thousand cases of black fungus in India) से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। यह तेजी से लोगो में फैलता जा रहा है। ब्लैक फंगस कमजोर इम्यूनिटी सिस्टम पर प्रभाव( black fungus impacts on weak immunity system) डालता है या जिनके शरीर में स्टेरोइड की मात्रा ज्यादा होती है।

क्या है ब्लैक फंगस? (What is Black Fungus)

Mucormycosis को ब्लैक फंगस भी कहते हैं। US सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (US center for disease and prevention) (CDS) के अनुसार ब्लैक फंगस एक गंभीर बहुत ही कम मिलने वाला फंगल इंफेक्शन है।जो कि moulids के एक ग्रुप के कारण (group of moulids) होता है, इसे mucoromycetes भी कहते है।

यह कैंसर की तरह व्यवहार करता है। कैंसर को जानलेवा बनने में कुछ महीनों लग जाते हैं लेकिन ब्लैक फंगस से कुछ ही घंटों मे जान गवाई जा सकती है। इससे आँखों की रोशनी भी जा सकती है। यह आँख, नाक, चेहरे, और दिमाग पर फैलता है।

भारत में इतने मामले क्यों?

भारत में इस समय कोरोना वायरस अभी भी अपने पाँव जमाया हुआ है। कोरोना वायरस आसानी से ब्लैक फंगस को फैलने के लिए पर्याप्त इनवायरमेंट देता है। यह कम इम्युनिटी वाले शरीर में जल्दी प्रभाव दिखाता है। जो लोग अभी अभी कोरोना वायरस से ठीक हुए हैं उनको भी इस फंगल इंफेक्शन का खतरा है। कुछ पॉजिटिव मरीजों के भी मामले सामने आए हैं।

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कोरोना वायरस की वजह से लोगो को स्टेरॉयड अधिक मात्रा में दिया जा रहा है। अधिक मात्रा में या लंबे समय से स्टेरॉयड लिए जाने की वजह से mucormycosis का खतरा हो सकता है, क्योंकि स्टेरॉयड भी हमारी इम्युनिटी को कम करता है। स्टेरॉयड जिनको शुगर नहीं है उनमें भी ज्यादा मात्रा में ब्लड शुगर बढ़ाने की क्षमता रखता है। जिससे ब्लैक फंगस हो सकता है।

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एक्सपर्ट ने बताया कि भारत में आक्सीजन की कमी की वजह से इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन भी इस्तेमाल करी जा रही है, जिसमें शायद प्यूरिफिकेशन सही नहीं होता है। यहां ह्यूमिडिफायड ऑक्सीजन देते हैं। बोतल में पानी के ज़रिए, शायद ऐसा भी हो कि इसमें डिस्टिल्ड की जगह नल का पानी इस्तेमाल हो रहा हो, या बॉटल ठीक से स्टेरायल नहीं हो रहे हैं।

डॉ प्रशांत केवले ने क्या कहा?

डॉ प्रशांत केवले ने कहा कि ‘भारत-महाराष्ट्र में जो स्ट्रेन हैं वो भी एक फ़ैक्टर है कि ब्लैक फ़ंगस को बढ़ावा मिला है, मगर ऑक्सीजन और डिस्टिल्ड वॉटर भी फ़ैक्टर हैं.’

ये फंगस हवा, नमी वाली जगह, मिट्टी, सीलन भरे कमरों आदि में पाया जाता है। स्वस्थ लोगों को फिक्र की जरूरत नहीं है, लेकिन जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें ब्लैक फंगस का खतरा है। दूषित ऑक्सिजन-पानी आग में घी डालने का काम कर सकते हैं।

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किसको अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है?

डायबिटीज, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट और किसी भी इम्यूनिटी सिस्टम सपोर्ट पर रहने वालों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। शुगर के मरीज को अपना शुगर लेवल कन्ट्रोल में रखना बहुत जरूरी है नहीं तो उनके लिए ये इंफेक्शन जानलेवा साबित हो सकता है।

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अगर आप किसी भी प्रकार के स्टेरॉयड का सेवन कर रहे हैं तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें। कुछ दवाइयाँ भी फंगल इंफेक्शन का कारण बन सकती हैं। इसलिए जब जरूरी हो तभी दवाइयों ओर स्टेरॉयड का इस्तेमाल करें लेकिन वो भी गाइडलाइन के अनुसार।

किस-किस राज्यों में सबसे ज्यादा है ब्लैक फंगस के मामले?

हालांकि सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में देखने को मिले है, लेकिन अब दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरयाणा, झारखंड, बिहार, असम, ओडिसा और भी कई राज्य इस फंगल इंफेक्शन से जूझ रहे हैं।

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