Wed. Jan 29th, 2020

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नहीं पकी उद्धव की खिचड़ी, रातोंरात बनाई फडणवीस ने बिरयानी

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पल्लव जैन | विचार

महाराष्ट्र में राजनीतिक ड्रामा पिछले 2 हफ़्तों से चल रहा था। शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के बीच साझा कार्यक्रम लगभग तैयार हो गया था यह भी तय हो गया था कि उद्धव सीएम होंगे और अजित पवार उप मुख्यमंत्री। आज तीनो दल राज्यपाल से मिलकर सरकार बना लेते। लेकिन जब आज सुबह जब नींद खुली तो पाया कि राज्यपाल ने नए सीएम को शपथ दिला दी है और वो उद्धव नहीं फडणवीस है।

देवेंद्र फडणवीस को एनसीपी के अजित पवार का साथ मिल गया जिनके साथ करीब 35 विधायक हैं। इसके अलावा कुछ शिवसेना और स्वतंत्र विधायक भी भाजपा नीत सरकार के साथ हैं। इन सब को मिलाकर भाजपा ने 145 का जादुई आंकड़ा छू लिया। एनसीपी के अजित पवार को भाजपा सरकार में भी उप मुख्यमंत्री का ही पद दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक और मीडिया गलियारा हतप्रभ है। कि आखिर इतना बड़ा उलटफेर हो कैसे गया। और मीडिया के पंडितों की इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी।

अब आपको बता दें कि इस पूरे उलटफेर के पीछे शरद पवार और अमित शाह का गणित है। हालांकि शरद पवार ने ट्वीट कर यह भी कहा कि उनके बेटे अजित पवार द्वारा भाजपा का समर्थन उनका निजी फैसला है। इससे एनसीपी के कोई वास्ता नहीं। यानी एक बेटे ने पिता को धोखा दिया है। वैसे देखा जाए तो भाजपा के साथ जाने में ज़्यादा फायदा है क्योंकि। ईडी और सीबीआई से पीछा छुड़ाने के इससे अच्छा मौका नहीं मिलता। लेकिन आपको बता दें कि यह संभव नहीं है कि शरद पवार की जानकारी के बिना अजित पवार इतना बड़ा कदम उठाएंगे। एनसीपी और भाजपा के साथ आने के संकेत पहले ही मिलना शुरू हो गए थे। पहले तो संसद में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एनसीपी के अनुशासन की तारीफ फिर शरद पवार किसानों की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री से मिले और कल हुई NCP- Shivsena-BJP की बैठक से जल्दी बाहर आ गए।

मीडिया की नज़र पूरे समय शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के घटनाक्रम पर बनी रही इस दौरान भाजपा अपनी चालें चल रही थी। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम से एक बार फिर यह साबित हो गया कि अमित शाह और मोदी से बड़ा राजनीतिक चाणक्य इस देश में नहीं है। बिना झुके 30 साल पुराने साथी शिवसेना को तलाक फिर राष्ट्रपति शासन लगाकर यह कहना कि हम सरकार नहीं बनाएंगे जब विरोधी पूरे कार्यक्रम के साथ तैयार हो गए तब सब कुछ पलटते हुए फडणवीस को फिर से शपथ दिलवा देना। भाजपा ने शिवसेना को उसकी जगह दिखा दी और बता दिया कि उद्धव कच्चे खिलाड़ी हैं। इधर सबसे ज़्यादा किरकिरी कांग्रेस की हुई जो बड़ी मुश्किल से सेकुलरिज्म से समझौता कर गठबंधन को राजी हुए थी। लेकिन उन्ही के बरसो पुराने सहयोगी ने उन्हें धोखा दे दिया।

कोई किसी का सगा नहीं

पहले 30 साल पुराने साथी भाजपा को शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद के लिए धोखा दिया। भाजपा ने 5 साल मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना से रिश्ता तोड़ लिया। उधर एनसीपी ने कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। एनसीपी के अजित पवार ने अपने पिता को धोखा दे दिया। सत्ता के लिए भाजपा ने भर्ष्टाचार के आरोप में घिरे अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बना दिया। भाजपा ने न खाऊंगा न खाने दूंगा वाले सिद्धांत से समझौता कर लिया। शिवसेना सत्ता के लिए हिंदुत्व छोड़ने को तैयार हो गई। कांग्रेस ने सत्ता के लिए धर्मनिरपेक्षता से समझौता कर लिया। महाराष्ट्र की राजनीति देखने के बाद यह समझ आ गया कि राजनीति केवल अवसरों का खेल है। यहाँ सिद्धांत, विचारधारा और नियम केवल दिखावे के लिए होते हैं। असल खेल कुर्सी का ही है। फिलहाल इतनी रोचक राजनीति के लिए शरद पवार और अमित शाह का धन्यवाद बरसों बाद कुछ इतना दिलचस्प देखा। और फडणवीस को दोबारा मुख्यमंत्री बनने की बधाई साथ ही उद्धव ठाकरे को सांत्वना।

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