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हर रोज होता है द्रोपदी का चीरहरण, कहां है कृष्ण?

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लेखक- सचिन झा शेखर।

आप कभी बिहार गये हैं? किताबों में जरूर पढ़ा होगा! किताब नहीं तो अखबारो में तो जरूर पढ़ा ही होगा महावीर और बुद्ध की धरती रही है बिहार। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भी कर्मस्थली रही है। नालंदा और बिक्रमशिला की प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहर देखने को मिल सकते हैं आज भी।

वर्तमान में बिहार देश का सर्वाधिक घनी आबादी वाला राज्य है। 2011 के जनगणना के अनुसार देश में सबसे कम पढ़े लिखे लोगों का प्रतिशत भी बिहार में ही है। बिहार में सम्राट अशोक के बाद 2005 में एक नए महान सम्राट का अवतरण हुआ। सम्राट का राज्यभिषेक पटना के एतिहासिक गांधी मैदान में किया गया।

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जिस प्रकार अन्य महान सम्राटों को उपाधियों से नवाजा जाता रहा है जैसे राजा हरीशचंद्र को सत्यवादी की उपाधी दी गयी वैसे ही बिहार के इस महान सम्राट को सुशासन बाबू की उपाधी दी गयी। बिहार के विकास और शासन की चर्चा पटना से लेकर दिल्ली और नोएडा स्थित कथित नेशनल मीडिया हाऊसों में बैठें नारदों द्वारा किया जाता रहा है।

समाचार चैनलों की रिपोर्टों में नीतीश बाबू का बिहार तरक्की की राह पर चल पड़ा बावजूद इसके बिहार के मिथिला क्षेत्र के 16 जिलों को केंद्र सरकार ने मजदूर क्षेत्र घोषित कर दिया। मतलब अर्थात यह क्षेत्र देश को सिर्फ मजदूर उपलब्ध करवा सकता है।

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देश की बदतर होती शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण इस समय नीतीश बाबू का विकासशील बिहार है जहां 90 फीसदी विश्वविद्यालय में शिक्षक ही नहीं हैं। बिहार की प्रतिव्यक्ति आय अफगानिस्तान और गरीब अफ्रिकी देशों से भी कम है।

पिछले 13 सालों में सम्राट ने इतना विकास किया है कि एक भी कारखाने नहीं लगे और न ही वृहत स्तर पर कोई रोजगार के अवसर उत्पन्न करने का कोई प्रयास किया गया है। यातायात के साधनों के विस्तार के साथ ही बिहार के मजदूर दिल्ली मुंबई सहित देश के लगभग सभी शहरों में धक्के खाते
अधिक संख्या में देखें जाने लगे।

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बिहार में शिक्षा के स्तर में लगातार गिरावट और सामाजिक आर्थिक विकास में पिछड़ने के कारण एक नये समाजिक परिवेश का निर्माण हुआ जो जाति और धर्म के नाम पर सिर्फ खड़ा होना पहले से जानता था।

बिहार की खबरों पर पैनी नजर रखने वाले बखूबी जानते हैं की बिहार में हर दूसरे दिन किसी न किसी शहर में सामूहिक बलात्कार और छेड़खानी की घटना होती है और डिजिटल भारत के बढते आयामों के चलते उसे वायरल किया जाता रहा है।

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हाल ही में बिहार के आरा जिले के बिहिया में एक महिला को निर्वस्त्र कर भीड़ सरेआम घुमाती है। इस मामले की शुरूआत तब होती है जब एक 16 साल के युवक की हत्या कथित रेड लाइट एरिया के पास होती है। उसके बाद भीड़ अनियंत्रित हो जाती है और कथित रेड लाइट एरिया की एक महिला को निर्वस्त्र घुमाया जाता है।

इस मामले में कई सवाल अपने आप ही खड़े होते हैं। पहला सवाल यह कि अवैध रूप से दिल्ली पटना रेल लाइन के किनारे पटना से सटे बिहिया में कैसे रेड लाइट एरिया संचालित हो रहा है? दूसरा समाजिक परिवेश में कैसे एक 16 साल का युवक रेड लाइट एरिया की और जाने की सोच रहा है समाज का किस हद तक नैतिक पतन हो चुका है?

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आम लोगों में प्रशासन और सत्ता और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली से किस हद तक विश्वास टूट चूका है कि लोग कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं? दिन रात द्रोपदी का चिरहरण और यत्र नारी पूज्यंते तत्र रम्यन्ते देवता की कहानी सुनने वाले समाज से हजारों की भीड़ से एक भी कृष्ण बनने की चेष्टा करने वाला क्यों नहीं निकला?

शासन सत्ता का काम सिर्फ राज करना नहीं होता है बल्कि सामाजिक और नैतिक विकास करना भी होता है। बिहार में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) ने ऑडिट रिपोर्ट 31 मई को नीतीश सरकार को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि कैसे इन बालिका गृह में छोटी-छोटी
बच्चियों का शोषण किया जाता रहा।

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रिपोर्ट आने के बाद क्षेत्रिय चैनल कशिश न्यूज के संपादक संतोष सिंह ने इस मामले पर एक मूहिम छेड़ दी। लेकिन सरकार की तरफ से किसी
भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी। बाद में एक के बाद एक मामले सामने आए और मीडिया के बढ़ते दवाब के चलते ब्रजेश ठाकुर की गिरफ्तारी कर मामले को ठंडा करने का प्रयास किया गया।

बाद में मामला सीबीआई के पास पहुंचा। ब्रजेश ठाकुर के बाद सीबीआई की दस्तक राज्य सरकार के मंत्री और आधुनिक सम्राट के करीबी लोगों तक पहुंचने लगा। सुशासन का पताका देश दूनिया में फहराने लगा एक के बाद एक नई कहानी हर दिन सामने आने लगी।

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लोकतंत्र के इतिहास में कई ऐसे मोड़ आए हैं जब लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिये विधायिका और कार्यपालिका को आपस में टकराते देखा गया है। लेकिन बाबा नागार्जून की धरती बिहार में आधुनिक सुशासन सम्राट के दौर में न्यायपालिका ने भी आदेश जारी कर दिया है बुरा देखो (वायरल विडियो) बुरा सुनो (इन महान शेल्टर होम संचालकों के किस्से) लेकिन तुम बुरा हो रहा है उसकी जांच कहा तक पहुंची इसे लिखों मत।

अगर रिपोर्टिंग होती है तो राज्य की बदनामी होती है आज कौन से मंत्री जी सीबीआई के हत्थे चढ़ें इसकी भनक जनता को लग जाती है। फिर सुशासन का तिलिस्म टूट जाएगा आम जनता सवाल खड़ा करेगी फिर कौन इतना जवाब देगा?

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बात बात में नैतिकता और मूल्यों की बात करने वाले के राज्य में पत्रकारिता का मुहं बंद किया जा रहा हैl लोकतंत्र के तीन खंभे एक साथ खड़े हो गये हैं। चौथा जिसे पहले भी वाच डॉग ही माना जाता रहा था उसे चोर के उपर भौकने से भी रोका जा रहा है।

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