SCST एक्ट पर भाजपा का दोहरा चरित्र क्यों?

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न्यूज़ डेस्क।। चुनावी साल है, छोटी सी गलती भाजपा को उसी दौर में पहुंचा सकती है जहां से उन्होंने शुरुवात की थी। भारत में चुनावों के नतीजे क्या होंगे इसकी भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। इसीलिए भाजपा का हर नेता हर कदम फूंक फूंक कर रख रहा है।

मध्य प्रदेश में चुनाव एक दो महीनों में हो जाएंगे, किसान आंदोलन, scst का भारत बंद फिर उसके विरोध में सवर्णों का भारत बंद सारे आंदोलनों का सबसे ज़्यादा असर अगर कहीं देखा गया तो वो मध्यप्रदेश ही था। इन आंदोलनों ने सरकार की नींद हराम कर दी है। भाजपा चुनावी साल में हर वर्ग को खुश करना चाहती है। इसका अंदाज़ा शिवराज सिंह चौहान के SC/ST एक्ट पर आए बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सवर्णों को घबराने की ज़रूरत नहीं है, मध्यप्रदेश में इस कानून के तहत बिना जांच गिरफ्तारी नहीं होगी। मतलब माननीय मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के किये कराए पर पानी फेर दिया। जब सुप्रीम कोर्ट ने SCST कानून में बिना जांच गिरफ्तारी न होने का प्रावधान किया था, तो विपक्ष ने मोदी सरकार पर कानून को कमज़ोर करने के आरोप लगा दिए। आनन फानन में अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया गया और SCST कानून को वापस मूल रूप में लाया गया। सरकार नहीं चाहती थी कि लोगों में यह संदेश जाए कि वो दलित विरोधी है। इसका खामियाजा भाजपा बिहार चुनाव में भर चुकी है, जहां मोहन भागवत के आरक्षण समीक्षा वाले बयान ने भाजपा की लुटिया डुबो दी थी।

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भाजपा सवर्ण वोट गवाय बिना दलित वोट पर कब्ज़ा करने का ख्वाब देख रही है। इसीलिए राज्य और केंद्र में अलग अलग नीति का कार्ड खेला जा रहा है। अब यह समझ नहीं आता जब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि SCST कानून को किसी हाल में कमज़ोर नहीं होने दिया जाएगा फिर किस आधार पर शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश की जनता को आश्वासन दे रहे हैं कि मध्यप्रदेश में अलग कानून लागू होगा जिसमें बिना जांच गिरफ्तारी नहीं होगी।

शिवराज सिंह चैहान यह जानते हैं कि अगर सवर्णों को नाराज़ किया तो 2018 में फिर से लौटना नामुमकिन हो जाएगा। इस समय दो नावों में सवारी की कोशिश में शिवराज कहीं ऐसा न हो संतुलन खो बैठे और कहीं के न रहें।

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